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सिनेमाः अपने ही साये डराने लगे

महामारी से पहले ही बेहाल फिल्म उद्योग अब ड्रग का इस्तेमाल और भाई-भतीजावाद जैसे आरोपों की गहरी मार के चलते अपनी ही खोल में दुबक जाने को मजबूर.

दीपिका पादुकोण दीपिका पादुकोण

बॉलीवुड को इस वक्त किसी ऐसे शख्स की सख्त जरूरत है जो किसी भी तरह से उसकी छवि तार-तार होने से बचा ले. ऐसे संकट का इसने पहले कभी भी सामना नहीं किया था. इसकी शुरुआत 14 जून को हुई जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने खुदकुशी कर ली. वह खुदकुशी ही है, इस निष्कर्ष पर मुंबई पुलिस बहुत पहले पहुंच गई थी, हाल ही में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने इसकी पुष्टि की.

वह एक बड़ा सदमा था; संवेदनाएं व्यक्त की गईं, लोगों ने दुख और पछतावा भी जताया कि अपनी चीजों में इतने व्यस्त हो गए थे कि दूसरों की खोज-खबर तक नहीं ली. पर इसी के साथ फिल्म उद्योग के भीतर एक 'मूवी माफिया’, ‘नेपो गैंग’, और 'ड्रग नेक्सस’ के सक्रिय होने जैसे आरोपों की झड़ी लग गई. बॉलीवुड सहम गया. उद्योग को कभी भी ऐसी जलालत का सामना नहीं करना पड़ा था. नतीजा: वह उस चकाचौंध से दूर रहने की कोशिश कर रहा है जो कि उसका मुख्य व्यवसाय है.

अभिनेताओं और निर्माताओं ही नहीं बल्कि लाखों दूसरे लोगों की भी रोजी-रोटी का इंतजाम करने वाले इस उद्योग की तरफ से जब कुछ लोगों ने बोलने की कोशिश की तो सोशल मीडिया पर उन्हें घेरा गया, शर्मिंदा किया गया. पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी का साक्षात्कार लेने वाले अक्षय कुमार को भी नहीं बख्शा गया. उन्होंने एक वीडियो में कहा था कि राजपूत की मृत्यु के बाद दर्शकों का गुस्सा जायज है और उद्योग में ड्रग बेशक एक मुद्दा है, लेकिन यह समझ लेना कि हर किसी को नशे की लत है, गलत है. उसके बाद अक्षय निशाने पर आ गए और #बायकॉटलक्ष्मीबम (कुमार की आने वाली फिल्म) ट्रेंड कर रहा था.

इंडिया टुडे जब प्रतिक्रिया के लिए अभिनेताओं और निर्देशकों के पास पहुंचा, तो कुछ ने कह दिया कि वे इस 'छीछालेदर’ का हिस्सा नहीं बनना चाहते "तो कुछ लोग इस ''भटकी बहस” में अपनी तरफ से कुछ नहीं जोडऩा चाहते थे. पर कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने उद्योग का बचाव किया क्योंकि उनका मानना था कि इस उद्योग ने सबको मौका दिया है.

फिल्म उद्योग इस वक्त न चाहते हुए भी एक भयावह रियलिटी शो का भागीदार बन गया है, जिसमें मशहूर हस्तियों को सरासर अटकलों के आधार पर दोषी मान लिया जा रहा है. नशे को उखाड़ फेंकना अच्छा ही रहेगा लेकिन परले दर्जे के इस ड्रामे के लिए शायद यह ठीक समय नहीं था क्योंकि महामारी चरम पर है, लाखों लोगों के पास काम-धंधा नहीं है और चीन के साथ सीमा पर तनाव चरम पर है.

सवाल पूछे जाने चाहिए कि ध्यान भटकाने की इन कोशिशों का सियासी फायदा आखिर किसे हो रहा है? क्या सेलेब्रिटी इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की सूची में अगला नाम न जाने किसका हो, जो ''मुंबई खासकर बॉलीवुड को नशामुक्त करने का संकल्प कर चुकी है’’?

कइयों का मानना है कि यह सब बॉलीवुड की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है और ऐसा प्रचारित किया जा रहा है कि यहां ''99 प्रतिशत लोग पानी की तरह नशीली दवाओं का सेवन करते हैं’’, जैसा कि अभिनेत्री कंगना रनोट ने आरोप लगाए हैं.

