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सिनेमाः औरतों की दुनिया

ओटीटी फॉर्मेट पर महिला किरदारों, लेखकों, रचनाकारों और निर्देशकों को मिली जगह तो वे अपनी अदाकारी का प्रदर्शन खुद करने लगीं

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नए तेवर में अरण्यक में रवीना टंडन नए तेवर में अरण्यक में रवीना टंडन

वर्ष 2017 में स्टैंड-अप कॉमिक सुमुखी सुरेश ने एक जुनूनी रोमांटिक महिला को लेकर शो का ताना-बाना बुना. सुरेश कहती हैं, ''मैंने सोचा था कि लीड रोल मैं करूंगी, उसकी अजीज दोस्त का नहीं. लेकिन मुझसे कहा गया कि लीड रोल के लिए मेरा चेहरा फिट नहीं है और पूछा गया कि क्या मैं अपने दम पर कोई फिल्म या शो लोकप्रिय कर सकती हूं. उन्हें गलत साबित करने का एक ही तरीका बचा था कि मैं अपना शो बनाऊं.'' जल्दी ही पुष्पावल्ली आई, जिसमें सुरेश एक लड़की के अपने चेहरे को लेकर असुरक्षा भाव और उससे उसके व्यवहार में आए बेतुकेपन को प्रदर्शित करती हैं, भले ही उन्होंने दर्शकों को हंसाया भी. अमेजन प्राइम वीडियो की इस सीरीज की सराहना की गई कि उसने अच्छी न दिखने वाली हीरोइन पर शो बनाने की हिम्मत की. पांच साल बाद महिला केंद्रित वेब शो इतने असामान्य नहीं हैं.

हर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर एक अभिनेत्री या कई अभिनेत्रियों के कई लोकप्रिय शो चल रहे हैं. डिज्नी+हॉटस्टार पर आर्या (सुष्मिता सेन) और आउट ऑफ लव (रसिका दुग्गल) दोनों के दो सीजन हुए और हाल में रिलीज हुए मेडिकल ड्रामा ह्युमन में शेफाली शाह और कीर्ति कुलहरि हैं. अमेजन प्राइम वीडियो 2022 के आखिर में फोर मोर शॉट्स प्लीज! का तीसरा सेशन रिलीज करेगा. पिछले साल सोनीलिव पर महारानी में हुमा कुरैशी ने बेमन से राजनीति में उतरी नेता का अभिनय किया, जो कुछ-कुछ राबड़ी देवी की याद दिला रही थी. 2021 में ऑल्टबालाजी ने लेस्बियन रिश्ते की पड़ताल करती द मैरिड वूमन बनाने का विचार छोड़ दिया था, जबकि उसी ने महिला केंद्रित शुरुआती सीरीज में से एक निमरत कौर अभिनीत द टेस्ट केस बनाई थी. नेटफ्लिक्स पर तो 2022 के लिए ढेर सारी स्त्री केंद्रित शो हैं. मसलन, शी (अदिति पोहांकर) का नया सेशन और मसाबा मसाबा (मसाबा गुप्ता) के अलावा माधुरी दीक्षित नेने की ओटीटी पर पहली पेशकश द फेम गेम और साक्षी तंवर अभिनीत माई. 

वर्ष 2022 के दो महीनों में ही जी5 पर जनवरी में कौन बनेगी शिखरवटी और उसके बाद फरवरी में दो असामान्य महिलाओं पर केंद्रित अपराध थ्रिलर मिथ्या रिलीज हो चुकी है. एक प्रमुख प्रोडक्शन कंपनी अगले साल ऐसा ओटीटी प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी कर रही है जो खासकर 'स्त्री अगुआ कंटेंट' पर फोकस करेगी. जी5 की मुख्य कंटेंट अफसर निमिषा पांडेय के मुताबिक, अब 'वक्त' है कि अफसाने पर महिलाओं का दबदबा कायम हो, क्योंकि ओटीटी दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उन्हीं का तो है. 

प्रमुख मीडिया एनालिटिक्स तथा कंसल्टिंग फर्म ओरमैक्स मीडिया के मुताबिक, देश में 35.3 करोड़ डिजिटल वीडियो दर्शकों में 41 फीसद महिलाएं हैं. बड़े महानगरों में स्त्री और पुरुष दर्शकों का अनुपात तकरीबन एक बराबर है. ओरमैक्स के सीईओ शैलेष कपूर बताते हैं कि ऐक्शन और अपराध सीरीज के दर्शक ज्यादातर पुरुष हैं, जबकि रोमांस और रोमांटिक कॉमेडी के दर्शकों में 45 फीसद महिलाएं हैं.

