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उम्मीद का सा धुआं

देश में नाटकों के सबसे बड़े सालाना जलसे भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के मेजबान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भी इसे लेकर हलचल तेज हो गई है.

भारत रंग महोत्सव भारत रंग महोत्सव

उम्मीदें बांधता हूं, सोचता हूं, तोड़ देता हूं, कहीं ऐसा न हो जाए, कहीं वैसा न हो जाए. इन दिनों कुछ इस शेर जैसा ही आलम है कलाओं खासकर परफॉर्मिंग आर्ट्स और सिनेमा के हलके में. असमंजस और ऊहापोह का. दुनिया के दो सबसे चर्चित जलसे एडिनबरा (7-31 अगस्त) और एविन्यॉन फेस्टिवल (3-23 जुलाई) इस साल सारी तैयारियों के बावजूद ख्वाबों में ही रह गए. ओलंपिक के बाद कलाओं का सबसे बड़ा आयोजन एडिनबरा तो 73 साल में पहली बार रद्द हुआ.

मई में होते आ रहे सिनेमा के सबसे रसूख वाले कान फिल्मोत्सव को भी कोविड-19 ने निगला तो ऑस्कर-2021 को ठोकर मारकर 28 फरवरी से 25 अप्रैल तक धकेल दिया. लेकिन भारत में साहित्य, सिनेमा और रंगमंच के नामी सालाना जलसों पर उम्मीदों के बंदनवार टंग रहे हैं. केंद्र सरकार की अनलॉक-4 की घोषणाओं में ओपन एअर थिएटर और कुछ दूसरी रियायतें मिलने से सर्जकों और रसिकों दोनों का हौसला बढ़ा है.

भारत में सिनेमा के सबसे बड़े जलसे भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (आइएफएफआइ) इस साल भी अपने तय समय 20-28 नवंबर के बीच गोवा में होने का ऐलान पिछले महीने वहां के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ऐलान किया. हालांकि इसे हाइब्रिड फेस्टिवल बनाया जा रहा है, यानी डेलीगेट इसकी एक्सेस लेकर अपने-अपने पास ही इसे डिजिटली देखेंगे और आयोजन स्थल पणजी के सिनेमाघरों में, हालात के आकलन के बाद, सीमित डेलीगेट्स को ही बुलाया जाएगा. पिछले साल इसमें 10,000 से ज्यादा डेलीगेट्स शामिल हुए थे.

इसके असल मेजबान केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले फिल्म समारोह निदेशालय के अफसरों का हौसला 31 अगस्त को उस वक्त खासा बढ़ गया जब फिल्मों की प्रविष्टियां भेजने की समयसीमा पूरी हुई. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर बताते हैं, ''हम प्रविष्टियों की संख्या तो नहीं बताएंगे लेकिन महामारी के बावजूद फिल्म बिरादरी ने जिस पैमाने पर एंट्रीज भेजी हैं, वह सचमुच हौसला बढ़ाने वाला है.’’ हक्रते भर में तस्वीर साफ हो जाने की उम्मीद है.

देश में नाटकों के सबसे बड़े सालाना जलसे भारत रंग महोत्सव (भारंगम) के मेजबान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भी इसे लेकर हलचल तेज हो गई है. वैसे तो फरवरी में होने वाले इस उत्सव के नाटकों के चुनाव के लिए 31 अगस्त तक डीवीडी की शक्ल में प्रविष्टियां आ जाती थीं. पर भारगंम-2021 के लिए अब गतिविधियां शुरू हुई हैं. दरअसल, इसमें ज्यादातर प्रविष्टियां जनवरी से अगस्त तक खेले जाने वाले नाटकों की ही आती थीं. इस साल मध्य मार्च से नाटक हुए ही नहीं.

और अभी कम-से-कम दो महीने इसकी कोई संभावना नहीं. पर इसी हफ्ते हुई विद्यालय की एक मीटिंग में माहौल उत्साहजनक था. लब्बोलुआब, बताते हैं, यही था कि भारंगम को टालकर मार्च में ले जाने की बजाए तय समय फरवरी में ही किया जाए. वर्ना हालात को देखते हुए मई के आसपास ले जाया जाए. स्वरूप छोटा करके इसे 6-7 सभागारों की बजाए दो तक में रखा जा सकता है.

विद्यालय के प्रभारी निदेशक सुरेश शर्मा को भरोसा है कि कोई रास्ता निकलेगा. वे कहते हैं, ''भारंगम रद्द तो नहीं होगा. उसका स्वरूप छोटा हो सकता है. देखिए, थिएटर के हलके में जो बनी हुई चीजें हैं, जिन्होंने जनमानस में अपनी एक पहचान बना ली है, उन्हें रोकने में हमारा विश्वास नहीं है.’’

साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित आयोजन जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के आयोजक भी 28 जनवरी से 1 फरवरी के बीच प्रस्तावित 2021 के अपने जलसे को लेकर अभी वेट-ऐंड-वाच की दशा में हैं. वैसे लॉकडाउन में 4 अप्रैल से ही शुरू हुए उसके ऑनलाइन चर्चा सत्रों को 38 लाख से ज्यादा लोग सुन चुके हैं.

फिलहाल वर्चुअल जेएलएफ लंदन और फिर अमेरिका तथा कनाडा की तैयारी है. उत्सव के मेजबानों में से एक टीमवर्क आट्र्स के एमडी संजय के रॉय कहते हैं, ''जयपुर में हाइब्रिड फेस्टिवल की लाइन पर सोच रहे हैं. आयोजन स्थल पर 400-500 लोगों को बुलाकर बाकी को ऑनलाइन एक्सेस दी जा सकती है.’’ इसे कहते हैं वर्चुअल श्रद्धा का दौर.

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