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सिनेमाः महामारी में महंगे हुए स्टार

करोना महामारी की वजह से दुनियाभर में भले हर क्षेत्र की माली हालत बिगड़ी हो लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसा क्षेत्र है जहां स्टार महंगे हो गए हैं.

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कियारा आडवाणी कियारा आडवाणी

करोना महामारी की वजह से दुनियाभर में भले हर क्षेत्र की माली हालत बिगड़ी हो लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री एक ऐसा क्षेत्र है जहां स्टार महंगे हो गए हैं. इंडस्ट्री के इस छोटे-से तबके की जेब पहले से भारी हो गई है जबकि बीते डेढ़ साल से मल्टीप्लेक्स और सिंगल थिएटर में फिल्में अमूमन रिलीज ही नहीं हुई हैं. सूर्यवंशी और 83 जैसी बड़े बजट की फिल्में अब भी थिएटर खुलने का इंतजार कर रही हैं. मगर लॉकडाउन के दौरान ओटीटी प्लेटफॉर्म ने इंडस्ट्री के कुछ बड़े प्रोडक्शन हाउसों और स्टार्स को मोटी कमाई के नए समीकरण दे दिए.

इन दोनों के बीच एक तरह की व्यावसायिक सांठगांठ बन गई है और दोनों मिलकर मुनाफा बटोर रहे हैं. स्वाभाविक तौर पर यह बात उद्योग के एक तबके को खटक रही है. इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिशन (इंपा) के अध्यक्ष टी.पी. अग्रवाल को लगता है कि इससे छोटे प्रोड्यूसर्स खत्म हो रहे हैं. उनके शब्दों में, ''पुराने घराने के गिने-चुने प्रोड्यूसर्स हैं जो स्टार्स के साथ खेलते हैं. इस समय उनको ओटीटी प्लेटफॉर्म से पैसे मिल रहे हैं.’’

फिल्म व्यवसाय विशेषज्ञ अतुल मोहन भी उनसे सहमति जताते हुए कहते हैं, ''धर्मा, यशराज, साजिद नडियाडवाला, यूटीवी, टी सीरीज, संजय लीला भंसाली, दिनेश विजन, एक्सेल, निखिल आडवाणी ऐसे 10 बड़े प्रोडक्शन हाउस या निर्माता हैं जो इंडस्ट्री को चला रहे हैं. बिकाऊ स्टार्स को लेकर ये सब आपस में ही कमा रहे हैं. पूरी इंडस्ट्री को बड़े प्रोड्यूसर्स ने कब्जे में कर रखा है. स्टार्स अमूमन नए निर्माताओं को अहमियत नहीं देते.’’ कास्टिंग डायरेक्टर कुणाल शाह भी इसमें अपनी आवाज जोड़ते हैं:

''टॉप आर्टिस्ट तो बस एक बड़े प्रोडक्शन हाउस से दूसरे बड़े प्रोडक्शन हाउस में घूम रहे हैं. इस सर्कल से वे बाहर नहीं आ पा रहे.’’ फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने इम्प्लाईज के प्रमुख बी.एन. तिवारी को लगता है कि कॉर्पोरेट घराने जब से आए हैं, मध्यम और छोटे प्रोड्यूसर्स के अधिकार सिमट-से गए हैं.

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, बढ़ी फीस के साथ अब एक फिल्म के लिए अक्षय कुमार की कीमत 125 से 135 करोड़ रु. हो गई है. यानी वे नंबर वन हैं और इस समय वे किसी भी अभिनेता से ज्यादा फिल्मों में काम कर रहे हैं. उनके खाते में राउडी राठौर-2, बेल बॉटम, अतरंगी रे, सूर्यवंशी, मिशन सिंड्रेला, रक्षा बंधन, पृथ्वीराज, सिंघम-3, बच्चन पांडे और राम सेतु जैसी फिल्में हैं.