सिर्फ चमत्कारी महिला नहीं

टेलीविजन पर महिलाओं का फोकस हमेशा रहा है. मसलन, रजिनी, तारा, शांति, तू-तू मैं-मैं और हम पांच दर्शकों में काफी लोकप्रिय हैं. यह ट्रेंड जारी है. स्टार प्लस पर अनुपमा फिलहाल काफी देखा जाने वाला प्रोग्राम है. लेकिन यह स्टीरियोटाइप सास-बहू या परंपरा से जुड़े विद्रोह तक सीमित रहा है. फोर मोर शॉट्स प्लीज! की प्रोडक्शन कंपनी प्रीतिश नंदी कम्युनिकेशंस लिमिटेड की रंगीता नंदी कहती हैं, ''हम लंबे समय से स्टीरियोटाइप पात्रों या पुरुष प्रधानता पर जोर देते रहे हैं. कई साल तक एकदम पवित्र पात्रों के पीछे भागते रहने की बात छोड़कर, अब पिछले पांच साल से हम महिला पात्रों के अलग-अलग रंग दिखा रहे हैं.'' यही नहीं, टेलीविजन का हीरो भले ही कुछ गलत भी करे, पर उसे रोमांटिक तरीके से पेश किया जाता है. वहीं महिलाएं तो पूरी तरह अच्छी या बुरी थीं. पांडेय कहती हैं, ''आपने इससे पहले किसी मुखर और कुटिल महिला के प्रति लगाव कभी नहीं देखा होगा.'' वे यह भी कहती हैं कि स्ट्रीमिंग अफसानों ने महिला को कैद से मुक्त कर दिया है और ''खासकर कुटिल महिला पात्रों की स्वीकार्यता बढ़ा दी है.'' सीरीज निर्माता अब महत्वाकांक्षा और सेक्स भावनाओं जैसे मुद्दों की खुलकर पड़ताल कर रहे हैं, जो पारिवारिक टीवी पर वर्जित जैसा था.

नंदी महिलाओं के बारे में कहानियां कहने के लिए ओटीटी को ''दिलचस्प उर्वर समय'' बताती हैं. दर्शक जिसे देसी सेक्स ऐंड द सिटी बता रहे हैं, और जिसकी लेखक, निर्देशक महिलाएं ही हैं, उस फोर मोर शॉट्स प्लीज! (एफएमएसपी!) में महिला इच्छाएं केंद्र में हैं. उस शो की कामयाबी की वजह से नंदी से शहरी पृष्ठभूमि में ऐसी ही हल्की-फुल्की कहानी कहने की मांग बार-बार हो रही है.

हालांकि महिला केंद्रित पटकथाओं का एक अप्रिय नतीजा यह है कि सभी शो एक ही शैली या रचना-पद्धति—गंभीर ड्रामा—वाले हो गए हैं. इस नतीजे के प्रति सचेत नंदी ने पीएनसी में सिनडी लुपर के क्लासिक गर्ल्स जस्ट वाना हैव फन को मिशन स्टेटमेंट जैसा बना लिया है. वे कहती हैं, ''एफएमएसपी! अंधेरे पक्ष में कूदता है मगर उसमें डूबता नहीं. इस शो में मजा है और एक रात कुछ खाते-पीते देखा जा सकता है. यह आपको कुछ सिखाने या यह कहने की कोशिश नहीं करता कि आपके आसपास की सारी दुनिया बुरी है.''

सबसे ऊपर महिला

नंदी जैसी महिलाएं, खुद को महिलाओं से भरे बोर्डरूम में अपनी आइडिया साझा करने का मौका पा रही हैं. कम से कम चार ओटीटी प्लेटफॉर्म की कंटेंट शाखा का संचालन महिलाएं करती हैं. जी5 में पांडेय सर्वेसर्वा हैं तो नेटफ्लिक्स इंडिया के सीरीज वाले विभाग की प्रमुख तान्या बामी हैं, अमेजन प्राइम वीडियो की प्रोग्राम प्रमुख अपर्णा पुरोहित हैं और लायन्सगेट प्ले में ओरिजिनल्स की वाइस-प्रेसिडेंट मृणालिनी खन्ना हैं. यहां तक कि उनकी टीम में भी महलाओं का दबदबा है. बामी कहती हैं, ''हम महिला केंद्रित शो के बड़े हिमायती हैं और महिला अगुआ अफसानों की तलाश में रहते हैं.'' उनके मुताबिक, नेटफ्लिक्स के 60 फीसद शो में लीड रोल में महिलाएं हैं या वे कहानी के केंद्र में हैं.

इसकी वजहें भी हैं. महिलाएं ही ओटीटी दर्शकों का बड़ा हिस्सा हैं. लेकिन जी5 के आंतरिक डेटा और रणनीति विभाग से पता चलता है कि महिला केंद्रित सीरीज केवल वे ही नहीं देख रही हैं. बामी कहती हैं, ''दर्शक मजबूत, कई परतों वाले महिला पात्रों को पसंद कर रहे हैं जिसमें वे अपने आसपास की दुनिया और अनुभवों का सही-सही चित्रण पाते हों.'' मसलन, अरण्यक में रवीना टंडन घर की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ नौकरी में अपनी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने वाली पुलिस अफसर बनी हैं.

