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पुष्पा 'अच्छी' है या नहीं? इस बहस में मत पड़िये, अमेजन प्राइम पर ये 5 दक्षिण भारतीय फिल्में खोजकर देखिये

हम आपको कुछ ऐसी फ़िल्में बता रहे हैं जो कथित 'छोटी फ़िल्मों' की केटेगरी में आयीं और जिनके बारे में लोगों के बीच बहुत बात नहीं हुई. बीते कुछ समय में आयी ये दक्षिण भारतीय फ़िल्में आपको ढूंढ कर देखनी चाहिये. सभी फ़िल्में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद हैं.

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फिल्म सीताराम बिनॉय- एके का पोस्टर फिल्म सीताराम बिनॉय- एके का पोस्टर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बिल्कुल मिस ना करें ये साउथ इंडियन मूवीज
  • अल्लू अर्जुन की पुष्पा ने की जबरदस्त कमाई

बीते कुछ वक़्त में, दक्षिण भारत के सिनेमा को, उम्मीद से कहीं ज़्यादा दर्शक मिले हैं. ये दर्शकवर्ग हिंदी में डब की गयी एक्शन और कॉमेडी फ़िल्मों को टीवी पर देखते हुए बड़ा हुआ और अब ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स के दम पर इसका दायरा और भी बढ़ा है. साउथ की छोटी फ़िल्में, ऐसी फ़िल्में जिनमें ऐसे चेहरे नहीं दिखते जो उत्तर भारत में बहुत पहचाने जाते हैं, ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं. हाल ही में प्राइम वीडियो पर अल्लू अर्जुन की फ़िल्म 'पुष्पा- द राइज़' हिंदी में रिलीज़ हुई जिसे ख़ूब देखा गया. सोशल मीडिया पर फ़िल्म के अच्छे या ख़राब होने का डिस्कशन शुरू हुआ. फ़िल्म अच्छी है या नहीं, इसका कोई तय मानक नहीं है इसलिये इसपर टिप्पणी तो नहीं ही की जा सकती है. लेकिन इस बहस ने इतना तो सुझा ही दिया कि तेलुगु में बनी एक फ़िल्म को अच्छी-खासी मात्रा में हिंदी दर्शक मिल रहे हैं और इसके कॉन्टेंट, मसलों आदि पर आपस में बातचीत चल रही है.

इसी क्रम में हम आपको कुछ ऐसी फ़िल्में बता रहे हैं जो कथित 'छोटी फ़िल्मों' की केटेगरी में आयीं और जिनके बारे में लोगों के बीच बहुत बात नहीं हुई. बीते कुछ समय में आयी ये दक्षिण भारतीय फ़िल्में आपको ढूंढ कर देखनी चाहिये. सभी फ़िल्में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर मौजूद हैं.

1. सीताराम बिनॉय: केस नं. 18

कन्नडा भाषा की ये फ़िल्म एक सीताराम नाम के पुलिसवाले की कहानी दिखाती है जिसका अभी-अभी एक गांव में ट्रांसफ़र हुआ है. वो आता है तो मालूम पड़ता है कि वहां चोरियों की वारदातें ख़ूब हो रही थीं. गांव में आने के साथ ही उसके घर में भी चोरी होती है और यहां से मामला पर्सनल हो जाता है. एक छोटे से गांव में चोरों की तलाश में सीताराम दिन-रात एक कर रहा होता है कि तभी कुछ हत्याओं का मामला सामने आता है. यहां से कहानी में नया मोड़ आता है और फ़िल्म की कहानी चोरों के साथ-साथ सीरियल किलर की तलाश की राह पकड़ लेती है. 

सीताराम बिनॉय: केस नं. 18 मूवी का पोस्टर

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सीताराम के किरदार में ऐक्टर विजय राघवेन्द्र हैं जिनकी ये 50वीं फ़िल्म बतायी जा रही थी. विजय राघवेन्द्र साल 2013 में बिग बॉस का कन्नडा वर्ज़न जीत चुके हैं. 

ये फ़िल्म अमेज़न प्राइम पर उपलब्ध है.

2. हिट: द फ़र्स्ट केस

तेलुगु भाषा की ये फ़िल्म भी मिस्ट्री और थ्रिलर की केटेगरी में आती है. अपेक्षाकृत पुरानी फ़िल्म है जो 2020 में आयी थी. फ़िल्म के केंद्र में है तेलंगाना क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट का विक्रम. विक्रम तेज़ दिमाग़ वाला पुलिसवाला है और क्राइम सॉल्व करने में उसका कोई सानी नहीं है. लेकिन वो मानसिक उथल-पुथल से गुज़र रहा है जिसकी वजह है भूतकाल में घटी एक घटना. इस सब से जूझते हुए विक्रम की गर्लफ्ऱेंड का अपहरण हो जाता है. ये केस एक ऐसे पुलिसवाले के पास पहुंचता है जिसका विक्रम से 36 का आंकड़ा रहता है. वो विक्रम को फंसाने की कोशिश करता है लेकिन विक्रम अपनी ख़ुद की इन्वेस्टिगेशन शुरू करता है.

फ़िल्म सब कुछ बहुत टाइट रखती है और सस्पेंस कहीं भी ढीला नहीं पड़ने देती. विक्रम के रोल में हैं विश्वक सेन. फ़िल्म अमेज़न प्राइम पर मौजूद है और ये जिस जगह ख़तम हुई है, उससे मालूम चलता है कि इसका दूसरा पार्ट भी आएगा. मार्च 2021 में दूसरी क़िस्त की शूटिंग शुरू होने का ऐलान कर दिया गया था.

