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बिना प्लास्टर वाले घर में कहां से आया नया सोफा जिस पर बैठे अखिलेश यादव? जानें सच्चाई

सैफई तहसील के गीजा गांव में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव डेंगू की वजह से जान गंवाने वाले एक पीड़ित परिवार के घर गए थे. इस दौरान अखिलेश जिस सोफे पर बैठे थे, उस पर सियासत शुरू हो गई है.

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सोफे पर बैठकर पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देते अखिलेश यादव सोफे पर बैठकर पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देते अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी में चल रही सोफे पर राजनीति
  • परिवार ने बताया कहां से आया सोफा

उत्तर प्रदेश में इन दिनों सोफे पर सियासत हो रही है. दरअसल, 3 नवंबर को इटावा की सैफई तहसील के गीजा गांव में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव डेंगू की वजह से जान गंवाने वाले एक पीड़ित परिवार के घर गए थे. इस दौरान अखिलेश जिस सोफे पर बैठे थे, उस पर सियासत शुरू हो गई है. 

सैफई तहसील के अंतर्गत ग्राम गीजा में मुकेश बाथम नाम का परिवार रहता है. मुकेश बाथम के पांच बेटे हैं. मुकेश अपने परिवार को पालने के लिए सैफई के बाजार में एक छोटा सा खाने-पीने का होटल खोले हुए हैं. साथ ही खेती कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं.

मुकेश के चार नंबर के बेटे की शादी 3 महीने पहले हुई थी, उसका 20 तारीख को डेंगू से निधन हो गया, जिसकी जानकारी मिलने पर अखिलेश यादव उसके घर पहुंचे थे.

मुकेश बाथम ने बताया कि उनके दो बेटों की शादी पिछले 4 महीने के अंदर हुई थी, जिसमें एक बेटा की डेंगू से मृत्यु हो गई है, जिस कारण से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव उनके घर हाल-चाल लेने के लिए आए थे और जिस सोफे पर बैठे थे, वह सफेद रंग का सोफा उसी मृतक बेटे की शादी में 3 माह पूर्व उपहार स्वरूप मिला था.

मुकेश बाथम की मानें तो दूसरा ब्राउन कलर का सोफा भी 4 माह पूर्व उनके दूसरे बेटे की शादी में उपहार में मिला था. शादी में मिले दोनों सोफा सेट और वह टेबल वहीं रखी हुई थी, जिस पर अखिलेश यादव वहां बैठे थे. हालांकि मुकेश ने बताया कि गांव में सैकड़ों की संख्या में लोग बीमार है और डेंगू से पीड़ित हैं.

अखिलेश यादव के इसी सोफे वाली तस्वीर पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने निशाना साधा था. यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने तंज कसते हुए कहा था कि जिस घर में प्लास्टर नहीं है वहां पर सोफा कहां से आया.

वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा था कि शहजादे जहां भी जाते हैं अपना सोफा लेकर साथ जाते हैं. इसके बाद सोफे पर भी राजनीति शुरू हो गई थी, लेकिन सच्चाई आजतक ने बताई कि जिस घर में प्लास्टर नहीं है, उस घर में सोफा बेटों की शादी में मिला था.

(रिपोर्ट- अमित तिवारी)

 

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