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छोटे मंच पर बड़ा मुकाबला

सिनेमाघर क्या बंद हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी देशी-विदेशी खिलाड़ियों के बीच आमने-सामने की कुश्ती शुरू हो गई. ओटीटी के विदेशी खिलाड़ियों ने पहली बाजी जीती पर अब देशी भी तीर-तरकश की पूरी तैयारी के साथ आ डटे हैं

स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रकाश झा प्रोडक्शंस की परीक्षा को अच्छे दर्शक मिले
  • शेमारूमी बॉक्स ऑफिस 7 अगस्त को ओटीटी पर दुनिया भर में रिलीज
  • चिंटू का बर्थडे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से पहले यह छोटी फिल्म मानी जा रही थी

सिनेमाघर बंद क्या हुए, यहां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी देसी-विदेशी खिलाडिय़ों के बीच भी आमने-सामने की कुश्ती शुरू हो गई. ओटीटी के विदेशी प्लेयर्स ने पहली बाजी जीती लेकिन अब देसी भी तीर-तरकश की अपनी पूरी तैयारी के साथ मैदान में आ जुटे


महामारी के चलते सिनेमाघरों के बंद होने से ओटीटी पर फिल्म/सीरीज प्रदर्शन का दौर देसी बनाम विदेशी में तब्दील होने लगा है. सिनेमाघरों में पसरे अंधेरे का फायदा उठाते हुए नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और डिज्नी+हॉटस्टार सरीखे विदेशी प्लेयर्स फिल्मी दांव के जरिए भारतीय डिजिटल मार्केट पर दबदबा बनाने की कोशिश में जुट गए.

गुलाबो सिताबो, दिल बेचारा, शकुंतला देवी और गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल जैसी फिल्मों ने उनके मकसद को एक दिशा भी दिखाई. इससे उन्हें लगा है कि 400-500 करोड़ रुपए में दर्जनभर फिल्में खरीदकर उन्होंने घाटे का सौदा नहीं किया है. इसी मोड़ पर देसी प्लेयर्स को इल्हाम हुआ कि यह बाजार में उनके टिके रहने के लिए चुनौती है. उन्होंने अपनी तरह से बाजार में खुद को मजबूत रखने के लिए प्रयोग करने शुरू कर दिए.

शेमारू ने विदेशी प्लेयर्स के खेल को मात देने के लिए शेमारूमी बॉक्स ऑफिस नाम से एक नया ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू कर दिया है. शेमारू के सीईओ हिरेन गाडा बताते हैं कि लॉकडाउन में सिनेमाघर बंद होने से उन्होंने उसी को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश की है. इसके तहत बुकमाइशो के माध्यम से लोग 100 रुपए प्रति टिकट से हिसाब से बुकिंग कर हर शुक्रवार को सिनेमाघर स्टाइल में ही घर बैठकर परिवार के साथ फिल्म देख पाएंगे.

एक टिकट को चार लोगों में बांटा जा सकता है और इससे तीन दिनों के भीतर फिल्म देख सकते हैं. चार लोगों में टिकट बंटने से प्रति फिल्म 25 रुपए की पड़ती है. हिरेन की मानें तो उनके इस प्रयोग को सिनेप्रेमियों के अलावा फिल्म जगत ने भी काफी सराहा है. यानी उनका 'थिएटर का मजा घर पर’ प्रयोग कामयाब होता दिख रहा है.

दूसरे प्लेयर्स भी इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि नए ग्राहक लाने के लिए सिनेमा बड़ा आकर्षण है. जी5 की प्रोग्रामिंग हेड अपर्णा आचरेकर कहती हैं कि देसी ओटीटी प्लेटफॉर्म हों या विदेशी, ऑडिएंस की नब्ज पकडऩे के लिए पहले तो अच्छी मूवी लानी ही पड़ती है. जी5 भी अपने दर्शकों को उनकी पसंद की फिल्में दे रहा है.

बकौल अपर्णा, ''हम पिछले डेढ़ साल से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्में रिलीज कर रहे हैं. लेकिन पिछले छह महीने में यह रियलिटी हो गई है. आने वाले समय में ऐसा भी हो सकता है कि थिएटर और ओटीटी बराबरी के पलड़े पर आकर खड़े हो जाएं.’’

