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बिना लॉकडाउन ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना पर पाया काबू, इस डॉक्टर ने बताया कैसे हुआ मुमकिन

ई-एजेंडा आजतक कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया से डॉ. राजीव आहूजा जुड़े थे. उन्होंने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो आज की तारीख में कोरोना पर यहां काबू पा लिया गया है.

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ऑस्ट्रेलिया में 25 अप्रैल को मात्र 80 कोरोना के मामले सामने आए ऑस्ट्रेलिया में 25 अप्रैल को मात्र 80 कोरोना के मामले सामने आए

  • ई-एजेंडा आजतक में शामिल हुए दुनिया के कई प्रमुख डॉक्टर
  • सब ने माना- कोरोना पर काबू का लॉकडाउन एक मात्र उपाय

जब तक कोरोना वायरस का कोई सटीक इलाज नहीं मिल जाता, तब तक इसे कैसे रोका जाए. क्या लॉकडाउन एक मात्र उपाय है? आजतक के खास कार्यक्रम 'ई-एजेंडा आजतक' में इस मुद्दे पर चर्चा में कई डॉक्टर शामिल हुए, ये सभी भारतीय मूल के विदेशी डॉक्टर्स थे.

ऑस्ट्रेलिया से इस कार्यक्रम में डॉ. राजीव आहूजा जुड़े थे, उन्होंने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया की बात करें तो आज की तारीख में कोरोना पर यहां काबू पा लिया गया है. ऑस्ट्रेलिया में कोरोना से लड़ने के लिए कंप्लीट लॉकडाउन कभी लागू नहीं किया गया. इस महामारी के बीच सभी स्कूल खुले रहे.

आस्ट्रेलिया में सोशल डिस्टेंसिंग पर फोकस

भारतीय मूल के इस डॉक्टर ने विस्तार ने बताया कि कैसे ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना पर अब तक सफलता पाई है, उन्होंने कहा कि यहां की सरकार ने कंप्लीट लॉकडाउन के बजाय सोशल डिस्टेंसिंग को सख्ती से लागू किया. कोरोना के मामले ऑस्ट्रेलिया में सामने आते ही सबसे पहले लोगों के मेल-मिलाप पर रोक लगाया. बाहर दो लोगों से ज्यादा एक जगह जमा नहीं हो सकते, और ये सब कुछ स्टॉर्ट में ही लागू कर दिया गया.

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डॉ. राजीव आहूजा का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोने से लेकर साफ-सफाई पर खास फोकस रहा. उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में कोरोना का पहला मामला 25 जनवरी को सामने आया था, फिर अगले 6 हफ्ते में 80 केस सामने आए. उसके बाद 8 से 29 मार्च के बीच कोरोना तेजी से फैला, सबसे ज्यादा मामले 29 मार्च को सामने आए थे.

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ऑस्ट्रेलिया में कोरोना से महज 0.5 फीसदी मौत

लेकिन उसके बाद फिर तेजी से कोरोना का ग्राफ गिरना शुरू हुआ, और आज की तारीख में कुल 6700 केस हैं. 25 अप्रैल को ऑस्ट्रेलिया में मात्र 80 मामले सामन आए हैं. वहीं अब तक 5,373 लोग ठीक हो चुके हैं. अगर मौत के आंकड़ों को देखें तो साफ पता चलता है कि ऑस्ट्रेलिया ने इस पर काबू पा लिया है. अब तक केवल 80 लोगों की मौत हुई है और ये मात्र 0.5 फीसदी है.

डॉक्टर ने बताया कि किसी भी देश के लिए अभी टेस्टिंग में तेजी बहुत जरूरी है, ऑस्ट्रेलिया में भी शुरुआत में टेस्टिंग कम हो रही थी. लेकिन अब तेजी से हो रही है, अब तक करीब 5 लाख टेस्टिंग हो चुकी है. इनमें से केवल 1.4 फीसदी लोग पॉजिटिव पाए गए हैं.

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कम आबादी ऑस्ट्रेलिया के लिए अच्छी बात

हालांकि उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में अलग-अलग तरह की चुनौतियां हैं. कम आबादी होने की वजह से ऑस्ट्रेलिया में कंप्लीट लॉकडाउन का फैसला नहीं लिया गया और काम कर गया. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया आईलैंड के किनारे है, जिस वजह से सीमाएं सील करना आसान रहा. उन्होंने कहा कि इस महामारी को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने विदेशों से आ रहे लोगों को 14 दिन तक सरकारी खर्च पर क्वारंटीन में रखा.

बीमार लोग सतर्क रहें- आहूजा

डॉ. राजीव आहूजा ने सलाह दी कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर इसे रोका जा सकता है. इसके अलावा 60 साल से ज्यादा उम्र वाले घरों में रहें, साथ ही टेस्टिंग को बढ़ाने पर फोकस होना चाहिए. वहीं जो लोग पहले से बीमार हैं, वो ज्यादा सतर्क रहें. डॉ. राजीव आहूजा ऑस्ट्रेलिया में रदरफोर्ड मेडिकल सेंटर इन मेनलैंड एनएसडब्ल्यू में डॉक्टर हैं.

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वहीं इस कार्यक्रम में न्यूजर्सी से शामिल हुईं डॉ. अंजलि कक्कड़ ने कहा कि इसका अभी कोई इलाज नहीं है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से कोरोना को रोकना एक शुरुआती कदम है. एंटी वायरल ड्रग शुरुआत में काम करता है. लेकिन वेटिंलेटर मरीज पर इसका ज्यादा असर नहीं होता है.

वैक्सीन का ट्रायल जारी

कैलिफोर्निया से कार्यक्रम में जुड़े डॉ. मुनीष लुंबा ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, और टेस्टिंग बढ़ाकर इस पर धीरे-धीरे काबू पाया जा सकता है. वैक्सीन का ट्रायल तेजी से चल रहा है, वैक्सीन का सही रिजल्ट आने में करीब 12 से 18 महीने लग जाएंगे. उन्होंने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी का रिएक्शन खतरनाक हो सकता है. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के भी अच्छे रिजल्ट नहीं मिले हैं.

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