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सिनेमाः आधे इधर, आधे उधर जाएंगे?

सिनेमाघरों के खुलने के ऐलान के साथ ही इससे जुड़े हजारों लोगों के चेहरे खिले. दूसरी ओर अब दर्शकों के उधर मुड़ने की संभावनाओं के मद्देनजर ओटीटी प्लेटफॉर्म भी बदल रहे रणनीति.

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सिनेमाघर खोलने की घोषणा से बॉलीवुड में उत्साह का माहौल बन गया है. सिनेमाघर खोलने की घोषणा से बॉलीवुड में उत्साह का माहौल बन गया है.

महाराष्ट्र में 22 अक्तूबर से सिनेमाघर खोलने की घोषणा से बॉलीवुड में उत्साह का माहौल बन गया है. निर्माताओं को उम्मीद है कि पूरे डेढ़ साल से परदे पर ऐक्शन देखने से वंचित दर्शक अब मौका आते ही सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स में टूट पड़ेंगे. दूसरी ओर, अंदेशा यह भी है कि महामारी के दौरान खूब गुलजार रहे ओटीटी प्लेटफॉर्म को अब सब्स्क्राइबर बेस बरकरार रख पाना मुश्किल हो जाएगा.

फिल्म व्यवसाय विशेषज्ञ कोमल नाहटा साफ शब्दों में कहते हैं, ''सिनेमाघर खुलने के बाद कोई भी ओटीटी प्लेटफॉर्म नई फिल्म पहले नहीं दिखा पाएगा. सिनेमाघरों में रिलीज के बाद ही उसे ओटीटी पर बेचा जाएगा. ऐसे में दर्शक सिनेमाघरों का रुख करेंगे.’’ ओटीटी वाले दरअसल, अपने-अपने प्लेटफॉर्म पर नई फिल्मों के प्रीमियर के जरिए ही सब्स्क्राइबर बढ़ा रहे थे.

सिनेमा का सबसे ज्यादा लगभग 40 फीसद बिजनेस मुंबई सहित महाराष्ट्र में होता है. इसलिए महाराष्ट्र के थिएटर खुलने से निर्माता ज्यादा उत्साहित हैं. मल्टीप्लेक्स आयनॉक्स लीजर लिमिटेड के सीईओ आलोक टंडन के शब्दों में, ''एक ही दिन में 20 से ज्यादा फिल्मों के रिलीज की घोषणा फिल्म इंडस्ट्री के उत्साह को दर्शाने के अलावा इंडस्ट्री में सिनेमा के महत्व को भी साबित करती है.’’

कोरोना काल में जब वेबसीरीज की भी शूटिंग नहीं हो रही थी, ओटीटी वालों ने महंगे दामों में फिल्में खरीदीं ताकि वे अपने सब्सक्राइबर बढ़ा सकें. जिस तरह से ओटीटी पर फिल्में जाने लगीं उससे इस अंदेशे को बल मिलने लगा कि थिएटर बंद हो जाएंगे. तब सिनेमाघरों के मालिकों ने निर्माताओं से आग्रह किया कि वे फिल्में ओटीटी पर न बेचें, महामारी के खत्म होने का इंतजार करें. फिर भी कुछ निर्माताओं ने फिल्में बेचीं.

उनका तर्क था कि फिल्म डिब्बे में बंद रखकर ज्यादा दिन तक नुक्सान उठाने में वे सक्षम नहीं. एक अनुमान के मुताबिक, महामारी के दौरान सिनेमा उद्योग को करीब 4,800 करोड़ रु. का नुक्सान हुआ है. ओटीटी प्लेटफॉर्म जी-5 इंडिया के चीफ बिजनेस ऑफिसर मनीष कालरा का आकलन है, ''पिछले साल भर में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मार्केटिंग के तौर तरीकों में भारी बदलाव आया है. फिल्मों और शो को बढ़ावा देने के लिए भी अनोखे तरीके अपनाए गए ताकि अपने दर्शकों की पहुंच का विस्तार कर सकें.’’

