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फैक्ट चेक: बैंक के बाहर भीड़ के पुराने वीडियो को बताया जा रहा है मस्जिद में लगा वैक्सीनेशन कैंप

एक वीडियो शेयर करते हुए कहा जा रहा है कि कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ सरकार ने मुसलमानो के लिए मस्जिदों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है. इस वीडियो की पड़ताल में जानते हैं कि क्या है इस वायरल वीडियो का सच...

वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट

क्या छत्तीसगढ़ सरकार मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए मस्जिदों में विशेष टीकाकरण अभियान चला रही है? सोशल मीडिया पर वायरल दावों की मानें तो ये अभियान राज्य के कोरबा शहर में चलाया गया है. ऐसा कहने वाले लोग एक बेहद लंबी लाइन में लगी बुर्कानशीं महिलाओं का एक वीडियो भी शेयर कर रहे हैं.

वीडियो को शेयर करते हुए एक फेसबुक यूजर ने लिखा, “कांग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ सरकार ने मुसलमानो के लिए मस्जिदों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया है. कोरबा की कुछ मस्जिदों में सिर्फ़ मुसलमानो को वैक्सीन लगाया जाएगा. क्या यह समाज को बांटने वाला काम नहीं है! ऐसी सुविधा मंदिर और गुरुद्वारों को नहीं दी गयी है! क्यूंकि कांग्रेस मानती है भारत के समस्त संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानो का है!” इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर की कुछ मस्जिदों में सिर्फ मुसलमानों को वैक्सीन लगाए जाने की बात महज अफवाह है. इस दावे के साथ शेयर हो रहा वीडियो तकरीबन एक साल पुराना है और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर में एक बैंक के बाहर लाइन में लगीं महिलाओं का है. फेसबुक और ट्विटर दोनों जगह ये दावा वायरल है.  

छत्तीसगढ़ की कई स्थानीय वेबसाइट्स ने भी मस्जिदों में कथित तौर पर सिर्फ मुसलमानों को वैक्सीन लगाए जाने की ये खबर छापी. ऐसी कुछ खबरों के आर्काइव्ड वर्जन यहांयहां और यहां देखे जा सकते हैं.

वायरल वीडियो की असलियत  

वायरल वीडियो में एक जगह एक ‘गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल’ का बोर्ड नजर आता है. साथ ही, एक बोर्ड में ‘मुजफ्फरनगर’ लिखा हुआ दिखता है. इससे ये बात साफ हो जाती है कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का है.

सर्च करने पर हमें पता लगा कि ‘गुरु गोबिंद सिंह पब्लिक स्कूल’ मुजफ्फरनगर की गांधी कॉलोनी में है. हमें इस स्कूल के नाम पर बने एक फेसबुक पेज में इस स्कूल की फोटो मिली. इस फोटो की तुलना वायरल वीडियो की कुछ तस्वीरों से करने से साफ हो जाता है कि ये वही स्कूल है.

कीवर्ड सर्च के जरिये हमें पता लगा कि अप्रैल 2020 में एक अफवाह के चलते मुजफ्फरनगर के एक बैंक के बाहर जन-धन खाता धारकों की भीड़ लग गई थी. दरअसल, पिछले साल ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ के तहत महिला जनधन खाता धारकों के खाते में तीन किस्तों में 1500 रुपये डाले गए थे. अफवाह उड़ी कि महिलाओं के खाते में डाले गए ये पैसे वापस निकाले जा सकते हैं. इसलिए बैंक के बाहर महिलाओं की भीड़ लग गई थी. बाद में बैंककर्मियों ने उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेजा था. मीडिया में इस घटना से जुड़ी कई खबरें प्रकाशित हुई थीं. ऐसी ही एक रिपोर्ट नीचे देखी जा सकती है.

छत्तीसगढ़ में मुसलमानों के लिए विशेष वैक्सीनेशन कैंप की अफवाह  

छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग के संयुक्त सचिव उमेश मिश्रा ने ‘आजतक’ को बताया कि कोरबा में मुसलमानों के लिए अलग से कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव चलाए जाने का दावा एकदम झूठ है. उन्होंने कहा कि कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में हर धर्म के लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही है.

कोरबा जनसंपर्क कार्यालय के सूचना सहायक बीके रात्रे ने इस बात की पुष्टि की कि किसी भी मस्जिद के अंदर प्रशासन की तरफ से वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है. हां, ये सच है कि जिन सामुदायिक केंद्रों में वैक्सीन लगाई जा रही है, उनमें से कुछ मस्जिदों के पास हैं.