फिल्मों और ओटीटी के कास्टिंग डाइरेक्टर कुणाल एम. शाह इस पूरे मंथन से एक और नया घटनाक्रम शुरू होने की ओर संकेत करते हैं. उनका कहना है कि ‘‘विदेशी प्लेयर्स ने भले ही फिल्मों के जरिए गेम खेला है लेकिन मुझे लगता है कि अगले 1-2 साल में मल्टीप्लेक्स के एक स्क्रीन पर वेब सीरीज भी चलती दिखे तो कोई हैरत की बात न होगी. यह बिजनेस गेम का हिस्सा होगा और इसको लेकर मल्टीप्लेक्स और ओटीटी वालों के बीच व्यावसायिक समझौता हो सकता है.’’

वैसे, एमएक्स प्लेयर जैसे कुछ खिलाडिय़ों ने फिल्मों की खरीदारी की अंधी दौड़ से खुद को अलग रखा है. उसके चीफ कंटेंट ऑफिसर गौतम तलवार साफ कहते हैं, ‘‘हम बड़ी फिल्मों की खरीदारी के पक्ष में नहीं हैं. रणनीति के तहत हम अपनी ऑडिएंस के लिए डिजिटल फिल्में खुद बना सकते हैं. फिलहाल हमारी लाइब्रेरी में अलग तरह की फिल्में हैं.’’

कुछ देसी प्लेयर्स की जरूरतें पूरी करने में अधिकारी ब्रदर्स कंपनी भी लगी हुई है. वह पारिवारिक मनोरंजन वाला कंटेंट सप्लाइ करती है. लेकिन इन दिनों अलग-अलग जॉनर की फिल्मों पर काम कर रही है. हॉटस्टार के लिए उसने ढीठ पतंगे बनाई थी जो 1983 के क्रिकेट विश्व कप की पृष्ठभूमि पर थी.


फिल्मों के आकर्षण से देसी प्लेयर्स भी चुनौतियों से घिरते दिख रहे हैं. हालांकि, इसे वे सीधे-सीधे स्वीकारते नहीं. लेकिन अधिकारी ब्रदर्स के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर रवि अधिकारी इसे थोड़ा स्पष्ट करते हैं, ‘‘देसी प्लेयर्स के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अच्छे से अच्छा कंटेंट देने की होगी. वह फिल्मों का और वेब सीरीज, दोनों का होगा. ऐसे ही कोई भी फिल्म दिखाकर ऑडिएंस को आप अपनी तरफ खींच लेंगे, यह होने वाला नहीं.’’

फिल्म विश्लेषक अतुल मोहन तो बेबाकी से कहते हैं कि देसी प्लेयर्स को बड़े-बड़े हाथियों से लडऩा है. ''जिनके सामने वे खड़े हैं उनके पास संसाधन बहुत हैं. उन्हें विदेशी प्लेयर्स को मात देने के लिए उनके घर में भी टक्कर देनी होगी. दुबई और अमेरिका सहित भारतीयों की बहुलता वाले देशों में भी सर्विस बढ़ानी पड़ेगी. इसके लिए नफा-नुक्सान की चिंता न करते हुए आगे आना चाहिए.’’ जी5 190 देशों में फैला है लेकिन आज इसका आधार भारत में है. अपर्णा कहती हैं, ''हम विस्तार कर रहे हैं.

अपनी रणनीति के हिसाब से हम अपनी ऑडिएंस की पसंद की चीजें पेश करने की कोशिश करते हैं. हमारी ताजा घोषणा हमारी ऑडिएंस को खुश करेगी.’’ इस मामले में गौतम की राय थोड़ी अलग है: ‘‘विदेशी प्लेयर्स बजट और पैसों की वजह से बड़े हो सकते हैं लेकिन कंज्यूमर के नजरिए से देखें तो उनके पास शायद उतने उपभोन्न्ता नहीं होंगे जितने हमारे पास हैं.

हम एडवरटाइजिंग मॉडल पर काम करते हैं और वे सब्स्क्रिप्शन मॉडल पर, जहां कुछ भी देखने के लिए पैसे देने पड़ते हैं. कई लोग सब्क्रिप्शन दोबारा नहीं लेते. हम फ्री में दिखाते हैं. नंबर के हिसाब से देखेंगे तो साढ़े सात करोड़ लोग रोज हमारे प्लेटफॉर्म पर आते हैं. ये नंबर आपको बड़े प्लेयर्स के पास नहीं मिलेंगे. इसलिए हमारे सामने चुनौती नहीं है.’’ कुणाल शाह चीजों को थोड़ा तरतीब देते हैं, ''देसी प्लेटफॉर्म के सामने सबसे बड़ा चैलेंज है लगातार अच्छा कंटेंट लाना और परोसना. नेटक्रिलक्स, अमेजन प्राइम, डिज्नी+हॉट स्टार सरीखे विदेशी प्लेयर्स के पास हर तरह की चीजें हैं.