आरोपों की बौछार का सबसे ज्यादा सामना कर रहे फिल्मकार करण जौहर के बचाव में लेखक-निर्देशक हंसल मेहता ने ट्वीट किया, ''जब तक हम इस षड्यंत्र के खिलाफ एकजुट नहीं होते और आवाज नहीं उठाते, मुझे डर है कि मनमाने तरीके से किसी को भी धमकाने का यह काम बदस्तूर जारी रहेगा. एकता की कमी और उत्पीड़न के डर ने हमें कायरों की तरह पेश किया है.’’

फिल्म निर्माता अनुभव सिन्हा को लगता है कि यह प्रकरण इंडस्ट्री के लिए कुछ कठोर सबक देने वाला साबित होगा. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ''बॉलीवुड को सामूहिक रूप से याद रखना चाहिए कि कोई भी उनके लिए खड़ा नहीं हुआ. कोई नहीं.’’

कभी इसे सिर आंखों बिठाया गया था, अब इसे एक कोने में धकेल दिया गया है. और इसकी ''मत पूछो, मत बताओ’’ वाली नीति ने केवल कुछ सनकी लोगों को इतनी हिम्मत दे दी है कि वे किसी को भी अपराधी के रूप में पेश कर सकते हैं. 

अपनी बहन और अभिनेत्री हुमा कुरैशी के साथ बिना किसी गॉडफादर के करियर बनाने दिल्ली से मुंबई आए अभिनेता साकिब सलीम कहते हैं, ''एक दिन, किसी ने मुझे 'नेपो किड’ [प्रतिभा नहीं बल्कि भाई-भतीजावाद का मोहताज] कहा. फिल्म उद्योग का अनुभव हमारे लिए शानदार रहा है. यहां सिर्फ 8-10 अभिनेता ही नहीं हैं. हर चीज को ही एक तराजू में तोल लेना अच्छी बात नहीं.’’

अभिनेता अर्जुन माथुर (लक बाइ चांस) बताते हैं कि ''निजी और सियासी एजेंडे पूरे करने को कुछ तत्व उद्योग को निशाने पर ले रहे हैं.’’ मेड इन हेवन में अभिनय के लिए हाल ही अंतरराष्ट्रीय एमी अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में हाल ही नामित माथुर कहते हैं, ''ऐक्टर में हमेशा खूबियां ढूंढी जाती थीं पर अब यह बीती बात हो चुकी है. पहली बार सिर्फ खोट खोजे जा रहे हैं.’’ 

चुने जा रहे निशाने
बॉलीवुड के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि एनसीबी दीपिका पादुकोण की अपनी मैनेजर करिश्मा प्रकाश के साथ 2017 में व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत को खोदकर निकाल रही है जिसमें उन्होंने हैश पर बात की थी. वह दरअसल जनवरी में दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दक्षिणपंथी भीड़ द्वारा छात्रों के साथ की गई मारपीट को लेकर दीपिका की छात्रों के प्रति सहानुभूति दिखाने का नतीजा है.

इस अभिनेत्री ने अपने प्रोडक्शन की पहली फिल्म छपाक की रिलीज से ठीक पहले सार्वजनिक रूप से अपना प्रतिरोध जताने का फैसला किया तो वे लोगों के निशाने पर आ गईं थीं. जिस दिन एनसीबी ने पादुकोण से पूछताछ शुरू की थी, ट्विटर पर #आइस्टैंडविददीपिका ट्रेंड कर रहा था. पर साथ ही #बॉलीवुड ड्रगमाफिया भी ट्रेंड कर रहा था. 
राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग के आरोपों में रिया चक्रवर्ती को एनसीबी के गिरफ्तार करने के बाद अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह और राजपूत के साथ काम कर चुकी हीरोइनों सारा अली खान (केदारनाथ) और श्रद्धा कपूर (छिछोरे) से भी पूछताछ की गई. जौहर की धर्मा प्रोडक्शंस की डिजिटल शाखा धर्माटिक एंटरटेनमेंट के कार्यकारी निर्माता क्षितिज प्रसाद अभी एनसीबी की न्यायिक हिरासत में हैं.

