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सिनेमाः मौके पर चौका

हिंदी सिनेमा में किरदारों के अनुरूप कलाकार चुनते आए कास्टिंग डायरेक्टर अब निर्देशन में उतर रहे. उन्हें निर्माताओं और स्टुडियो का भी भरोसा मिल रहा

कुणाल शाह कास्टिंग डायरेक्टर  कुणाल शाह कास्टिंग डायरेक्टर 

कास्टिंग डायरेक्टर छोटे शहरों के टैलेंट के सपनों को तो पंख लगा देते हैं लेकिन उन्हें खुद उडऩे में सालों लग जाते हैं. एक दशक बाद कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा को दिल बेचारा फिल्म से डायरेक्टर बनने का मौका मिला तो हनी त्रेहन ने भी रात अकेली है से डायरेक्टर बनने का सपना पूरा कर लिया है.

डिज्नी+हॉटस्टार पर दिल बेचारा ने सफलता के कई रिकॉर्ड तोड़े तो नेटफ्लिक्स पर रात अकेली है ने भी कामयाबी के झंडे गाड़े. वेब की दुनिया में इस सफलता को देखकर कास्टिंग डायरेक्टर कुणाल एम. शाह कहते हैं, ''मुकेश और हनी ने न सिर्फ हम जैसे कास्टिंग डायरेक्टर्स के लिए रास्ता खोल दिया बल्कि प्रोड्यूसरों और स्टुडियोज में भी आत्मविश्वास पैदा कर दिया है कि बतौर डायरेक्टर भी हम पर जुआ खेलना घाटे का सौदा नहीं.’’

मुकेश ऐक्टर बनने दिल्ली से मुंबई आए थे और हनी फिल्ममेकिंग से जुडऩे. पर हालात ने दोनों की पहचान कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में बनवा दी. मुकेश छोटे-छोटे रोल करते रहे हैं. उन्होंने गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 (नवाब), रंग दे बसंती (मन्मथ नाथ), राजमा चावल (अनूप जी) सहित दर्जन भर फिल्मों में ऐक्टिंग की.

उधर हनी अपने रचनात्मक सफर के बारे में बताते हैं कि ''विशाल भारद्वाज जैसे फिल्ममेकर के साथ काम करने से निर्देशन और कास्टिंग, दोनों क्राफ्ट मांजने का मौका मिला. विशाल की फिल्म के बीच में खाली समय मिलने पर दूसरी फिल्में भी कीं, जिससे फिल्म मेकिंग सीखी.’’ मुकेश और हनी ने अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए संघर्ष के साथ अलग-अलग क्राफ्ट सीखा, उसी तरह से दूसरे कास्टिंग डायरेक्टर्स ने भी मौके खोजे.

तिग्मांशु धुलिया बॉलीवुड के पहले कास्टिंग डायरेक्टर हैं. उन्होंने बैंडिट क्वीन (1994) में कास्टिंग की थी. वे निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में भी नाम कमा चुके हैं. अभिनेता तो हैं ही. हनी की रात अकेली है में भी उन्होंने अभिनय किया है. कास्टिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी भी ऐक्टर हैं.

उन्होंने स्त्री, ड्रीम गर्ल और मिर्जापुर में ऐक्टिंग की है. लेकिन अभिनय के मामले में उनमें वह आत्मविश्वास नहीं दिखता. कुणाल कहते हैं, ‘‘पाताललोक के हथौड़ा त्यागी किरदार के लिए वे ऑडिशन देने से डर रहे थे. आज देखिए, वह किरदार कितना जीवंत लगता है. यानी जब तक आप काबिल नहीं होंगे, आप अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन नहीं कर सकते.’’

