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लॉकडाउन में कैसे कट रही जिंदगी, हरभजन-रैना ने साझा किए अपने अनुभव

देशव्यापी लॉकडाउन का एक महीना पूरा हो गया है. शनिवार को ई-एजेंडा आजतक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शख्सियतों ने घातक कोरोना वायरस से इस लड़ाई में एकजुटता पर बल दिया.

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सुरेश रैना-हरभजन सिंह (फाइल फोटो) सुरेश रैना-हरभजन सिंह (फाइल फोटो)

  • देशव्यापी लॉकडाउन का एक महीना पूरा
  • 'ई-एजेंडा आजतक' से जुड़े भज्जी और रैना

देशव्यापी लॉकडाउन का एक महीना पूरा हो गया है. शनिवार को 'ई-एजेंडा आजतक' के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शख्सियतों ने घातक कोरोना वायरस से इस लड़ाई में एकजुटता पर बल दिया. इस मौके पर क्रिकेट दिग्गज हरभजन सिंह और सुरेश रैना ने भी लॉकडाउन के दिनों के अनुभव साझा किए.

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39 साल के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह देखने को मिली कि इस संकट की घड़ी में इंसानियत जाग चुकी है. साथ ही उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में घर के अंदर रहते हुए वह बहुत कुछ सीख गए हैं. भज्जी ने कहा, 'हर तरह की दाल-सब्जी बना रहा हूं, घर की सफाई में पूरे नंबर मिल रहे हैं.'

हरभजन ने कहा, 'सभी एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आ रहे हैं. इंसानियत जाग चुकी है, मैंने भी 5000 से ज्यादा परिवारों को राशन उपलब्ध कराया और इसे आगे भी जारी रखूंगा.' उन्होंने कहा, 'इस अदृश्य दुश्मन का पता नहीं, इसलिए घर के अंदर रहिए.'

हरभजन ने कहा कि जानलेवा वायरस से लड़ने के लिए एकजुटता बहुत जरूरी है. टीम इंडिया भी एकजु़ट होकर वर्ल्ड कप जीती थी. उन्होंने कहा, 'जरूरतमंदों की थोड़ी मदद कर दें. कोरोना काल में मैंने जाना कि जिंदगी में सिर्फ पैसा कमाना ही सब कुछ नहीं हैं. और भी बहुत बड़े-बड़े काम हैं, जिन्हें व्यस्तता की वजह से हम तवज्जो नहीं दे पाते हैं.'

हरभजन ने कहा, ' इसानियत जो छुपी हुई थी, वो बाहर आ गई है. करोना को हराने के लिए एकजुटता बहुत जरूरी है. कोई भी मैच टीम के तौर पर जीता जा सकता है. 2011 का वर्ल्ड कप भारतीय टीम ने जीता था, सिर्फ धोनी ने नहीं और न ही युवराज सिंह या सचिन तेंदुलकर ने. इस युद्ध में हमें भारतीय टीम बनकर उतरना होगा.'

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भज्जी के साथ चेन्नई सुपर किंग्स में खेलने वाले 33 साल के धाकड़ बल्लेबाज सुरेश रैना ने कहा कि वह आईपीएल के लिए तैयार थे, लेकिन कोरोना की वजह से चेन्नई सुपर किंग्स के कैंप को रोकना पड़ा.

रैना ने कहा, 'आईपीएल से कई लोगों की रोजी-रोटी चलती है. मेरे फाउंडेशन ने लोगों की मदद की है. इस मुश्किल परिस्थिति में घर में रहकर बहुत आप कुछ कर सकते हैं. मानवता सबसे बड़ी शक्ति है. कोरोना को हराने के बाद सभी ऐसे गले मिलें, जैसा हमने वर्ल्ड कप जीतने के बाद किया था '

रेना ने कहा, 'लॉकडाउन ने दिनों में फैमिली को पूरा समय दे पा रहा हूं. सभी साथ हैं. पुरानी बातें हो रही हैं.' उन्होंने मजेदार बात यह बताई की लॉकडाउन के दिनों में घर में रहने के दौरान उन्होंने वेजिटेबल इतना धोया कि कभी इतना सिर नहीं धोया होगा.

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