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यूपी चुनाव: राजभर के मंच पर आज अखिलेश यादव, पूर्वांचल में बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता

ओम प्रकाश राजभर 'महापंचायत' के मंच पर अखिलेश यादव नजर आएंगे. इस दौरान राजभर औपचारिक रूप से सपा के साथ गठबंधन का ऐलान करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्वांचल में अखिलेश-राजभर साथ आकर क्या बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी कर सकेंगे? 

अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अखिलेश-राजभर एक मंच पर आएंगे नजर
  • पूर्वांचल में बीजेपी के लिए सपा बड़ी चुनौती
  • राजभर वोटर तीन दर्जन सीटों पर निर्णयक हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बढ़ती सियासी सरगर्मियों के बीच भारतीय सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के ओम प्रकाश राजभर सपा की साइकिल पर सवार हो गए हैं. बुधवार को मऊ में ओम प्रकाश राजभर 'महापंचायत' के मंच पर अखिलेश यादव नजर आएंगे. इस दौरान राजभर औपचारिक रूप से सपा के साथ गठबंधन का ऐलान करेंगे. ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्वांचल में अखिलेश-राजभर साथ आकर क्या बीजेपी के लिए चुनौती खड़ी कर सकेंगे? 

राजभर के मंच से दूर रहेंगे ओवैसी

राजभर-अखिलेश की साझा रैली सभी की निगाहें लगी है कि क्या इस दौरान भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल बाकी दल भी क्या सपा के साथ आएंगे. हालांकि, मोर्चा में शामिल असदुद्दीन ओवैसी की आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-ए-मुस्लमीन को मऊ रैली में राजभर ने नहीं बुलाया है जबकि बाकी सहयोगी दल के नेता मंच नजर आएंगे. 

एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बयान जारी कर कहा कि मऊ में होने वाले ओम प्रकाश राजभर की पार्टी के स्थापना दिवस के कार्यक्रम के बारे में AIMIM नेतृत्व को कोई जानकारी नहीं है. न ही इस कार्यक्रम के बारे में उनकी पार्टी के किसी नेता को आमंत्रित ही किया गया है. इससे साफ है कि ओवैसी का राजभर से नाता टूट गया है.

पूर्वांचल में राजभर अहम साबित होंगे

पूर्वांचल की कई सीटों पर राजभर का खासा प्रभाव माना जाता है. ऐसे में यहां सपा-सुभासपा गठबंधन को फायदा हो सकता है. इसके अलावा कई सीटों पर जहां ओबीसी वोट बैंक अच्छी संख्या में है वहां हर सीट पर मुस्लिम मतदाता भी अहम है. इन्हें अगर सपा जोड़ने में कामयाब रहती है तो पूर्वांचल में सियासी तौर पर काफी बड़ा उलटफेर हो सकता है. 

बता दें कि अखिलेश यादव ने 2022 के चुनाव में बीजेपी के सियासी फॉर्मूले अपनाकर उसी के खिलाफ इस्तेमाल करने का दांव चला है. 2017 के चुनाव में बीजेपी ने जिस तरह से छोटे दलों के साथ मिलकर सत्ता का वनवास खत्म किया था. पूर्वांचल में खासकर ओम प्रकाश राजभर और अनुप्रिया पटेल की पार्टी बीजेपी के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुई थी. इस बार अखिलेश राजभर को अपने साथ मिलाने में कामयाब रहे.   

पूर्वांचल में सपा का मजबूत गठबंधन

पूर्वांचल में अपने सियासी समीकरण दुरुस्त करने के लिए अखिलेश यादव ने ओमप्रकाश राजभर और संजय चौहान जैसे नेताओं के साथ हाथ मिलाया है. दोनों ही नेताओं का सियासी और जातीय आधार पूर्वांचल के इलाके की सीटों पर है, जिनके सहारे अखिलेश यादव सत्ता में वापसी की उम्मीद लगाए हैं. 

यूपी में राजभर समुदाय भले ही 3 फीसदी के बीच है, लेकिन पूर्वांचल के जिलों में राजभर मतदाताओं की संख्या 12 से 22 फीसदी है. ऐसे ही संजय चौहान की नोनिया समाज की आबादी 1.26 फीसदी है, लेकिन पूर्वाचल में 10 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका में है. ऐसे में सपा के यादव-मुस्लिम के साथ अगर राजभर और नोनिया समाज एकजुट करने में अखिलेश सफल रहे तो बीजेपी के लिए चिंता बढ़ा सकते हैं. 

राजभर की सियासी ताकत

ओम प्रकाश राजभर की सियासी ताकत उनका राजभर समाज है, जो पूर्वांचल के कई जिलों में राजनीतिक समीकरण बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखता है. यूपी में राजभर कुल 3 फीसदी हैं, लेकिन पूर्वांचल के जिलों में 12 से 22 फीसदी के बीच है. गाजीपुर, चंदौली, मऊ, बलिया, देवरिया, आजमगढ़, लालगंज, अंबेडकरनगर, मछलीशहर, जौनपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और भदोही में इनकी अच्छी खासी आबादी है, जो सूबे की करीब चार दर्जन विधानसभा सीटों पर असर रखते हैं. 

ओमप्रकाश राजभर ने 2017 के चुनाव में बीजेपी के साथ मिलकर किस्मत आजमाई, जिसका सियासी फायदा दोनों पार्टियों को मिला था. यूपी की लगभग 22 सीटों पर बीजेपी की जीत में राजभर वोटबैंक बड़ा कारण था जबकि चार सीटों पर ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को जीत मिली थी. बीजेपी के साथ ओमप्रकाश राजभर की दोस्ती 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद टूट गई और अब अखिलेश यादव ने उनके जातीय आधार को देखते हुए हाथ मिला लिया. 

संजय चौहान का सियासी ग्राफ

पूर्वांचल में ओमप्रकाश राजभर ही नहीं, अखिलेश यादव ने संजय चौहान की जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) के साथ भी गठबंधन कर रखा है. पूर्वांचल की 10 से ज्यादा सीटों पर संजय चौहान के नोनिया समाज का वोट है, जो मऊ जिले की सभी सीटों पर  50 हजार अधिक वोटर हैं जबकि गाजीपुर के जखनियां में करीब 70 हजार वोटर हैं. इसी तरह बलिया, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, महराजगंज, चंदौली व बहराइच में भी बड़ी संख्या में उनकी बिरादरी है. 

पूर्वांचल की सियासी ताकत और हर चुनाव में बदलते सियासी समीकरण को देखते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव का पूरा फोकस योगी के गढ़ पूर्वांचल में चुनौती देने पर है. ऐसे जातीय बिसात पर सपा ऐसे-ऐसे मोहरे सेट कर रही है, जिसके जरिए बीजेपी को मात दे सके और सत्ता में एक बार फिर अखिलेश यादव वापसी कर सकें. ऐसे में देखना है कि सपा की उम्मीदों पर राजभर कितने खरे उतरते हैं? 


 

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