हॉलीवुड फिल्मों के लिए कास्ट करती रहीं कास्टिंग सोसाइटी ऑफ अमेरिका की सदस्य सहर लतीफ की बतौर प्रोड्यूसर फिल्म मस्का इसी साल मार्च में नेटफ्लिक्स पर आई थी. वे शकुंतला देवी, नोबेलमैन और गोल्ड की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर भी रही हैं. अतुल मोंगिया भी लुटेरा और तितली में एसोसिएट डायरेक्टर थे.

कास्टिंग डायरेक्टर का काम सीधे डायरेक्टर से जुड़ा होने के कारण वह भी एक मायने में डायरेक्टर ही है. स्क्रिप्ट के आधार पर लीड ऐक्टर को छोड़कर बाकी कलाकारों की तलाश कास्टिंग डायरेक्टर ही करता है. डायरेक्टर के विजन के बिना कास्टिंग डायरेक्टर अच्छा नहीं कर सकता. दूसरों के लिए कास्टिंग करते हुए वह दिलोदिमाग में उस फिल्म का डायरेक्टर बन चुका होता है.

फिर भी पहली फिल्म निर्देशित करते वक्त दबाव रहता है. ऐसे में हनी बताते हैं कि दो-तीन फिल्मों में सेकंड डायरेक्टर रहने से मिला आत्मविश्वास रात अकेली है में काम आया. उनके शब्दों में, ''फिल्म मेकिंग एक कम्युनिकेशन मीडियम है. हर क्षेत्र के आदमी को डायरेक्शन में आना चाहिए. विशाल म्युजिक डायरेक्टर थे, आज वे बड़े डायरेक्टर हैं.’’ फिल्म विश्लेषक अतुल मोहन मानते हैं कि मुकेश और हनी सरीखे डायरेक्टर को जिस तरह से विस्तार और सफलता मिली है उससे इन्हें और दूसरे कास्टिंग डाइरेक्टर को और मौके मिलेंगे.

वैसे, जोगी मलंग सरीखे कास्टिंग डायरेक्टर भी हैं, जो अपने काम से खुश हैं. उन्हीं के शब्दों में, ‘‘मुझे डायरेक्शन में नहीं जाना. कास्टिंग के साथ मैं ऐक्टिंग भी कर लेता हूं.’’ उन्होंने राजी, सांड की आंख, पाताललोक और गुलाबो सिताबो में काम किया है.

हनी की नजर अब भविष्य पर है. वे दो-तीन कहानियों पर काम कर रहे हैं. किस जॉनर की कहानी पसंद आएगी, कहना मुश्किल है. उन्होंने अभिषेक चौबे के साथ प्रोडक्शन कंपनी भी बनाई है.

उसके बैनर तले भी फिल्म बनाने की तैयारी चल रही है. उन्होंने अगली फिल्म एक स्टुडियो के साथ करने का वादा किया हुआ है. कुणाल के शब्दों में, ''फिल्म इंडस्ट्री में कई प्रतिभाशाली कास्टिंग डायरेक्टर हैं जिन्हें मौका मिले तो वे बतौर डायरेक्टर बेहतरीन फिल्में दे सकते हैं.’’ समय आ गया है, बॉलीवुड अपने हीरों को ढंग से परखे.

मुकेश छाबड़ा
कास्टिंग डायरेक्टर 
दिल बेचारा के साथ निर्देशन के मैदान में उतरे

कुणाल शाह
कास्टिंग डायरेक्टर 
''मुकेश और हनी ने निर्माताओं का भरोसा जीता है’’
जोगी मलंग 
कास्टिंग डायरेक्टर
''मैं अपने काम से खुश हूं. मुझे निर्देशन में नहीं जाना’’

फिल्म के निर्देशक के विजन को लेकर काम करते हुए कास्टिंग डायरेक्टर एक मायने में खुद भी निर्देशक बन चुका होता है. उसका दिमाग उसी ढंग से चलने लगता है
हनी त्रेहन
कास्टिंग डायरेक्टर 
बतौर निर्देशक पहली फिल्म रात अकेली है को नेटफिल्क्स पर अच्छी कामयाबी मिली
 

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