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फैक्ट चेक: सीएम योगी के कार्यकाल में ही हुई थी हिंसा और आगजनी की ये घटना, पूरा सच नहीं बताती ये पोस्ट

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि इस पोस्टकार्ड में इस्तेमाल की गई पहली तस्वीर जिसे अखिलेश यादव के कार्यकाल का बताया जा रहा है, वो सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल की है. हालांकि ये बात सच है कि दूसरी फोटो भी सीएम योगी के शासनकाल की है.

इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है. इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है.

आगामी यूपी चुनाव से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों का एक पोस्टकार्ड वायरल हो रहा है. इसके जरिये अखिलेश यादव पर निशाना साधा जा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि जहां पहले यूपी में दंगा-फसाद आम बात थी, वहीं अब अपराधी पुलिस से खौफ खाते हैं.

पहली तस्वीर की हेडिंग है ‘2017 से पहले’. इसमें जलते हुए वाहनों के साथ हिंसा का एक भयानक दृश्य दिखाई दे रहा है और नीचे लिखा है, ‘दंगाइयों का खौफ’. वहीं, दूसरी फोटो की हेडिंग है ‘2017 के बाद’. इसमें बड़ी-बड़ी मूछों वाला एक शख्स सिर झुकाए पुलिस के सामने खड़ा है. इसके साथ लिखा है, ‘दंगाई मांग रहे माफी’.

इस पोस्टकार्ड को बहुत सारे लोग ‘#योगी_बाबा_UP_का_राजा’ हैशटैग के साथ शेयर कर रहे हैं. ऐसी ही एक पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि इस पोस्टकार्ड में इस्तेमाल की गई पहली तस्वीर जिसे अखिलेश यादव के कार्यकाल का बताया जा रहा है, वो सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल की है. हालांकि ये बात सच है कि दूसरी फोटो भी सीएम योगी के शासनकाल की है.  

 
2017 की है पहली तस्वीर

पहली फोटो को रिवर्स सर्च करने पर ये हमें ‘द एशियन एज’ की 2 अक्टूबर 2017 की एक रिपोर्ट में मिली. यहां  दी गई जानकारी के मुताबिक, ये फोटो कानपुर के परमपुरवा इलाके की है, जहां मुहर्रम का जुलूस निकलने के दौरान दो समुदाय आपस में भिड़ गए थे और वाहनों में आग लगा दी गई थी.

‘इंडिया टाइम्स’ की फोटो गैलरी में इसी घटना से जुड़ी और तस्वीरें देखी जा सकती हैं.

योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री 19 मार्च 2017 को शपथ ली थी. साफ तौर पर, वायरल फोटो उन्हीं के कार्यकाल की है.

दिसंबर 2018 की है दूसरी फोटो

रिवर्स सर्च के जरिये हमें दूसरी फोटो ‘द हिंदुस्तान टाइम्स’ की 31 दिसंबर 2018 की एक रिपोर्ट में मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, ये फोटो और माफिया अतीक अहमद की है. दरअसल, लखनऊ के एक प्रॉपर्टी डीलर मोहित जायसवाल ने अतीक और उसके साथियों पर उसे बंधक बनाकर देवरिया जेल में कई घंटों तक यातनाएं देने का आरोप लगाया था. अतीक खुद भी उस वक्त देवरिया जेल में ही बंद थे. वायरल तस्वीर इसी घटना से संबंधित है. इस घटना को लेकर कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था. ‘इंडिया टीवी’ ने भी साल 2018 की इस घटना को लेकर रिपोर्ट छापी थी.

डीएनए’ की एक रिपोर्ट  के मुताबिक, साल 1979 से लेकर 2019 के बीच अतीक के खिलाफ 109 मामले दायर हुए थे जिनमें से 17 हत्या के थे.

पड़ताल से ये बात साबित हो जाती है कि सोशल मीडिया पर वायरल दोनों ही तस्वीरें यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल की हैं. लेकिन, दंगे वाली पहली तस्वीर को अखिलेश यादव के कार्यकाल का बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

तस्वीरों से समझा जा सकता है कि जहां अखिलेश यादव के कार्यकाल के दौरान यूपी में दंगा-फसाद आम बात थी, वहीं योगी सरकार के शासनकाल में अपराधी पुलिस से खौफ खाते हैं.

निष्कर्ष

इस पोस्टकार्ड में दिख रही पहली और दूसरी दोनों ही तस्वीरें योगी सरकार के कार्यकाल की हैं.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
सोशल मीडिया यूजर्स
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