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मनोरंजन

मंझे हुए लेखक भी थे करुणानिधि, रिलीज के बाद बैन हुई थी ये फिल्म

मंझे हुए लेखक भी थे करुणानिधि, रिलीज के बाद बैन हुई थी ये फिल्म
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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविण मुनेत्र कणगम प्रमुख एम. करुणानिधि का मंगलवार शाम को निधन हो गया. वे चेन्नई के कावेरी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थे.
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करुणानिधि पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्हें आधुनिक तमिलनाडु का शिल्पकार भी कहा जाता है. उनका जन्म 3 जून 1924 को हुआ था. उन्होंने बेहद कम उम्र यानी 14 साल की अवस्था में राजनीतिक जीवन शुरू कर दिया था. करुणानिधि राजनीति में आने से पहले फिल्म लेखक थे. बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखी है. इससे पहले उन्होंने कई नाटक और दूसरी किताबें भी लिखी.
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बताया जाता है कि करुणानिधि ने 'द्रविण' राजनीतिक विचारों को अपनी फिल्म 'पराशक्त‍ि' के जरिये आम तमिल जनता तक पहुंचाया. ये फिल्म तमिलनाडु के सिनेमा के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इसने राजनीति पर तो असर डाला ही.

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करुणानिधि ने दर्शकों को दो मंझे हुए सुपरस्टार भी दिए. ये थे 'शिवाजी गणेशन' और 'एसएस राजेंद्रन'.
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इस फिल्म का नेचर लोगों का उकसाने वाला था. इसे देखते हुए कांग्रेस ने फिल्म को बैन करने की मांग की थी.
मंझे हुए लेखक भी थे करुणानिधि, रिलीज के बाद बैन हुई थी ये फिल्म
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राजनीतिक विवादों की वजह से रिलीज के कुछ दिन बाद फिल्म 'पराशक्त‍ि' को बैन कर दिया गया था. बाद में ये फिल्म 1952 में रिलीज की गई. बता दें कि द्रविण राजनीति ब्राह्मणवाद के खिलाफ खड़ी हुई थी. द्रविण राजनीति धार्मिक और जातीय आडम्बर के भी खिलाफ थी.
मंझे हुए लेखक भी थे करुणानिधि, रिलीज के बाद बैन हुई थी ये फिल्म
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फिल्म इस डायलॉग पर काफी बवाल मचा था, "सिर्फ इसलिए कि आप पत्थर के नामों का जप करते हुए आए हैं और फूल चढ़ाते हैं, ये देवता बन जाएगा?"
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करुणानिधि ने 50 से ज्यादा फिल्मों की कहानी लिखी. इसमें ज्यादा कहानियां उनके राजनीतिक विचारों से प्रभावित थीं.