लेकिन देसी प्लेयर्स के पास इतना कंटेंट नहीं है. यहां अभी कंटेंट पर काम हो रहा है. जी5 के पास फिल्में हैं मगर ऑल्ट बालाजी के पास नहीं हैं. उसके पास तो वही हैं जो उसने प्रोड्यूस की हैं. एमएक्स प्लेयर के पास अब कंटेंट आ गया है. देसी प्लेटफॉर्म पर जमकर कंटेंट देना होगा, तभी बात बनेगी.’’

देसी प्लेयर्स अगर विदेशी प्लेयर्स के रणनीति से डर नहीं रहे हैं तो देसी सोच भी उसकी एक वजह है. रवि का मानना है कि भारत में कई भाषाएं हैं और हर कोई अपनी भाषा से जुड़ा हुआ है. मराठी, गुजराती, बांग्ला भाषाओं के दर्शकों के अलावा दक्षिण भारतीय सिनेमा की अपनी इंडस्ट्री है. ये लोग ही कंटेंट कंज्यूम कर रहे हैं.

अगर इनकी भाषा में कंटेंट दें तो ये दूसरी तरफ जाएंगे ही नहीं. आंचलिक कंटेंट को खासी अहमियत मिल रही है. बकौल अपर्णा, ''हमारा फोकस हिंदी फिल्मों पर ही नहीं है. जी5 आंचलिक कंटेंट भी परोसता है. हमारे यहां हिंदी के साथ तमिल, तेलुगु और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी कंटेंट होगा.’’ एमएक्स प्लेयर के पास बहुत सारी डब फिल्में हैं जिसमें वर्ल्ड सिनेमा की सामग्री भी है. उसके दर्शक ऐसी फिल्में देखना पसंद करते हैं.

हिरेन भी बताते हैं कि शेमारूमी बॉक्स ऑफिस के पास रीजनल कंटेंट बहुत है, जिसको लेकर काफी अच्छा अनुभव रहा है. ‘‘इस लॉकडाउन के दौरान हमने मंदिरों के साथ गठजोड़ करके आरती के लाइव वर्जन शेमारू पर दिए हैं. लोगों ने बहुत पसंद किया.’’ कुणाल के शब्दों में, ''जी स्टुडियो डिजिटल फिल्म आफते इश्क बना रहा है.’’

फिल्मों की वजह से देसी प्लेटफॉर्म का ऑडिएंस विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर आकर्षित हुआ है, ऐसा देसी प्लेयर्स नहीं मानते. अपर्णा कहती हैं, ''लॉकडाउन की वजह से लोगों के व्यवहार में बदलाव जरूर आया है, जिसका असर हमें बाद में भी देखने को मिल सकता है. लेकिन ऑडिएंस के टेस्ट को जानते हुए कुछ प्रोड्यूसर और स्टुडियो ने अपनी फिल्में रोक रखी हैं.

उनको विश्वास है कि जब थिएटर खुलेंगे तो लोग आएंगे. यह सच है कि सिनेमा में जो दुनिया दिखाई जाती है वह सिनेमाघर में ही देखी, महसूस की जा सकती है. बाहुबली और टर्मिनेटर जैसी फिल्मों को मोबाइल पर देखने में मजा नहीं आएगा.

थ्री-डी फिल्मों का अनुभव लेने के लिए आपको थिएटर में जाना ही होगा.’’ हिरेन भी इससे सहमत हैं कि सिनेमाघर खुलने पर लोग परिवार के साथ आउटिंग करने वहां जाएंगे. हालांकि, इस बीच फिल्म वालों को ओटीटी की ताकत का पता जरूर चल गया और ओटीटी प्लेयर्स को भी अपने दर्शकों के आस्वाद की खबर मिली.

शेमारू बॉक्स ऑफिस पर अब तक दो फिल्में माइ क्लाइंट्स वाइफ और स्कॉटलैंड दिखाई गई हैं. दर्शकों का पैसा वसूल हो, इसके लिए इसमें विज्ञापन नहीं थे. हिरेन कहते हैं कि दर्शकों ने टिकट खरीदे हैं तो उनको विज्ञापन मुक्त फिल्में दिखानी पड़ेगी. इसी प्लेटफॉर्म पर द हिडेन स्ट्राइक, ग्राहम स्टेंस: एक अनकही सच्चाई-द लीस्ट ऑफ दीज आने वाली फिल्में हैं.