पांडेय को हैरानी नहीं है कि महिला केंद्रित ज्यादा शो तैयार किए जाएंगे. महिला लेखकों, निर्देशकों, क्रिएटरों और फैसला लेने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी जिस कदर बढ़ रही है, उसी कदर कैमरे के सामने काम करने वाली महिलाएं भी बढ़ रही हैं. पांडेय कहती हैं, ''मुझे महिलाओं की विभिन्न रंग-पांत वाली कहानियां ज्यादा दिलचस्प लगती हैं या आप पुरुषों और महिलाओं को बराबर पायदान पर खड़ा पाते हैं. यानी कोई एक खास नायक नहीं है या कई-कई सामने हैं.''

बड़े पर्दे पर पुराने दिनों में छाई रहने वाली अभिनेत्रियों के लिए स्ट्रीमिंग ने भी अब नए मौके जुटा दिए हैं. पांडेय कहती हैं, ''इंडस्ट्री ने अचानक पाया है कि वे गजब की अभिनेत्रियां हैं, जिन्हें पूरा मौका नहीं मिला है और वे काम करने के लिए लालायित हैं. ऐसे में उन्हें ऐसी कहानियां सोचने के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है.'' यह रुझान इंडिया टुडे के ताजा देश का मिज़ाज जनमत सर्वेक्षण में भी नजर आया है. उस सर्वेक्षण में टंडन, सुष्मिता सेन और पूजा भट्ट पांच टॉप ओटीटी अभिनेत्रियां बनकर उभरी हैं.

जरा खुल जाओ

इस माहौल ने सुमुखी सुरेश जैसी रचनाकारों में उत्साह भर दिया है. उन्होंने हाल में मोटरमाउथ नाम की कंटेंट कंपनी बनाई है. उस कंपनी का मकसद ऐसे शो और फिल्म बनाना है, जिन्हें ''महिलाएं पसंद या नापसंद चाहे जो करें, मगर उससे जुड़ा हुआ जरूर महसूस करें.'' मोटरमाउथ भले ज्यादा उम्मीद कर रही हो, मगर सुमुखी ने लेखक कक्षों की ऐसी अनेक कहानियां सुनी हैं, जहां महिलाओं की राय को दरकिनार कर दिया जाता है या पुरुष एक-दूसरे को ही शह देते हैं. वे कहती हैं, ''एक शून्य बना हुआ है. इसी वजह से मैं खुद को वहां पाती हूं. पुरुषों से जुड़े हुए कंटेंट तो ढेरों हैं, इसलिए उसे उस रूप में ब्रान्ड करने की दरकार नहीं है. वह सब सामान्य है. वहीं, हमारे (औरतों) लिए सामान्य होने में कुछ वक्त लगेगा.''

सुमुखी का इरादा उस वक्त को छोटा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा ''थ्री डाइमेंशनल पात्रों की कहानियां'' लिखने का है. वे मजेदार महिला पात्रों की कहानियां लिखने में माहिर होने का तमगा हासिल कर चुकी हैं, उनकी और उनकी महिला लेखकों की टीम की मेज पर कई प्रोजेक्ट भरे पड़े हैं. वे कहती हैं, ''मेरी राय में एकदम सामान्य-सी बात कहने की भी जगह है—कि महिलाओं को भी गलती करने की छूट दी जा सकती हैं, वे भी बेतुकी हरकतें कर सकती हैं और सभी एकदम सही होने का प्रतीक नहीं हो सकती.''

मोटरमाउथ के पास कतार में सुमैरा शेख का स्टैंड-अप स्पेशल डोंगरी डैंजर, एक युवा वयस्क कॉमेडी थ्रिलर, वीरे दी वेडिंग की प्रोड्यूसर रिया कपूर की एक फीचर और पुष्पावल्ली के लोकप्रिय पात्र वासु पर खट्टा-मीठा शो है. सुमुखी महिला आवाजों की पैरोकार हैं, मगर वे बताती हैं कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म आंख मूंद कर महिला केंद्रित कंटेंट पर हां नहीं कह रहे हैं. वे कहती हैं, ''वे अच्छी कहानी चाहते हैं.''

शायद यह हो कि ये 'अच्छी कहानियां' महिलाओं के इर्दगिर्द ही बुनी गई हैं. जैसा कि बामी कहती हैं, ''महिला उठ खड़ा होने की ठान ले तो, उससे ताकतवर चेहरा कोई नहीं हो सकता. इसे कहानी में ढाल दीजिए तो दर्शक दीवाने हो जाएंगे.''

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