उन्हें प्रोडक्शन हाउस के एक प्रोजेक्ट के लिए चुना गया था. चक्रवर्ती का भी प्रतिनिधित्व करने वाले, प्रसाद के वकील सतीश मानेशिंदे ने एनसीबी पर आरोप लगाया कि एजेंसी उनके मुअव्विकल को परेशान कर रही है, साथ ही उन्हें इस मामले में जौहर के साथ-साथ रणबीर कपूर, अर्जुन रामपाल और डीनो मोरिया को भी फंसाने के लिए उनके नाम लेने का दबाव बना रही है.

कुछ के लिए महिलाओं को चुनकर निशाना बनाने की कोशिश ने केवल उस संदेश को और मजबूत किया जो चक्रवर्ती की गिरफ्तारी के दिन पहनी उनकी टीशर्ट पर छपा था: रोजेज आर रेड, वायलेट्स आर ब्लू, लेट्स स्मैश द पैट्रीआर्की, मी ऐंड यू. (यानी आओ हम पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती दें) इसने अभिनेता शशांक अरोड़ा (तितली, मेड इन हेवन) को ट्विटर पर टिप्पणी करने को प्रेरित किया, ''अर्थव्यवस्था डूब चुकी. कूटनीति ध्वस्त हो रही.

बीमारी, बेरोजगारी और भुखमरी से हजारों लोग मर रहे हैं. पर रुकिए, इन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि एक औरत धूम्रपान कैसे कर सकती है?’’ हालांकि, एनसीबी ने लैंगिक पूर्वाग्रह के आरोपों पर गौर किया है और इससे पीछा छुड़ाने को बेताब है. इंडिया टुडे टीवी को सूत्रों से पता चला है कि एनसीबी की सूची में तीन अभिनेता हैं, जिनमें एक पुरुष सुपरस्टार भी शामिल हैं. इससे पता चलता है कि उद्योग को अधिकारियों और उनके सोशल मीडिया के चीयरलीडर्स के पसंदीदा पंचिंग बैग होने से जल्द राहत मिलने की संभावना नहीं है.

सब डरे-डरे से हैं
बॉलीवुड के गैर-राजनैतिक रुख ने कई लोगों को परेशान कर दिया है. अनुभवी सितारों की चुप्पी बताती है कि इंडस्ट्री में डर का माहौल है. कलाकारों और प्रोडक्शन हाउस दोनों के काम संभालने वाले एक पीआर कर्मी का कहना है कि कई लोग 'नाराज और भन्नाए’ हुए हैं और सोशल मीडिया पर अपनी राय साझा करना चाहते हैं लेकिन वहां के जहरीले माहौल को देखते हुए कुछ कहने से बच रहे हैं.

उनके शब्दों में, ''अगर आप गौर करें तो वे सभी लोग जो आमतौर पर अपने मन की बात कहते रहे हैं, उन्होंने भी कुछ समय के लिए चुप्पी साध रखी है. हम एक ऐसे मोड़ पर आ गए हैं जहां आप चाहे जो भी कहें, भले ही वह तार्किक और सही हो, उस पर तब तक कोई ध्यान नहीं देने वाला जब तक कि आप वह बात नहीं करते जो हुड़दंगी झुंड को पसंद है.’’ 

कोई बोलने का साहस करता है तो उसे बहुत कुछ खोना पड़ सकता है. 2015 में भारत में 'बढ़ती असहिष्णुता’ की बात करने के बाद स्नैपडील ने आमिर खान को अपने ब्रांड एंबेसडर से हटा दिया था. सेलेब्रिटीज को डर रहता है कि लोग उनकी फिल्मों का बहिष्कार शुरू कर देंगे जैसा कि महेश भट्ट की फिल्म सड़क-2 के साथ हुआ. चक्रवर्ती से निकटता के कारण भट्ट फिल्म की रिलीज से बहुत पहले से ही ट्रोल्स के निशाने पर थे.

एक उद्योग पेशेवर बताते हैं कि सदस्य न्यूज चैनलों पर उद्योग का नजरिया रखने से हिचक रहे हैं क्योंकि रेटिंग की इस चूहा दौड़ में वे मीडिया ट्रायल का हिस्सा नहीं बनना चाहते. सूत्र का कहना है, ''किसी पर दोष साबित न होने तक अमूमन उसे निर्दोष माना जाता है. पर ऐसा लगता है, निर्दोष साबित होने तक हम दोषी मान लिए गए हैं.’’ 

