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फैक्ट चेक: ग्रेटा थनबर्ग ने नहीं दिया चॉपस्टिक का इस्तेमाल बंद करने से जुड़ा ये बयान

एक ओर भारत के अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए हाहाकर मचा है और देश में हर दिन कोरोना वायरस के मामलों और इससे होने वाली मौतों के नए-नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों ने ट्विटर को वे सभी पोस्ट हटाने का आदेश ​दिया है.

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भारत में कहर ढा रही कोरोना महामारी को लेकर स्वीडन की चर्चित पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने चिंता जताई है. 24 अप्रैल 2021 के एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, “भारत में जो कुछ हो रहा है, वो दिल तोड़ने वाला है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत ही आगे आना चाहिए और भारत की हर संभव मदद करनी चाहिए.”

26 अप्रैल 2021 को उन्होंने एक और ट्वीट किया, “जहां एक ओर भारत के अस्पतालों में ऑक्सीजन के लिए हाहाकर मचा है और देश में हर दिन कोरोना वायरस के मामलों और इससे होने वाली मौतों के नए-नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों ने ट्विटर को वे सभी पोस्ट हटाने का आदेश ​दिया है, जिनमें महामारी से निपटने के सरकार के तरीकों की आलोचना की गई हो.” ग्रेटा ने भारत के किसान आंदोलन के वक्त भी अपनी आवाज मुखर की थी.

कोरोना महामारी से जुड़ा हालिया बयान आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर ग्रेटा थनबर्ग का एक कथित बयान जो पिछले कुछ समय से शेयर किया जा रहा था, अचानक वायरल हो गया है. ऐसी चर्चा है कि ग्रेटा ने पर्यावरण को बचाने के लिए खाना खाने के काम आने वाले  चॉपस्टिक का इस्तेमाल न करने की अपील की है.

एक फेसबुक यूजर ने इस बारे में लिखा, “ग्रेटा थनबर्ग ने चॉपस्टिक इस्तेमाल करने से मना किया ताकि पेड़ों को बचाया जा सके. इस पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने बताया कि चॉपस्टिक बांस से बनते हैं जो कि घास है और ग्रेटा को वापस स्कूल जाकर पढ़ाई करने की सलाह दी.”
 
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि पर्यावरण ग्रेटा थनबर्ग के नाम से सोशल मीडिया पर जो बयान वायरल है, वो उन्होंने कभी दिया ही नहीं. ग्रेटा के प्रवक्ता ने खुद इस बात की पुष्टि की है.

क्या है सच्चाई

हमें ऐसी कोई भी विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें लिखा हो कि ग्रेटा थनबर्ग ने पर्यावरण को बचाने के लिए चॉपस्टिक्स का इस्तेमाल न करने की सलाह दी है. अगर उन्होंने सचमुच इस किस्म का कोई बयान दिया होता तो सभी जगह इसकी चर्चा होती.

ग्रेटा के प्रवक्ता ने ‘एएफपी’ को बताया कि उन्होंने चॉपस्टिक के बारे में इस किस्म का कोई भी बयान नहीं दिया है.

ग्रेटा थनबर्ग के नाम पर सोशल मीडिया पर वायरल बयान को हमने कीवर्ड सर्च के जरिये खोजा. हमें ‘joe-ks.com’ वेबसाइट पर ठीक वही बयान मिला जो ग्रेटा के नाम से वायरल हो रहा है. इस वेबसाइट में साफ लिखा है कि ये एक ‘ह्यूमर साइट’ है, यानी मजाक और व्यंग्य पर आधारित वेबसाइट है. ऐसा हो सकता है कि इस वेबसाइट पर दिए गए बयान को कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर शेयर किया हो और बाद में ये ग्रेटा के असली बयान के रूप में वायरल हो गया हो.

किसान आंदोलन के वक्त भी ग्रेटा थनबर्ग की एक एडिट की हुई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी जिसमें वे एक ट्रेन की सीट पर बैठी खाना खा रही थीं, जबकि खिड़की के बाहर से कुछ बच्चे ललचाई नजरों से उन्हें देख रहे थे. उस वक्त भी हमने उस फोटो की सच्चाई बताई थी.
 
पड़ताल से साफ हो जाता है कि पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने चॉपस्टिक का इस्तेमाल बंद करने जैसा कोई बयान नहीं दिया है. उनके नाम पर वायरल हो रहा बयान मनगढ़ंत है.  

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने कहा है कि चॉपस्टिक का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए ताकि पेड़ों को बचाया जा सके.

निष्कर्ष

ग्रेटा थनबर्ग ने चॉपस्टिक के इस्तेमाल से जुड़ा इस किस्म का कोई भी बयान नहीं दिया है. उनके प्रवक्ता ने भी इस बात की पुष्टि की है.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

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