सवाल उठता है कि आखिर इस तरह का भ्रम फैला कैसे? हमने पाया कि जिन स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में कोरबा की मस्जिदों में मुस्लिम समाज के लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाए जाने का दावा किया गया है, उन सभी में 21 मई के कोरोना टीकाकरण अभियान की बात है. साथ ही, उनमें वार्ड नंबर 23, रविशंकर शुक्ला नगर, कोरबा के निर्दलीय पार्षद अब्दुल रहमान का बयान भी दिया हुआ है.

हमने अब्दुल रहमान से संपर्क किया तो उन्होंने बताया, “मैं पार्षद होने के साथ ही सुन्नी मुस्लिम जमात कोरबा का विधिक सलाहकार भी हूं. इस नाते मैंने 21 मई के टीकाकण को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से अपील की थी कि वो ज्यादा से ज्यादा संख्या में वैक्सीन लगवाएं. कुछ वैक्सीनेशन सेंटर मस्जिदों के पास थे. मैंने लोगों से अपील करते समय मस्जिदों के नाम वैक्सीनेशन सेंटर के लैंडमार्क के रूप में लिए थे, ताकि लोग आसानी से समझ सकें कि वैक्सीन कहां-कहां लग रही है. लेकिन मीडिया के कुछ लोगों ने इसका अर्थ ये निकाला कि वैक्सीन मस्जिदों में लग रही है और सिर्फ मुसलमानों को लग रही है. कुछ लोगों ने इस एंगल से खबर भी छाप दी. इस तरह ये भ्रम फैला.”

‘आजतक’ के कोरबा संवाददाता गेंद लाल शुक्ल ने हमें बताया कि कुछ मुस्लिम संगठनों ने व्हाट्सएप पर अपने पर्चे शेयर किए थे जिनमें लिखा था कि 21 मई को शासन की तरफ से कुछ विशेष मस्जिदों में वैक्सीन लगाई जाएगी. ये भी भ्रम फैलने की एक वजह रही. ऐसा ही एक पर्चा नीचे देखा जा सकता है, जिसमें छह मस्जिदों के नाम वैक्सीनेशन सेंटर के रूप में दिए गए हैं.  

कोरबा नगर निगम कार्यालय से हमें जानकारी मिली कि 21 मई 2021 को प्रशासन की तरफ से 45 साल से अधिक उम्र वाले लोगों को कोरोना की वैक्सीन लगाने का अभियान चलाया गया था. कार्यालय के एक अधिकारी ने हमें उन सेंटर्स की लिस्ट भेजी जहां 21 मई को कोरोना वैक्सीनेशन हुआ था. इस सूची में कोरबा की जामा मस्जिद, मदीना मस्जिद और रामजानकी मंदिर का नाम देखा जा सकता है. इस बारे में बताते हुए अधिकारी ने बताया कि वैक्सीनेशन सेंटर्स की सूची में धार्मिक स्थलों का जिक्र सिर्फ लैंडमार्क के रूप में किया गया था क्योंकि कैंप उनके आसपास लगे थे. किसी भी धार्मिक स्थल के अंदर कोई वैक्सीनेशन कैंप नहीं लगाया गया.

हमने पुरानी बस्ती स्थित कोरबा की जामा मस्जिद में अजान देने वाले जफर अंसारी से संपर्क किया. उन्होंने इस बात की पुष्टि की कोरोना का वैक्सीनेशन कैंप मस्जिद के अंदर नहीं, मस्जिद के पास लगाया गया था.

हमारी पड़ताल से ये बात साफ हो जाती है कि छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर की कुछ मस्जिदों में मुसलमानों के लिए विशेष वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाने की बात गलत है. इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा एक साल पुराना वीडियो यूपी मुजफ्फरनगर का है जिसका वैक्सीनेशन से कोई लेना-देना नहीं इै. इस वीडियो में दिख रही बुर्कानशीं महिलाएं एक बैंक की लाइन में खड़ी थीं.

 

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर की कुछ मस्जिदों में मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए विशेष वैक्सीनेशन कैंप लगाए गए. 

निष्कर्ष

ये वीडियो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का है. छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर की कुछ मस्जिदों में मुसलमानों के लिए विशेष वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाने की बात महज अफवाह है.

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