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E-Agenda Aaj Tak: पहले प्लाज्मा डोनर से जानें, कोरोना से ठीक हुए मरीज कैसे कर सकते हैं ये बड़ा दान

आइए आपको मिलवाते हैं पहली प्लाज्मा डोनर स्मृति ठक्कर से. इन्होंने ही सबसे पहले अपने प्लाज्मा का दान किया और कई लोगों की जान बचाई. E-Agenda Aaj Tak कार्यक्रम के सेशन हमने कोरोना को हराया है में स्मृति ठक्कर ने बताई प्लाज्मा डोनेट करनी की पूरी कहानी.

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पहली प्लाज्मा डोनर स्मृति ठक्कर. पहली प्लाज्मा डोनर स्मृति ठक्कर.

  • ठीक मरीज बिना डरे करें प्लाज्मा डोनेट
  • आपके प्लाज्मा से बच सकती है कई की जान

कोरोना वायरस का इलाज पूरी दुनिया खोज रही है. लेकिन अब तक अगर कोई सफल इलाज सामने आया है तो वह है प्लाज्मा थेरेपी. यानी बीमारी से ठीक हुए मरीज के खून से प्लाज्मा लेकर दूसरे बीमार मरीज के शरीर में डाल दो. इससे उसके शरीर में एंटीबॉडी बनेंगे और वह कोरोना के संक्रमण से ठीक हो जाएगा.

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आइए आपको मिलवाते हैं पहली प्लाज्मा डोनर स्मृति ठक्कर से. इन्होंने ही सबसे पहले अपने प्लाज्मा का दान किया और कई लोगों की जान बचाई. E-Agenda Aaj Tak कार्यक्रम के सेशन हमने कोरोना को हराया में स्मृति ठक्कर ने बताई प्लाज्मा डोनेट करनी की पूरी कहानी.

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स्मृति ठक्कर ने बताया कि कोरोना के इलाज के बाद मैं घर पर माता-पिता के साथ थी. मैंने अपने होम आइसोलेशन के 14 दिन का पीरियड भी पूरा कर लिया था. इस बीच, सिविल अस्पताल के डॉक्टर का फोन आया कि वो मेरे खून से प्लाज्मा निकालना चाहते हैं. ताकि बाकी लोगों को इलाज हो सके.

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स्मृति ने बताया कि डॉक्टर्स ने मुझसे कहा कि उन लोगों ने इस काम के लिए अस्पताल का एक कमरा, मशीनें, उपकरण आदि सब सुबह से सैनिटाइज कर रखा है. मुझे किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है. मुझे अस्पताल जाकर सिर्फ अपना प्लाज्मा डोनेट करना है. क्योंकि, अब मैं ठीक हो चुकी हूं और मेरे शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने वाले एंटीबॉडी बन चुके हैं.

smruti-thakkar-1_042520023906.jpgई-एजेंडा आजतक में अपनी कहानी सुनातीं पहली प्लाज्मा डोनर स्मृति ठक्कर.

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स्मृति ने कहा कि डॉक्टर इतने आत्मविश्वास और सकारात्मक तरीके से बोल रहे थे कि मेरे अंदर भी कॉन्फिडेंस आ गया. डॉक्टर्स ने मुझे प्लाज्मा डोनेशन और थेरेपी का पूरा प्रोसेस समझाया. उन्होंने बताया कि कैसे मेरे खून से प्लाज्मा निकालेंगे. क्योंकि मेरे प्लाज्मा में कोरोना से लड़ने वाले एंटीबॉडी हैं. ये एंटीबॉडी दूसरे बीमार मरीज के शरीर में डाले जाएंगे. इससे वो संक्रमण से लड़ सकेगा.

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डॉक्टरों ने बताया कि मुझे सिर्फ दो-तीन घंटे के लिए अस्पताल में रहना है. उसके बाद घर चले आना है. मैंने माता-पिता से पूछा कि क्या करूं तो उन्होंने कहा कि तुरंत जाओ और प्लाज्मा डोनेट करके आओ. इन डॉक्टर्स ने तुम्हें दूसरी जिंदगी दी है. ये तुम्हें खतरे में नहीं डालेंगे.

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स्मृति ने बताया कि इसके बाद मैं अस्पताल गई और मैंने वहां पर अपना प्लाज्मा डोनेट किया. इस समय कोरोना से लड़ने के लिए और लोगों को इसके हमले से बचाने के लिए प्लाज्मा डोनेशन से बड़ा कोई दान नहीं है. इसलिए स्मृति ने लोगों से अपील की है कि जितने भी मरीज ठीक हुए हैं वो ज्यादा से ज्यादा संख्या में जाकर प्लाज्मा डोनेट करें.

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