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SC में सुशांत-रिया के वकीलों के बीच हुई तीखी बहस, पढ़ें सुनवाई के ये अपडेट्स

महाराष्ट्र सरकार के वकील सिंघवी ने कहा- घटना जहां पर हुई है उस राज्य की सहमति सीबीआई जांच के लिए जरूरी है. अपवाद ये है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से भी सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है लेकिन ऐसा बेहद रेयर केस में होना चाहिए.

सुशांत सिंह राजपूत सुशांत सिंह राजपूत

सुप्रीम कोर्ट में आज 11 अगस्त को सुशांत सिंह राजपूत केस में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में रिया चक्रवर्ती ने याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने केस को बिहार से मुंबई ट्रांसफर करने की अपील की थी. जस्टिस ह्रषिकेश रॉय की बेंच ने सुनवाई की. बिहार सरकार की तरफ से सीनियर एडवकेट मनिंदर सिंह, महाराष्ट्र सरकार की तरफ से एएम सिंघवी, रिया की तरफ से श्याम दिवान और सुशांत सिंह की फैमिली की तरफ से विकास सिंह ने पक्ष रखा.

कोर्ट में रिया के वकील श्याम दीवान ने पटना में दर्ज FIR पर सवाल उठाया. रिया के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, ''बिहार में जो एफआईआर दर्ज हुई है 25 जुलाई को उसे महाराष्ट्र ट्रांसफर करने की मांग है. ज्यूरिस्डिक्शन के मुताबिक इस मांग पर अदालत निर्देश जारी करे. बांद्रा पुलिस स्टेशन में एफआईआर ट्रांसफर की जाए. पटना में FIR दर्ज की जबकि वहां घटना हुई ही नहीं थी. 38 दिनों के देरी से एफआईआर दर्ज कराई गई. अगर मामले का ट्रंसफार पटना से मुंबई नहीं होता तो रिया को इंसाफ नहीं मिल पाएगा.''

''बिहार से चार सदस्यों की पुलिस टीम भी गई. इसके बाद बिहार ने सीबीआई को मामला सौंपने कि मांग भी की और केंद्र ने सौंप भी दिया. बिहार का क्षेत्राधिकार नहीं. 38 दिन के बाद FIR दर्ज करने का औचित्य नहीं. FIR दर्ज होने के पीछे राजनैतिक वजह है. बिहार पुलिस ने एक ऐसे मामले के लिए FIR दर्ज की जिसका पटना से कोई कनेक्शन ही नहीं. बिहार में जो एफआईआर दर्ज हुई वो जीरो एफआईआर है. बिहार पुलिस को खुद एफआईआर ट्रांसफर करनी चाहिए थी. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया जबकि कानून और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए फैसले में जीरो एफआईआर का ट्रांसफर उस क्षेत्र की पुलिस को करना अनिवार्य है जहां घटना हुई है.''

रिया को पसंद नहीं करते सुशांत के पापा- श्याम दीवान

श्याम दीवान ने आगे कहा- सभी ने अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है. महाराष्ट्र, बिहार, सुशान्त के पिता. दीवान ने कहा कि सुशांत के पिता रिया को पसंद नहीं करते हैं. जब वो उनके परिवार से मिलने पटना आई थी तब वो लगातार उन्हें वापस मुंबई जाने के लिए दबाव बना रहे थे. रिया सुशांत से प्यार करती थी. लेकिन अब उन्हें ट्रोल किया जा रहा है. रिया को सोशल मीडिया पर भी रिया ट्रोल किया जा रहा है.

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बिहार की तरफ से कोई देरी नहीं हुई- मनिंदर सिंह

वहीं बिहार सरकार की तरफ से वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने कभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं की. 25 जून के बाद कितने लोगों से पूछताछ की गई? अगर पोर्टमार्टम के बाद आप रिपोर्ट फाइल करके किसी को पूछताछ के लिए बुलाते हैं तो आपको एफआईआर दर्ज करनी होती है. महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि बिहार ने देरी से एफआईआर दर्ज की है. जैसे ही मामले में शिकायत मिली हमने तुरंत एफआईआर दर्ज की. बिहार की तरफ से कोई देरी नहीं हुई है. महाराष्ट्र में एफआईआर दर्ज करने से पूरी तरह इनकार कर दिया गया था. मुंबई पुलिस की तरफ से पूरी तरह से असहयोग किया गया था. कोई दस्तावेज़ साझा नहीं किए गए हैं. आरोप महाराष्ट्र में राजनीतिक वर्ग के खिलाफ है. वे क्या छिपा रहे हैं?

क्या बोली महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र सरकार के वकील एएम सिंघवी ने कहा- बिहार पुलिस का एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर देना गलत. सीबीआई जांच की सिफारिश करना गलत. केंद्र सरकार का सिफारिश मानना गलत. हमारा बिना एफआईआर दर्ज किए जांच करना सही. हमारी जांच के 40 दिनों में 50 लोगों से पूछताछ का नतीजा नहीं आना भी सही.

सिंघवी ने कहा- घटना जहां पर हुई है उस राज्य की सहमति सीबीआई जांच के लिए जरूरी है. अपवाद ये है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से भी सीबीआई जांच का आदेश दे सकता है लेकिन ऐसा बेहद रेयर केस में होना चाहिए. मान लीजिए कल कोई मुंबई में कोई हिट रन केस हो जाए. अगर पीड़ित और आरोपी दोनों ये कहने लगे कि हमें मुंबई पुलिस पंसद नहीं है, जांच केरल या कोई राज्य की पुलिस करे, तब क्या होगा.

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