3. एके - अयप्पनम कोशियम

ये फ़िल्म भी 2020 में आयी थी और मलयालम भाषा में बनायी गयी थी. इसकी कहानी बहुत ही मज़ेदार है. दो लोगों के अहं का टकराव. दोनों के नाम फ़िल्म के टाइटल में हैं - अयप्पन और कोशी. अयप्पन नायर एक्ज पुलिस इंस्पेक्टर है जो पूर्व भारतीय सैनिक कोशी कुरियन को शराब की बोतलों के साथ ऐसे इलाके में पकड़ता है जहां शराब प्रतिबंधित थी. मामला गरमा जाता है और अयप्पन, कोशी को लाकर हवालात में बंद करके उसपर कई धाराएं लगा देता है. यहां से दोनों के बीच एक लड़ाई शुरू होती है जिसमें अयप्पन की नौकरी जाती है और दोनों एक दूसरे का जीवन तबाह करने की कसम उठा लेते हैं. ये फ़िल्म इसी टकराव की कहानी है.

एके - अयप्पनम कोशियम पोस्टर

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फ़िल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन कोशी की भूमिया में और बीजू मेनन अयप्पन की भूमिका में हैं. ये दोनों ही ऐक्टर ख़ासे अनुभवी हैं और फ़िल्म में इनकी टसल देखने वाली है. ये फ़िल्म भी अमेज़न प्राइम पर उपलब्ध है.

4. जोसेफ़

साल 2018 में आयी जोसेफ़ मलयालम भाषा की फ़िल्म है. इसके केंद्र में भी एक पुलिसवाला है जो रिटायर हो चुका है. उसका नाम जोसेफ़ है. रिटायर्ड जोसेफ़ को अभी भी क्राइम सॉल्व करने के लिये बुलाया जाता है. जोसेफ़ अपनी शराब और सूखे नशे की लत को किनारे रख अपराधी को पकड़ता है और फिर शराब के पास पहुंच जाता है. जोसेफ़ की पत्नी स्टेला उसे छोड़कर जा चुकी है. स्टेला की दूसरी शादी होती है पीटर से. पीटर और जोसेफ़ में कोई खटास नहीं है. इसी सब के बीच स्टेला का एक्सीडेंट होता है और उसकी मौत हो जाती है. स्टेला के मरने के बाद जोसेफ़ एक्सीडेंट वाली जगह पर जाता है और उस एक्सीडेंट को समझने की कोशिश करता है. तेज़ दिमाग वाले जोसेफ़ को वारदात वाली जगह पर समझ में आता है कि असल में स्टेला को जानबूझकर मारा गया था और वो एक्सीडेंट नहीं बल्कि मर्डर का शिकार हुई थी. यहां से शुरू होती है जोसेफ़ की अपनी तहकीकात जो उसे एक बहुत बड़े नेटवर्क तक पहुंचाती है और इस केस से हर कोई चौंक जाता है. फ़िल्म में जोसेफ़ के पिछले वक़्त का भी एक अहम् रोल है जो कहानी के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है. 

जोसेफ़ की भूमिका में हैं जोजू जॉर्ज. इस फ़िल्म को 2019 में दिए गए राष्ट्रीय पुरस्कारों में स्पेशल मेंशन मिला था. ये फ़िल्म अमेज़न प्राइम पर मौजूद है.

5. कुरूति

2021 में आयी फ़िल्म कुरूति इस लिस्ट की सबसे तगड़ी फ़िल्म है. मलयालम भाषा की ये फ़िल्म आपको कई दिनों तक जकड़े रहेगी. मनु वारियर की बनायी ये फ़िल्म बदल रहे सामाजिक स्ट्रक्चर की कहानी दिखाती है. तीन पुरुषों के एक मुस्लिम परिवार के घर में एक रात एक पुलिसवाला घुस आता है. उसने एक अपराधी को पकड़ा था लेकिन रात भर उन्हें कहीं रुकने की जगह चाहिये थी. पुलिसवाला जिस लड़के को पकड़कर लाया था, वो सांप्रदायिक हिंसा का आरोपी था. उसने एक मुस्लिम शख्स की हत्या कर दी थी. कानून के उस अपराधी को मारकर बदला लेने के लिये बाहर से कुछ लोग आते हैं. बदला लेने के लिये सबसे आगे वो है, जिसके पिता की हत्या हुई है. ये कहानी इसी टकराव को दिखाती है. इस झमेले में कुछ हिन्दू लोग भी शामिल हो जाते हैं जो उस मुस्लिम परिवार के बेहद क़रीबी थे. रात भर की इस कहानी में सभी समीकरण किस तरह से बदलते हैं, लोगों के असल चेहरे कि तरह से सामने आते हैं, सभी के भीतर किस तरह की लड़ाइयां चल रही होती हैं, ये सारी बातें इस फ़िल्म को बहुत इंटेंस बना देती हैं. फ़िल्म के दौरान आप अपने अंदर चल रहे द्वंद्व को भी महसूस कर पायेंगे.

फ़िल्म अमेज़न प्राइम की ख़ुद की प्रस्तुति है. इस फ़िल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन हैं जो लाइक की भूमिका निभा रहे हैं. लाइक अपने पिता की हत्या का बदला लेने वाला मुस्लिम युवक है. साथ में रोशन मैथ्यू हैं जो इब्राहिम की भूमिका में हैं. इब्राहिम उस मुस्लिम परिवार के केंद्र में हैं जिसमें उनके सिवा सिर्फ़ उनका छोटा भाई और उनके पिता हैं. मुख्य टकराव इब्राहिम और लाइक के बीच है.

 

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