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अर्थातः कहीं ये 'वो’ तो नहीं!

क्रिप्टो के सही होने की गारंटी नहीं है लेकिन भविष्य में यह नाकाम होगी, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता.

अर्थात‍् अर्थात‍्

योसेरियन एक लड़ाकू पायलट था. किस्सा दूसरे विश्व युद्ध का है. जंग से बचने के लिए उसने खुद को पागल करार दे दिया. डॉक्टर ने रिपोर्ट दी कि जो युद्ध नहीं करना चाहता वह पागल हो नहीं सकता (युद्ध के लिए तो पागलपन जरूरी है). यानी कि अगर उसे खुद को पागल साबित करना था तो जहाज से बम बरसाने थे. लेकिन अगर यही करना है तो खुद को पागल कहलाने से फायदा क्या?

योसेरियन, जोसफ हेलर के उपन्यास कैच 22 का पात्र है. अंतरविरोध बताने वाला अंग्रेजी मुहावरा इसी उपन्यास की देन है.

क्रिप्टोकरेंसी में फंसे लाखों निवेशक योसेरियन बन रहे हैं. इस बाजार में दिसंबर 2020 तक (एक साल में 600 फीसद की बढ़त) 5.6 अरब डॉलर (क्वाइन शेयर) लग चुके थे. इस जून तक कारोबार 2 ट्रिलियन (20 खरब) डॉलर तक पहुंच गया. लेकिन यह किसी को पता नहीं कि वे जो खरीद या बेच रहे हैं वह कमोडिटी, करेंसी या मुद्रा, सिक्योरिटी अथवा पेंमेंट सिस्टम, आखिर है क्या ?

नियमों का शून्य है. बिचौलियों (एक्सचेंज) ने ताकत बटोर ली. इस बीच मनी लॉन्ड्रिंग का खतरा देख चीन-अमेरिका-यूरोप में नियामकों का डंडा चलने लगा. देखते-देखते कीमतें आधी हो गईं. अब लाखों की जान सांसत में है.

क्रिप्टो का कैच 22 यह है कि जिसे बहुत से लोग खरीद रहे हैं वह सही ही हो इसकी कोई गारंटी नहीं है लेकिन अगर तकनीक दुनिया भविष्य है तो क्रिप्टो नाकाम होगी यह भी कैसे कहा जा सकता है.

निकोलस नसीम तालेब इस दौर के सबसे स्थापित वित्तीय चिंतक हैं. उनका एक ताजा पर्चा (न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी) क्रिप्टोकरेंसी की दुविधाओं के जवाब तलाशता है.

वित्तीय बाजार चार तरह के उपकरणों को जानता है.

एक है कमोडिटी यानी जिंस. जिसका एक वाणिज्यिक मूल्य है. इसे किसी मुद्रा या दूसरे जिंस से बदला जा सकता है. कमोडिटी एक्सचेंज में मांग व आपूर्ति के आधार पर जिंसों (तेल, धातु, कृषि उत्पाद) की कीमत तय होती है.

इसी बिना पर अमेरिका (2015) और कनाडा (2021) के नियामकों ने क्रिप्टोकरेंसी को कमोडिटी का दर्जा दिया. माइनिंग की क्रिया और बिटक्वाइन का सुनहला चिन्ह इसके कमोडिटी यानी सोना जैसे होने का संकेत देता है.

अलबत्ता तालेब जैसे तमाम विशेषज्ञ कहते हैं कि क्रिप्टो कमोडिटी नहीं है. सोना-चांदी के रखरखाव पर खर्च नहीं होता, उनकी मात्रा में कमी नहीं होती इसलिए उनकी स्टोर वैल्यू है. क्रिप्टो का मूल्य उसमें लोगों की दिलचस्पी से तय होता है. यह गुब्बारा कभी भी फट सकता है.क्रिप्टो करेंसी भी नहीं है. जरूरी नहीं कि करेंसी लीगल टेंडर या संप्रभु मुद्रा ही हो.

करेंसी भी कमोडिटी हो सकती हैं, जैसे डॉलर और यूरो जिन्हें एक्सचेंज पर बेचा खरीदा-जाता है. अलबत्ता करेंसी होने के लिए विनिमय की सुविधा (फंजिबिल), बुनियादी मजबूती और कीमतों में स्थिरता जरूरी है. अगर क्रिप्टो की तरह किसी करेंसी की कीमत कुछ हफ्तों में आधी रह जाए तो तबाही मच जाएगी.

अगर क्रिप्टो शेयर या बॉन्ड की तरह प्रतिभूति (सिक्योरिटी) है तो इसके पीछे ठोस संपत्ति, संस्था या कारोबार होना चाहिए. प्रतिभूतियां संपत्ति नहीं हैं लेकिन वे संपत्ति का हिस्सा होती हैं जिन पर लाभ मिलता है. इनकी खरीद बिक्री पर फायदा नुक्सान होता है.

और अगर क्रिप्टो भुगतान का माध्यम (पेमेंट सिस्टम) है तो इसकी कीमत और स्थिर करनी होगी ताकि इससे सामान खरीदे जा सकें.

अंतरविरोधों के बीच कई लोगों को क्रिप्टो में गैर सरकारी ग्लोबल करेंसी का अक्स दिखता है जो अमेरिकी डॉलर को कुर्सी को उतार सकती है. तालेब के मुताबिक, यह एक शानदार कल्पना है लेकिन इसके लिए तमाम उत्पादों-सेवाओं के मुकाबले क्रिप्टो का मूल्य निर्धारित करना होगा. उसके लिए सरकारों के भरोसेमंद कानून चाहिए. क्रिप्टो उत्साह आधारित निवेश पर चल रही है जो सुरक्षित निवेश (सेफ हैवेन) नहीं बल्कि जोखिम भरा होने की गारंटी है.

सितंबर में 2020 में वर्चुअल निवेशों (क्रिप्टो) में मनी लॉन्ड्रिंग व दूसरे अपराधों के खतरे पर फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की चेतावनी के बाद कई देशों ने क्रिप्टो कारोबार पर हल्ला बोल दिया. इसके बाद क्रिप्टो की ढलान शुरू हुई है.  

नियम शून्यता के बीच वित्तीय निवेशों के तजुर्बे भयानक रहे हैं. भारत में भी करीब 40 अरब डॉलर (चेनालिसिस जून रिपोर्ट) लगे हैं. यह दिग्गज उपभोक्ता व होटल कंपनी आइटीसी के शेयर बाजार पूंजीकरण से ज्यादा है. सरकार को खबर हो कि भारत में 70-80 लाख निवेशकों की बचत दांव पर है.

उत्साही निवेश के अलावा क्रिप्टोकरेंसी की फिलहाल कोई आर्थिक, मौद्रिक या वित्तीय बुनियाद नहीं दिखती. सरकार को सक्रिय होना होगा कि यह पोंजी या फर्जीवाड़ा न बन जाए.

सनद रहे कि तकनीकें साधन हैं, स्वयं साध्य नहीं. उनकी कीमत उनसे मिलने वाले समाधानों से तय होती है. किसे पता था कि रूसी उपग्रह स्पुतनिक से खौफ खाया अमेरिका अपनी सैन्य जरूरत के लिए जिस इंटरनेट को बनाएगा, वह दुनिया बदल देगा.

क्रिप्टो तकनीकें वित्तीय दुनिया का इंटरनेट बन सकती हैं लेकिन यह होगा कैसे, इसका नक्शा अभी तक सामने नहीं आया है. इसलिए जरा संभल कर.

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