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फैक्ट चेक: भारत-चीन युद्ध में शहीद हुआ सैनिक नहीं, ये सिर्फ एक मॉडल है

सोशल मीडिया पर एक भावुक कर देने वाली फोटो शेयर हो रही है. फोटो में एक जमीन में आधा धंसा हुआ कंकाल नजर आ रहा है, जिसने एक बंदूक पकड़ रखी है. फोटो शेयर करते हुए बहुत सारे लोग कह रहे हैं कि ये रेजांग ला के युद्ध में शहीद हुए एक सैनिक के अवशेष हैं. इस युद्ध में 114 सैनिकों ने चीनियों से लड़ते-लड़ते अपनी जान गंवा दी थी और जब उनकी लाशें मिली थीं, तो उनकी उंगलियां बंदूक के ट्रिगर पर थीं.

Viral Photo of Martyr soldier Viral Photo of Martyr soldier

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला में स्थित युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया , जिसका हाल ही में नवीनीकरण किया गया था. साल 1962 में यहां हुए युद्ध में भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना का बहादुरी से मुकाबला किया था.

इसी से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक कर देने वाली फोटो शेयर हो रही है. फोटो में एक जमीन में आधा धंसा हुआ कंकाल नजर आ रहा है, जिसने एक बंदूक पकड़ रखी है.  

फोटो शेयर करते हुए बहुत सारे लोग कह रहे हैं कि ये रेजांग ला के युद्ध में शहीद हुए एक सैनिक के अवशेष हैं. इस युद्ध में 114 सैनिकों ने चीनियों से लड़ते-लड़ते अपनी जान गंवा दी थी और जब उनकी लाशें मिली थीं, तो उनकी उंगलियां बंदूक के ट्रिगर पर थीं.

एक फेसबुक यूजर  ने फोटो के साथ कैप्शन लिखा, “रेंजागला युद्ध के बाद की यह तस्वीर थी. याद करिये रेंजागला जहां 114 वीर अहिरों ने लड़ते-लड़ते अपनी जान गवां दी और 3 महीने बाद जब उनके शव मिले तो अंगुली ट्रिगर पर थी.”

Fact Check

हमने पाया कि सोशल मीडिया पर वायरल फोटो भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए किसी सैनिक के अवशेषों की नहीं, बल्कि एक मॉडल की है. ये मॉडल दिलीप सरकार नामक एक इतिहासकार ने साल 2017 में बनाया था.

कैसे पता की सच्चाई?

वायरल फोटो को रिवर्स सर्च करने से ये हमें फोटो शेयरिंग वेबसाइट ‘पिंट्रेस्ट’ पर मिली जहां इसे एक मॉडल किट बताया गया है.

Fact Check

एक अन्य वेबसाइट पर हमें ये फोटो एक ऐसे एंगल से मिली जिसमें कंकाल एक डिब्बे के अंदर रखा हुआ दिखाई दे रहा है. साथ ही, इस डिब्बे के बाहरी हिस्से में लिखा है, ‘दिलीप सरकार एमबीई’.  

कीवर्ड सर्च के जरिये तलाशने पर हमें पता चला कि दिलीप कुमार एक इतिहासकार और लेखक हैं जो इंग्लैंड में रहते हैं. दिलीप ने 28 जनवरी 2017 को ये फोटो अपने फेसबुक पेज पर शेयर की थी. साथ ही, ये बताया था कि ये मॉडल उन्होंने ‘मिलिट्री माॅडलिंग’ नाम की मैग्जीन के लिए बनाया है.

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इस पोस्ट में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि जो कंकाल नजर आ रहा है, वो एक ‘मॉडल किट’ का हिस्सा है. ये किट उन्होंने ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘ईबे’ से खरीदी थी.

‘मिलिट्री माॅडलिंग’ नाम की मैग्जीन में दिलीप ने इस मॉडल को बनाने के सारे स्टेप्स भी समझाए थे.

 

Fact check

रेजांग ला का युद्ध

साल 1962 के भारत-चीन युद्ध में वैसे तो जीत चीन की हुई थी. लेकिन, पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला इलाके में 18 नवंबर 1962 को हुए संघर्ष में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट ने चीन को कड़ी शिकस्त दी थी. भारतीय सेना ने ये सीमित हथियारों और संख्या में कम होने के बावजूद कर दिखाया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस युद्ध में भारतीय सेना के 114 सैनिक शहीद हुए थे. वहीं, चीन ने अपने करीब 500 सैनिकों के मारे जाने की बात कही थी. रेजांग ला में हुए इस युद्ध के कुछ दिन बाद ही चीन ने युद्ध विराम का ऐलान कर दिया था.

रेजांग ला युद्ध में लड़ चुके सैनिक रमाचंद्र यादव ने एक इंटरव्यू  में बताया था कि इस युद्ध में मरे कुछ भारतीय सैनिकों के शव सचमुच इस स्थिति में मिले थे कि उनकी उंगलियां बंदूक के ट्रिगर पर थीं.

इससे पहले ये तस्वीर दूसरे दावों के साथ भी वायरल हो चुकी है. उस वक्त भी कई वेबसाइट्स ने इसकी सच्चाई बताई थी. साफ है कि एक मिलिट्री मॉडल की तस्वीर भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिक के अवशेषों के रूप में वायरल हो रही है.  

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

ये 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए एक सैनिक के अवशेषों की तस्वीर है.

निष्कर्ष

ये फोटो दिलीप सरकार नाम के इतिहासकार के बनाए हुए एक मॉडल की है, न कि भारत-चीन युद्ध में शहीद हुए किसी सैनिक के शरीर के अवशेषों की.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
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