बॉलीवुड में जो कुछ हो रहा है, सिन्हा को उसमें मैकार्थीवाद का अक्स दिखाई पड़ता है. 1950 के कुख्यात युग में हाउस ऑफ अन-अमेरिकन एक्टिविटीज ने हॉलीवुड में कथित रूप से कम्युनिस्टों के प्रति सहानुभूति रखने वालों के खिलाफ एक अभियान छेड़ा था. बहुत से कलाकार काली सूची में डाल दिए गए थे.

संजय बारू, जिनकी किताब द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर हिंदी फिल्म बनी थी, ने एक अखबार के लिए लिखे स्तंभ में कहा कि बॉलीवुड पर हमला ''राष्ट्रीय उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता... उन व्यक्तियों की छवि और विश्वसनीयता पर चोट, जो इन संस्थानों के वजूद में बड़ा योगदान देते हैं, से संस्थान की विश्वसनीयता नष्ट हो जाएगी. इससे हम राष्ट्रीय हित को नुक्सान पहुंचाएंगे.’’

फिल्म उद्योग, महामारी और लॉकडाउन के दौरान सिनेमाघरों के कम से कम 10,000 करोड़ रु. के घाटे जैसे सदमे से उबरने की अभी कोशिश ही कर रहा था कि इस नए बवाल ने दर्शकों के बीच उसकी विश्वसनीयता पर संकट खड़ा कर दिया. लोगों का खोया भरोसा हासिल करने की कोशिश करते हुए 2 अक्तूबर को जौहर ने एक ट्वीट करके बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित फिल्म बिरादरी 'चेंज विदइन’ नामक एक पहल के तहत 'भारत के मूल्यों, वीरता और संस्कृति’ का जश्न मनाने वाली फिल्मों का निर्माण करेगी.

लोगों को यह बताने की कोशिश हुई कि बॉलीवुड वह नायक है जो अच्छाई को आगे बढ़ाएगा न कि बुराई को और इसके लिए उद्योग की ओर से ठोस प्रयास की जरूरत होगी. एक आदमी जो दुनिया को बचाता दिखे वह किसी फंतासी फिल्म का काल्पनिक सुपरहीरो ही हो सकता है. वास्तव में ऐसे सुपरहीरो होते हैं? 

सीधा पक्षपात?
एनसीबी ने अभी तक जिन पांच शख्सियतों से पूछताछ की है वे सभी अभिनेत्रियां हैं. जरा देखें कि एजेंसी के रडार पर वे आखिर क्यों हैं?

रिया चक्रवर्ती
एक ऐसे ''ड्रग सिंडीकेट की सक्रिय सदस्य होने’’ के आरोप में गिरफ्तार जो सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग मुहैया करता था. 7 अक्तूबर को जमानत

दीपिका पादुकोण
राजपूत के टैलेंट मैनेजर जय शाह के फोन पर एनसीबी को 2017 का एक व्हाट्सऐप चैट मिला, जिसमें दीपिका अपनी सेक्रेटरी से 'माल’ के बारे में चर्चा कर रही हैं

सारा अली खान
उन्होंने राजपूत के साथ आगाज किया था. राजपूत के पावना फार्महाउस के पास रहने वाले एक मछुआरे ने बताया कि वे ड्रग सेवन वाली पार्टियों में अक्सर दिखती थीं

श्रद्धा कपूर
छिछोरे में राजपूत के साथ काम किया था. उन्हें इंस्टाग्राम पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि राजपूत के पावना फार्महाउस पर वे गई हैं

रकुलप्रीत सिंह
एनसीबी का कहना था कि चक्रवर्ती ने सिमोन खंबाता के साथ उनका भी नाम लिया था लेकिन बाद में चक्रवर्ती अपनी बात से मुकर गईं

लोगों ने इस पहलू पर गौर किया है कि एनसीबी की पड़ताल में अभिनेत्रियों के साथ पक्षपात किया जा रहा है. अपनी छवि को लेकर चौकस एजेंसी ने कहा है कि जल्द ही वह तीन अभिनेताओं से भी पूछताछ करेगी.

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