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फैक्ट चेक: क्या संसद की कैंटीन में बेहद सस्ता है खाना?

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोत्तरी के विरोध में हो रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर खानों के मूल्य का एक चार्ट वायरल हो रहा है.

भारतीय संसद (फाइल फोटो- PTI) भारतीय संसद (फाइल फोटो- PTI)

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में फीस बढ़ोत्तरी के विरोध में हो रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पर खानों के मूल्य का एक चार्ट वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि यह भारतीय संसद की कैंटीन में खाने के मूल्य की लिस्ट है. अगर बाजार मूल्य से तुलना करें तो इस चार्ट में दिख रहे खाने का दाम बेहद सस्ता है.

तमाम सोशल मीडिया यूजर इस चार्ट को शेयर कर रहे हैं. पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने इस चार्ट को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए दावा किया है कि भारतीय संसद ज्यादातर सांसद करोड़पति हैं, फिर भी संसद की कैंटीन में खाने के सामान बेहद सस्ते हैं जबकि जेएनयू के छात्रों को 'मुफ्तखोर' कहकर उनकी आलोचना की जा रही है.

सोमवार को जेएनयू के छात्रों ने हॉस्टल की फीस के मुद्दे पर प्रदर्शन किया. इस दौरान छात्रों की पुलिस के साथ झड़प हुई. जेएनयू में सिंगल सीटर कमरे के लिए फीस 20 रुपये से बढ़ाकर 600 और डबल सीटर रूम के लिए 10 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये कर दी गई थी. कुछ नये चार्ज भी छात्रों पर लगाए गए, जिसका वे विरोध कर रहे हैं.

हालांकि, बुधवार को जेएनयू प्रशासन ने फीस बढ़ोत्तरी को आंशिक तौर पर वापस लेने की घोषणा की.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि संसद की कैंटीन में खाने के मूल्यों की ​जो सूची वायरल हो रही है, वह करीब चार साल पुरानी है. बाद में इन मूल्यों को संशोधित किया गया था, हालांकि, यह अब भी बाजार मूल्य से काफी कम है.

वायरल हो रही लिस्ट को ट्वीट करते हुए पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने लिखा, “संसद की कैंटीन का रेट कार्ड। और मुफ्त खोर छात्र है? #jnuprotest”.

स्टोरी लिखे जाने तक कनौजिया के इस ट्वीट को करीब 3400 लोगों ने लाइक किया है और 1600 से ज्यादा बार इसे ​री​ट्वीट किया जा चुका है.

संसद की कैंटीन का यह पुराना रेट चार्ट फेसबुक पर भी वायरल हो रहा है.

AFWA की पड़ताल

AFWA की पड़ताल के दौरान हमने पाया कि वायरल सूची में संसद की कैंटीन में खाने पर जो सब्सिडी दी जा रही थी उसे दिसंबर, 2015 में लोगों की नाराजगी के चलते संशोधित किया गया था. 1 जनवरी, 2016 से संसद की कैंटीन में खाने की वस्तुओं के दाम बढ़ गए.

इसके अलावा, इंडिया टुडे के पत्रकार अशोक उपाध्याय की ओर से 2018 में दायर एक आरटीआई के जवाब में लोकसभा सचिवालय ने संसद की कैंटीन का मौजूदा रेट चार्ट उपलब्ध कराया था. आरटीआई के इस जवाब में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि संसद की कैंटीन में खाने की वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं.

यहां पर संसद की कैंटीन में उपलब्ध खाने के पुराने दाम और नए दाम को देखकर इनकी तुलना की जा सकती है.

फैक्ट चेक

पत्रकार Prashant Kanojia और अन्य सोशल मीडिया यूजर

दावा

संसद की कैंटीन में खाने की वस्तुओं के मूल्यों की सूची.

निष्कर्ष

वायरल हो रही मूल्यों की सूची करीब चार साल पुरानी है.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
पत्रकार Prashant Kanojia और अन्य सोशल मीडिया यूजर
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