उधर, गौतम स्पष्ट करते हैं कि एमएक्स प्लेयर मुफ्त में फिल्में दिखाता है, इसलिए फिल्मों के बीच लोगों को विज्ञापन देखना पड़ता है. अपर्णा यह भी तर्क देती हैं कि फिल्म अगर छोटी है लेकिन उसकी कहानी दिल को छूने वाली है तो उसे लोग पसंद करते हैं. चिंटू का बर्थडे जी5 पर रिलीज होने से पहले छोटी फिल्म मानी जाती थी.

लेकिन यह बहुत चर्चित हुई. प्रकाश झा की परीक्षा को पांच दिनों में भरपूर दर्शक मिले क्योंकि इसकी कहानी का दिल बेहद साफ-सुथरा है. यह फेस्टिवल सर्किट में थी लेकिन ओटीटी पर बड़ी हो गई. अब ये घिसी-पिटी बातें हैं कि दर्शक सिर्फ खान (शाहरुख, सलमान, आमिर) अभिनीत फिल्में ही देखते हैं.

कमर्शियल मसाला फिल्में ही दर्शकों को पसंद आएंगी, यह फॉर्मूला भी पुराना पड़ा. अब ओटीटी के माध्यम से आर्ट, पैररल और फेस्टिवल वाली फिल्मों को ऑडिएंस मिल गया है. ऐसी फिल्मों में मैसेज भी है.

देसी प्लेटफॉर्म के दर्शक भी थोड़े अलग हैं जिनके टेस्ट की चीजें उनके सामने परोसी जा रही है और उनके कंटेंट हिट हो रहे हैं. ऐसा भी माना जा रहा है कि विदेशी प्लेटफॉर्म की पहुंच अभी पूरी तरह से देसी प्लेटफॉर्म के दर्शकों तक नहीं है. गौतम कहते हैं कि कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, बाराबंकी जैसी जगहों पर एमएक्स प्लेयर के दर्शक ज्यादा हैं. लॉकडाउन में हमने रक्तांचल सहित दस शोज पेश किए हैं.

बिपाशा बसु की डैंजरस को लोगों ने पसंद किया. 28 अगस्त को प्रकाश झा की आश्रम आएगी, जिसमें बॉबी देओल हैं. यह प्रीमियम कंटेंट लोग फ्री में देखेंगे. अपर्णा भी बताती हैं कि जी5 पर लोगों ने वेब सीरीज रंगबाज पसंद की है. यह जमीनी कंटेंट है. इसमें मिट्टी की खुशबू आती है. गोरखपुर का माहौल है. रंगबाज के दोनों सीजन हिट हैं. लेकिन अतुल का विश्लेषण थोड़ा अलग है, ‘‘ओटीटी प्लेटफॉर्म भी रेस्तरां की तरह है. आप अपने मेन्यू कार्ड में फ्रेश और नई चीजें नहीं रखेंगे तो बासी खाना खाने कौन जाएगा.’’ 

‘‘देसी प्लेयर्स के सामने अब बड़ी चुनौती अच्छे से अच्छा कंटेंट देने की होगी, फिल्मों का भी और वेब सीरीज का भी, कोई भी फिल्म दिखा देने से दर्शक नहीं रुकेंगे’’
यह भी माना जा रहा है कि विदेशी प्लेटफॉर्म्स की पहुंच अभी पूरी तरह से देसी दर्शकों तक नहीं बनी है. देसी प्लेयर्स के पास छोटे शहरों के दर्शकों के लायक ज्यादा मसाला है

प्लेटफॉर्म देसी
परीक्षा जी5
प्रकाश झा प्रोडक्शंस की इस खांटी कहानी वाली फिल्म को हफ्ते भर में ही अच्छे दर्शक मिले. यह फेस्टिवल सर्किट में थी लेकिन ओटीटी पर आकर बड़ी हो गई

आश्रम
एमएक्स प्लेयर

28 अगस्त को रिलीज हो रही प्रकाश झा की आश्रम अभी से चर्चा में है. बॉबी देओल इसमें मुख्य भूमिका में हैं. यह प्रीमियम कंटेंट लोग फ्री में देखेंगे

स्कॉटलैंड
शेमारूमी बॉक्स ऑफिस

7 अगस्त को ओटीटी पर दुनिया भर में रिलीज, मनीष वात्सल्य निर्देशित इस फिल्म को 62 पुरस्कार मिल चुके हैं. यह बलात्कार की सच्ची घटनाओं पर आधारित है

चिंटू का बर्थडे
जी5

इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने से पहले यह छोटी फिल्म मानी जा रही थी

डैंजरस
एमएक्स प्लेयर

विक्रम भट्ट की लिखी इस थ्रिलर के जरिए पांच साल बाद फिल्मों में लौटीं बिपाशा बसु अपने साथ इस प्लेटफॉर्म पर दर्शक लेकर आईं
 

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