अब जब सिनेमाघर खुलने का ऐलान हुआ है तो महंगी फिल्में भी डिब्बे से बाहर आ रही हैं. 22 अक्तूबर से दिसंबर के दौरान रिलीज होने वाली फिल्मों की लिस्ट देखिए जरा: सूर्यवंशी (अक्षय कुमार, रणवीर सिंह और अजय देवगन), बंटी और बबली-2 (सैफ अली खान-रानी मुखर्जी), सत्यमेव जयते-2 (जॉन अब्राहम), चंडीगढ़ करे आशिकी (आयुष्मान खुराना और वाणी कपूर), 1983 के क्रिकेट विश्व कप पर आधारित 83 (रणवीर सिंह-दीपिका पादुकोण).

सिनेमाघरों के खुलने से ओटीटी प्लेटफॉर्मों के बिजनेस को भी चुनौती मिलने वाली है. बिजनेस बढ़ाने के लिए वे तरह-तरह की रणनीति के बारे में सोच रहे हैं. अमेजन प्राइम ने थिएटर में रिलीज हो चुकी चेहरे के अलावा वाल्ट डिज्नी एनिमेशन स्टुडियो की एन्कांटो और मराठी फिल्म लापाछापी की हिंदी रीमेक हॉरर फिल्म छोरी दिखाने की घोषणा की है.

ओटीटी वालों की मंशा के बारे में एक अन्य फिल्म व्यवसाय विशेषज्ञ अतुल मोहन बताते हैं, ''ओटीटी वाले अब कानूनी झमेले में फंसने से बचना चाहते हैं. इसलिए वे निर्माताओं पर फिल्म को पहले थिएटर में रिलीज करने के लिए दबाव बना रहे हैं ताकि उन्हें सस्ते में सेंसर वाली फिल्में मिल जाएं. इसकी शुरुआत बेलबॉटम और थलाइवी से हो चुकी है.

नेटफ्लिक्स और अमेजन जैसे बड़े प्लेयर साल में 10 फिल्में भी खरीदकर ग्राहकों को साथ रखने में कामयाब रहते हैं. वैसे, कालरा दावा करते हैं, ''सब्सक्राइबर की समस्या पैदा नहीं होगी. हमारे अपने सब्सक्राइबर हैं जिनको हम उनकी पसंद की चीजें मुहैया कराते हैं. वे हमसे जुड़े हुए हैं.’’

ओटीटी वाले अब फिल्म के अलावा वेबसीरीज के कंटेंट पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं ताकि वे प्रतियोगियों से आगे निकल सकें. नाहटा के शब्दों में, ''फिलहाल ओटीटी को दर्शक लाने की चुनौती रहेगी. लेकिन कुछ समय बाद खास ओटीटी के लिए फिल्में बनने लगेंगी और वे अपनी फिल्में दिखा पाएंगे. तब शायद उन्हें ग्राहकों की कमी नहीं रहेगी और फिर वे व्यावसायिक घाटे को भी संभाल सकते हैं.’’

कालरा अपनी रणनीति को इशारे में बयान करते हैं, ''अपनी सुविधानुसार अच्छे कंटेंट की तलाश करने वाले ग्राहकों का हम ख्याल रखते हैं और उनके लिए वैसे कंटेंट देते हैं.’’ टंडन सबके भले की बात करते हुए कहते हैं, ''थिएट्रिकल विंडो सिस्टम का सही तरीके से पालन करने पर इंडस्ट्री की सभी संस्थाओं को लाभ मिलता है.’’

यानी मनोरंजन की इस दुनिया में कमाई के लिए भविष्य में सिनेमा और ओटीटी वाले कैसी रणनीति अपनाते हैं, देखना रोमांचक होगा.

सूर्यवंशी, 83, बंटी और बबली-2 जैसी फिल्मों से सिनेमाघरों को बड़ी उम्मीदें हैं.

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