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रास्ते में रोती थी और लगा था कि मेरा टाइम खत्म हो गयाः दीपिका सिंह

टीवी शो दीया और बाती से घर-घर में फेमस होने वालीं दीपिका सिंह अब अपने बॉलीवुड डेब्यू को तैयार है. दीपिका फिल्म टीटू अंबानी से अपने इस नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं. फिल्म इसी हफ्ते थिएटर में रिलीज होगी.

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दीपिका सिंह
दीपिका सिंह
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ऑडिशन के वक्त सुनने पड़ते थे ताने
  • टीवी पर भी मिल रहे हैं टाइपकास्ट जैसे किरदार
  • टीटू अंबानी में दीपिका का किरदार है अनोखा

दीपिका सिंह टीवी इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम रही हैं. दीया और बाती शो में संध्या के नाम से घर-घर पहुंचीं दीपिका अब बॉलीवुड में एंट्री के लिए तैयार हैं. दीपिका फिल्म टीटू अंबानी से अपनी ये पारी शुरू करेंगी. हालांकि टीवी से फिल्म तक का सफर दीपिका के लिए आसान नहीं रहा. कभी अपने वजन तो कभी फ्रेश चेहरा न होने के ताने झेल चुकीं दीपिका ने अपनी जर्नी और डेब्यू को लेकर दिल खोलकर बातचीत की.

पति की फिल्म, फैंस का डर भी
दीपिका कहती हैं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं फिल्मों में आऊंगी. कभी इच्छा भी नहीं रही थी. जब आप किसी चीज की प्लानिंग ही नहीं करते हैं, तो टाइम लगा या देरी से डेब्यू किया जैसी बात आती ही नहीं है. फिल्म की कहानी मेरे पति रोहित ने लिखी है. रोहित जब स्क्रिप्ट लेकर जाते थे, तो एक-दो बार मेरा नाम मेकर्स को सजेस्ट भी किया. बहुत से प्रोड्यूसर को पता भी नहीं था कि मैं रोहित की वाइफ भी हूं. कुछ प्रोड्यूसर्स को उनका सुझाव अच्छा भी लगा. पॉजिटिव रिस्पॉन्स जब वहां से मिलने लगे, तो मैंने भी सोचा कि देखते हैं. 

मां अब मदद लेने से इनकार करती है
दीपिका कहती हैं कि हम चाहे कितनी भी बात कर लें बराबरी की लेकिन आज भी बुढ़ापे का सहारा लड़कों को ही माना जाता है. आपकी शादी हो जाए, तो आपके अपने माता-पिता मदद लेने से इनकार कर देते हैं. बस यही मैसेज हमारे इस फिल्म के जरिए देने की कोशिश की जा रही है. शादी के बाद मैं खुद का एक्स्पीरियंस शेयर कर सकती हूं. मेरी मां आज भी कोई गिफ्ट नहीं लेती है. अगर मैं उसे साड़ी भी गिफ्ट करती हूं, तो वो फौरन मेरे ससुराल आकर सासु मां या किसी और को साड़ी देकर वापस देकर जाती हैं. शादी के पहले तो ऐसा नहीं था. अब उन्हें मेरी मदद लेने में हिचक होती है.

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खुद का हेयर व मेकअप कर करती हूं सेविंग्स
अपनी निजी जिंदगी के एक्स्पीरियंस शेयर करते हुए दीपिका बताती हैं, मैं और रोहित हमेशा सेविंग्स पर यकीन रखते आए हैं. मैं तो बहुत बेसिक सी एक्ट्रेस हूं. मैं सोशल मीडिया पर ब्रांड्स प्रमोट कर पैसे कमा लेती हूं. रोहित भी कभी-कभी ऐड्स वगैरह लिखकर अपना खर्चा चला लेते हैं. मेरे तो नखरे भी बहुत कम है. मैं खुद से ही हेयर-मेकअप कर लेती हूं. मैं जानती हूं कि मन का काम करना है, तो निजी जिंदगी में कई सारे एडजस्टमेंट करने पड़ेंगे. सरवाइवल के लिए मुझे अपना खर्च कंट्रोल करना पड़ता है. 
दीपिका कहती हैं कि मैं ईएमआई भरने के लिए कुछ भी काम करने के लिए तो नहीं बनी हूं. इसलिए मैं निजी जिंदगी में छोटे-मोटे खर्चों पर कंट्रोल कर आगे का प्लान करती हूं. हालांकि इसका क्रेडिट रोहित को जाता है. उसने बहुत से पैसे प्रॉपर्टी पर इनवेस्ट किए हैं. जब मैं दीया और बाती शो करती थी, तो कई बार नाइट शिफ्ट लगती थी. फिर मॉर्निंग में जाकर प्रॉपर्टी देखना पड़ता था. इस बात से मुझे रोहित पर बहुत चिढ़ भी आती थी कि मेरा काम सोने के बजाए प्रॉपर्टी देखने में बीतता था. अब उस मेहनत का नतीजा है कि उन इन्वेस्टेंट की वजह से फाइनैंसियल स्टेबिलिटी मिली है.

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लगा बची बचाई इज्जत न खो दूं
दीया और बाती के बाद दीपिका ने टीवी में कुछ समय का गैप लिया था. इसकी वजह भी हैं. दरअसल शो के खत्म होने के बाद भी लोग दीपिका को वैसे ही रोल्स दिया करते थे. वो कहती हैं-वे चाहते थे कि मैं वर्दी वाले रोल करूं, स्ट्रॉन्ग रहूं, लड़ाई करूं, मैं ये ऑफर्स सुन-सुनकर थक गई थी. चलो पैसे की मोह में शोज कर भी लिया, तो पता है कि एक दो महीने बाद मैं खुद ही फ्रस्ट्रेट होने लगूंगी. खुद परेशान हुई, तो मेकर्स भी परेशान हो जाएंगे. फिर जो इज्जत कमाई है, वो भी खो दूंगी. इसलिए मैंने उन शोज को नकार दिया था. 

टीवी वाली हूं कहकर नकारा जाता था

दीपिका ने जब टेलीविजन से इतर वेब शोज या टीवी का सोचा, तो लोग कहने लगे कि टीवी वाली हो, तो नैचुरल कर नहीं पाओगी. लाउड लगोगी,  बड़ी लगती हो, उन्हें उम्र से दोगुने रोल्स के ऑफर मिलने लगे. मोटी हो तो बड़ा रोल कर लो, इस तरह के रोजाना कमेंट्स का सामना करना पड़ा. दीपिका कहती हैं कि मैंने दो साल तक तो एक्टिंग ही छोड़ दी थी. मैंने फोन्स तक उठाने बंद कर दिये थे. मैं रोल्स ऑफर सुनकर चिढ़ जाती थी. मेरा मूड ऑफ हो जाता था. ऐसा होता था कि लोग प्यार से ऑफिस बुलाते थे, मैं भी बन संवर के जाती थी और जब रोल ऑफर किए जाते थे, तो मेरी उम्र से डबल होते थे. कई बार मैं ऑडिशन रूम के बाहर निकल कर रोने लगती थी. मैं रास्ते में रोती थी और लगने लगा था कि शायद मेरा टाइम खत्म हो गया है.

 

 

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