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फैक्ट चेक: बेंगलुरु में 11 अगस्त की हिंसा के नाम पर शेयर हो रही 2016 की तस्वीर

वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर सितंबर, 2016 की है कि जब कावेरी जल विवाद को ​लेकर बेंगलुरु में हिंसा हुई थी.

गलत फोटो की जा रही वायरल गलत फोटो की जा रही वायरल

बेंगलुरु में 11 अगस्त की रात में हिंसा भड़क गई. कांग्रेस के एक विधायक के रिश्तेदार की ओर से कथित तौर पर एक अपमानजनक फेसबुक पोस्ट के बाद ये हिंसा भड़की थी. इस दौरान गुस्साई भीड़ ने पथराव किया और वाहनों को आग लगा दी. हिंसा रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें तीन लोग मारे गए और 35 नागरिक घायल हुए. इस हिंसा में 70 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं.

इस हिंसा के मद्देनजर सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है जिसमें देखा जा सकता है कि दिन के समय सड़क पर एक ट्रक जल रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीर 11 अगस्त को बेंगलुरु में हुई हिंसा की है.

फेसबुक पर एक यूजर ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है, “जेहादियों ने कल रात बेंगलुरु शहर में आतंक मचाया”.

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इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि ये दावा गलत है. वायरल पोस्ट में जो तस्वीर इस्तेमाल की जा रही है, वह बेंगलुरु में 2016 में कावेरी जल विवाद को लेकर हुई हिंसा की है. सुप्रीम कोर्ट ने पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने तमिलनाडु के रजिस्ट्रेशन नंबर वाले वाहनों में आग लगा दी थी.

वायरल पोस्ट के आर्काइव्ड वर्जन देखे जा सकते हैं.

AFWA की पड़ताल

खबरों के मुताबिक, बेंगलुरु में 11 अगस्त की रात को हिंसा भड़की और भीड़ ने पथराव व आगजनी की. दूसरी तरफ वायरल हो रही ये तस्वीर दिन के उजाले की है, जिसमें ट्रक जल रहा है और आसपास तमाम लोग खड़े देख रहे हैं. हमें कोई ऐसी रिपोर्ट भी नहीं मिली, जिसमें कहा गया हो कि 11 अगस्त की रात में भड़की हिंसा 12 अगस्त की सुबह तक चली.

वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि ये तस्वीर सितंबर, 2016 की है कि जब कावेरी जल विवाद को ​लेकर बेंगलुरु में हिंसा हुई थी.

कावेरी जल विवाद काफी पुराना है जो कि तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बीच दशकों से चला आ रहा है. सितंबर, 2016 में दक्षिणी कर्नाटक में व्यापक हिंसा भड़क गई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक से कहा था कि पड़ोसी तमिलनाडु को कावेरी नदी से और ज्यादा पानी दिया जाए.

हमने पाया कि कई मीडिया हाउस ने 2016 में कावेरी मुद्दे पर हुई हिंसा की रिपोर्टिंग करते हुए जलते ट्रक की ये तस्वीर प्रकाशित की थी.

‘ब्लूमबर्ग’ की ​एक रिपोर्ट में भी ये तस्वीर छपी थी, जिसका क्रेडिट एएफपी के फोटो पत्रकार मंजुनाथ किरण और ‘गेटी इमेजेज’ को दिया गया है.

हमने पाया कि ‘गेटी इमेजेज’ के फोटो स्टॉक में भी ये तस्वीर मौजूद है. इस वेबसाइट के मुताबिक ये तस्वीर 12 सितंबर, 2016 को खींची गई थी.

इसके अलावा, जलते हुए ट्रक की ये तस्वीर बेंगलुरु के HSR लेआउट इलाके की है. ये जगह पुलकेशी नगर से करीब 13 किलोमीटर दूर है, जहां 11 अगस्त को हिंसा भड़की थी.

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स्पष्ट है कि जलते हुए ट्रक की तस्वीर 2016 की है जब कावेरी विवाद को लेकर बेंगलुरु में हिंसा भड़की थी. इस तस्वीर का 11 अगस्त को बेंगलुरु के पुलकेशी नगर में हुई हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है.

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

जलते ट्रक की ये तस्वीर 11 अगस्त को बेंगलुरु में हुए दंगे की है, जब भीड़ ने आगजनी की

निष्कर्ष

वायरल तस्वीर 2016 में कावेरी जल विवाद को लेकर बेंगलुरु में हुई हिंसा के दौरान की है. इसका 11 अगस्त को पुलकेशी नगर में हुई हिंसा से कोई संबंध नहीं है.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

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