सूत्रों की मानें तो अजय देवगन 125 करोड़ रु. तक, हृतिक रोशन 101 करोड़ रु., रणवीर सिंह और जॉन अब्राह्म 50-50 करोड़ रु., रणबीर कपूर 30 और कार्तिक आर्यन 30-30 करोड़ रु., टाइगर श्राफ 25 करोड़ रु., आयुष्मान खुराना 15 करोड़ रु. और सैफ अली खान 11 करोड़ रु. प्रति फिल्म तक मांग रहे हैं. राजकुमार राव 9-10 करोड़ रु. तो अमिताभ बच्चन 7-8 करोड़ रु. ले रहे हैं.

इधर, ओटीटी के बढ़ते दबदबे का असर यह हुआ है कि विजय राज, कुमुद मिश्र, बृजेंद्र काला, राजेश शर्मा और जाकिर हुसैन जैसे मंझे हुए चरित्र अभिनेताओं को 3-5 लाख रु. रोज के हिसाब से मिल रहे हैं. अतुल का आकलन है कि इस समय सभी स्टार्स की फीस 10-15 फीसद तक बढ़ी है.

लेकिन कुणाल इसे खास तवज्जो नहीं देते. वे याद दिलाते हैं कि ‘‘इसी तरह का सैटेलाइट बूम का दौर आया था और फिल्में सैटेलाइट पर महंगे दाम पर बिक रही थीं. तब भी स्टार्स ने फीस बढ़ा दी थी. इससे पहले म्युजिक का बूम आया था. ताल फिल्म का म्युजिक खासा महंगा बिका था. उस वक्त फिल्म बिजनेस के लिए म्युजिक एक बड़ी टेरिटरी हो गया था. अब डिजिटल का बूम है.’’

इंडस्ट्री में स्टार्स की फीस के मॉडल बदलते रहे हैं. समय के साथ वे स्मार्ट होते गए हैं. पहले स्टार फीस लेता, ऐक्टिंग करता और आगे बढ़ जाता था. आज के स्टार फीस के साथ बौद्धिक संपदा अधिकार (आइपीआर) भी लेते हैं यानी आजन्म हिस्सेदारी. वे न रहें तो उनकी संतानों को मिलेगी. आइपीआर पहले प्रोड्यूसर का होता था. मसलन, आर.के. स्टुडियो की फिल्में ज़ी ने ली हैं. समझौते के तहत समय-समय पर उनका नवीनीकरण होता है और पैसे स्टुडियो के पास आते रहते हैं.

यही वजह है कि आज के स्टार को-प्रोड्यूसर बनकर आइपीआर ले रहे हैं. अमिताभ ने अपनी कई पुरानी फिल्मों के निगेटिव खरीद लिए हैं. अब वे राइट्स नहीं लेते. उन्होंने सरस्वती फिल्म्स के नाम पर पुरानी फिल्मों के राइट्स खरीदे थे. शाहरुख और अजय जैसे स्टार्स ने भी अपने शुरू के काम वाली कई फिल्में खरीदकर उन्हें अपनी प्रॉपर्टी बना लिया है. शाहरुख ने यशराज या धर्मा की फिल्में छोड़कर दूसरी कई फिल्में खरीदी हैं और कमाई के मामले में अब उनकी अगली पीढ़ी भी सुरक्षित है.

आमिर, सलमान और शाहरुख अब भी को-प्रोडक्शन वाले फॉर्मूले पर ही काम करते हैं. यानी बतौर फीस फिल्म के बजट का 33 फीसद और फिर प्रॉफिट में हिस्सेदारी. आमिर की लालसिंह चड्ढा को-प्रोडक्शन वाली फिल्म है और वे 50 फीसद के पार्टनर भी हैं. उनकी फिल्म के 300-400 करोड़ रु. का धंधा कर लेने पर वे आराम से 100-150 करोड़ रु. ले जाते हैं. अक्षय, अजय और हृतिक भी पहले इसी फॉर्मूले पर काम करते थे लेकिन 2021 में उन्होंने नया रास्ता निकाला.

