scorecardresearch
 

खतरे में है मोहम्मद रफी का घर, बेटे को लड़नी पड़ रही कानूनी लड़ाई

शाहिद का कहना है कि कंपनी ने जितने पैसे देने के लिए कहा था उतने दिए ही नहीं. इसी वजह से समझौता निभाया ही नहीं गया.

मोहम्मद रफी मोहम्मद रफी

मुंबई के बांद्रा में सन 1970 में बना रफी मैशन्स खतरे में नजर आ रहा है. मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद रफी अपने पैतृक घर को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक HDFC बैंक ने इमारत की पांचवी मंजिल पर स्थित फ्लैट पर कब्जा मांगा है. बैंक दावा कर रहा है कि मोहम्मद रफी के बेटे शाहिद ने निंबस इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी के साथ फ्लैट बेचने की डील की थी. इस कंपनी ने फ्लैट खरीदने के लिए 4.16 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक जब निंबस इंडस्ट्रीज पैसे वापस नहीं कर पाई तो बैंक ने कोर्ट में संपत्ति पर दावा ठोंका है. वहीं अगर शाहिद का पक्ष देखें तो वह एक पूरी तरह से अलग बात बता रहे हैं. शाहिद का कहना है कि उन्होंने प्रॉपर्टी बेची नहीं थी बल्कि कुछ वक्त के लिए समझौता किया था. शाहिद ने कहा कि फ्लैट की कीमत 5 करोड़ रुपये है और वह निंबस को अपनी प्रॉपर्टी बेचना नहीं चाहते थे बल्कि कुछ पैसों की जरूरत के चलते समझौते पर देना चाहते थे.

शाहिद का कहना है कि कंपनी ने जितने पैसे देने के लिए कहा था उतने दिए ही नहीं. इसी वजह से समझौता निभाया ही नहीं गया. शाहिद ने कोर्ट से भी इस मामले में मदद मांगी लेकिन कोर्ट ने फिलहाल ये कहते हुए किसी भी तरह की मदद करने से इनकार कर दिया कि डील कैंसिल कर दी गई. इससे ये बात तो साफ है कि डील हुई थी. हालांकि डेट रिकवरी ट्राइब्यूनल ने उन्हें स्टे दे दिया है.

इसी घर में रहते थे मोहम्मद रफी-

शाहिद ने भावुक होकर बताया कि उनके नाम पर ये इकलौता घर है. इमारत के साथ उनकी ढेरों यादें जुड़ी हुई हैं. बता दें कि ये वही बंगला है जिसमें मोहम्मद रफी रहा करते थे. वहीं बैंक का दावा है कि निंबस से समझौते में उन्हें सिर्फ 1.95 करोड़ रुपये मिले जबकि समझौते में 3.16 करोड़ रुपये का जिक्र है. बैंक ने बताया कि निंबस के डायरेक्टर ने उनसे कोई भी चेक डिपॉजिट नहीं करने के लिए कहा था.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें