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क्यों शाहरुख खान की बहन बनने को तैयार हो गई थीं ऐश्वर्या राय?

बॉलीवुड में ऑनस्क्रीन बहन का रोल करने को लेकर एक्ट्रेसेज में एक हिचक सी रहती है. कई बार ऐसा हुआ है जब किसी टॉप एक्ट्रेस ने टॉप एक्टर के साथ पर्दे पर बहन का किरदार करने से मना किया है. इसलिए 'जोश' में जब शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय भाई-बहन के रोल में दिखे तो जनता के लिए एक हैरानी की बात थी. इस रोल के लिए ऐश्वर्या क्यों राजी हुईं?

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शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय
शाहरुख खान और ऐश्वर्या राय

हिंदी फिल्मों में भाई बहन के रिश्ते को पर्दे पर काफी सेलेब्रेट किया है. लेकिन जब भी इस रिश्ते या रक्षा बंधन त्यौहार के बात आती है, सबसे पहले दिमाग में देव आनंद और जीनत अमान की फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' याद आ जाती है.

'फूलों का तारों सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है' के बिना भाई-बहन का रिश्ता कुछ अधूरा सा रहता है. मगर क्या आपको पता है कि बहन के जिस रोल ने लोगों को जीनत अमान का नाम हमेशा के लिए याद करवा दिया, उस रोल को पहले कई बार रिजेक्ट किया गया?

रिपोर्ट्स कहती हैं कि देव आनंद ने अपनी बहन का रोल जहीदा हुसैन को ऑफर किया था. लेकिन उन्होंने कहा कि वो बहन से ज्यादा हीरो की लव इंटरेस्ट का रोल करना पसंद करेंगी. 'हरे रामा हरे कृष्णा ' में देव साहब की लव इंटरेस्ट बनीं मुमताज को भी ये रोल ऑफर हुआ तो उन्होंने भी मना कर दिया और दूसरा रोल चुन लिया. 

बहन का रोल करने में हिचकती हैं एक्ट्रेसेज 

बहन का रोल करने में एक्ट्रेसेज की ये हिचक आज भी पाई जाती है. 'प्रेम रतन धन पायो' में सलमान की बहन का रोल करने वालीं स्वरा भास्कर ने कहा था कि उन्हें ये रोल तब मिला जब कोई एक्ट्रेस इसे करने को राजी नहीं हो रही थी. प्रियंका चोपड़ा ने 'दिल धड़कने दो' 

ऐसे में आज से 22 साल पहले जब ऐश्वर्या राय (Aishwarya Rai) ने शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) की बहन का किरदार निभाया तो ये अपने आप में बहुत अनोखी बात थी. साल 2000 में आई 'जोश' (Josh) में ऐश्वर्या ने शाहरुख की बहन का रोल किया और दोनों की भाई-बहन वाली बॉन्डिंग देखकर जनता हैरान थी. लेकिन क्या जब ऐश्वर्या इस रोल के लिए राजी हुईं, तो उन्हें कोई हिचक या डर नहीं था कि कहीं लोगों को एक टॉप एक्ट्रेस का, एक टॉप ऑनस्क्रीन हीरो की बहन बनना पसंद नहीं आया तो? 

कुछ साल पहले एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने इस बात पर डिटेल में बात की थी. सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'बिल्कुल भी नहीं, मैं मंसूर खान (डायरेक्टर) के साथ काम करने के लिए राजी हुई थी. फिल्म में एक समय कास्ट में आमिर और सलमान होने वाले थे. फिर मुझे याद नहीं कितने लोग बदले और आखिरकार शाहरुख और चंद्रचूड़ हो गए.' 

ऐश्वर्या ने क्यों लिया रिस्क 

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे कभी भी ये फिल्म करने से कोई शक नहीं था. मैंने ये फिल्म करने का कमिटमेंट इसलिए किया था क्योंकि मुझे लगा ये नया होगा, ये अलग होगा.' ऐश्वर्या ने फिर अपनी पहली फिल्म 'इरुवर' का नाम लिया जिसकी कहानी अपने आप में डेब्यू करने जा रही एक एक्ट्रेस के हिसाब से काफी अलग थी. 

इसी तरह उन्हें ये सोच भी तोड़नी थी कि स्क्रीन पर भाई-बहन बनने के बाद टॉप हीरो-हिरोइन का करियर नीचे नहीं चला जाता. उन्होंने कहा कि 'ये मजेदार है, इसे बदलना मजेदार है, परसेप्शन बदलना बहुत मजेदार है, जो मैं आजतक कर रही हूं. बतौर एक्टर आपको फ्री रहना चाहिए और अगर ये चल गया तो बहुत अच्छी बात है. लेकिन ये हमेशा नहीं चलता और कई बार परसेप्शन बहुत मजबूत हो सकता है और एक फिल्म के पीछे के आईडिया पर भारी पड़ सकता है.' 

ऐश्वर्या ने इसे एक खुशकिस्मती कहा कि उस समय उनकी ये कोशिश कामयाब हुई. इसका एक सबूत ये भी है कि जून 2000 में रिलीज हुई 'जोश' के कुछ ही महीनों बाद अक्टूबर में 'मोहब्बतें' रिलीज हुई. इस बार शाहरुख-ऐश्वर्या लवर्स के रोल में थे. 

जनता को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा कि पिछली बार उन्होंने भाई-बहन का रोल निभाया था. बल्कि 'मोहब्बतें' बहुत धमाकेदार हिट साबित हुई, और सभी चाहते थे कि इसमें ऐश्वर्या का रोल और लंबा होना चाहिए था.   

 

 

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