अजय के पास अपनी फिल्में के सैटेलाइट राइट्स हैं. वे 10 फिल्मों के 500 करोड़ रु. पहले ही ले चुके हैं. अपने होम प्रोडक्शन में काम करते वक्त अक्षय भी 20 करोड़ रु. फीस और 80 फीसद प्रॉफिट लेते थे. फिल्म 40-50 करोड़ रु. में बन जाती. उसका बिजनेस होता 150-200 करोड़ रु., 100 करोड़ रु. में डिजिटल और सैटेलाइट राइट्स बिक जाते. इससे वे 100 करोड़ रु. और कमा लेते थे.

इस समय सिनेमाघरों के बंद होने और फिल्में रिलीज न हो पाने से ओटीटी ने कमाई के जो नए समीकरण दिए हैं उसमें अक्षय जैसे स्टार्स ने एकमुश्त कमाई का रास्ता अपनाया है. इससे उनकी फीस 125 से 135 करोड़ रु. हो गई है. इसमें प्रॉफिट वाला फॉर्मूला नहीं लेकिन फिल्म ओटीटी पर सीधे रिलीज होने पर उसे मिलने वाले प्रीमियम में से स्टार अपनी हिस्सेदारी वसूल रहे हैं.

भूल भुलैया-2 और सत्यनारायण की कथा में काम करने वाले कार्तिक आर्यन को धमाका के प्रोड्यूसर ने प्रीमियम में से 7 करोड़ रु. की हिस्सेदारी दी थी. यह बात छोटे ऐक्टर्स को भी समझ आ गई है. गिन्नी वेड्स सन्नी के लिए विक्रांत मैसी ने भी हिस्सेदारी ली.

बॉलीवुड पुरूष प्रधान इंडस्ट्री है. कुणाल कहते हैं, ‘‘यहां 90 फीसद पुरुष प्रधान और 10 फीसद स्त्री प्रधान फिल्में बनती हैं. ऐसे में हीरोइन की फीस बहुत कम होती है.’’ ट्रेड पंडितों की मानें तो दीपिका पादुकोण 29 करोड़ रु., कंगना रनोट 24 करोड़ रु., करीना कपूर 15 करोड़ रु., कटरीना कैफ 12-13 करोड़ रु., आलिया भट्ट 10 करोड़ रु. और विद्या बालन 9 करोड़ रु. फीस लेती हैं.

ज्यादा फिल्में करने के लिहाज से कृति सैनन की छवि लेडी अक्षय कुमार की बन गई है. बच्चन पांडे, मिमी, भेड़िया, गणपत, आदिपुरुष समेत आधा दर्जन फिल्मों में काम करने वाली कृति 4-5 करोड़ रु. लेती हैं. नई हीरोइनों में दिशा पाटनी (के टीना, मलंग-2, एक विलेन रिटर्न्स, योद्धा) और कियारा आडवाणी (भूल भुलैया-2, जुग जुग जिओ) प्रोड्यूसर्स की पसंदीदा हैं. दिशा की फीस 4 करोड़ रु. तो कियारा की 2 करोड़  है.

बहरहाल, अग्रवाल का मानना है ‘‘आज के स्टार्स की मोनोपॉली थिएटर खुलने और फिल्में रिलीज होने पर टूट सकती है. थिएटर खुलने तक नए स्टार पैदा नहीं होंगे. ओटीटी प्लेटफॉर्म ऐक्टर पैदा कर सकते हैं स्टार नहीं.’’ पर उन्होंने उनकी फीस तो बढ़वा ही दी. 

कियारा आडवाणी
2 करोड़ रु.
अक्षय कुमार 125 से 135 करोड़ रु.
कृति सैनन 4-5 करोड़ रु.
कार्तिक आर्यन 30 करोड़ रु.

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