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UP: बीजेपी ने अपनी जीती हुई सीटें क्यों अपना दल (S) और निषाद पार्टी को दे दी, क्या सत्ता विरोधी लहर का डर?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी जीती हुई सीटें सहयोगी दलों के दी दी है. अपना दल (S) को मिली 18 सीटों में से चार सीटें बीजेपी ने अपनी जीती हुई दी हैं जबकि निषाद पार्टी को दी गई 14 सीटों में से 4 सीटें पर बीजेपी का कब्जा था. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी की यह रणनीति है या फिर सहयोगी दलों का दबाव?

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बीजेपी यूपी के सहयोगी दल के नेताओं के साथ
बीजेपी यूपी के सहयोगी दल के नेताओं के साथ
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी ने अपनी मजबूत सीटें सहयोगी दलों की दी
  • ओबीसी नेताओं के पार्टी छोड़ने के चलते बीजेपी पर दबाव
  • निषाद पार्टी ने 14 में से सिर्फ एक निषाद को दिया टिकट

उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए बीजेपी हरसंभव कोशिश में जुटी है. सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए बीजेपी ने अपने कई मंत्रियों सहित 50 से ज्यादा विधायकों का टिकट काट चुकी है. ओबीसी के कई दिग्गज नेताओं के पार्टी से जाने के बाद बीजेपी अपने सहयोगी दलों को साधे रखने के लिए अपनी जीती हुई सीटें भी दे दी है. अपना दल (S) और निषाद पार्टी को बीजेपी ने पिछली बार से ज्यादा सीटें दी है, जिसमें अपनी आधा दर्जन से ज्यादा वो सीटें दी हैं, जहां 2017 के चुनाव में उसे जीत मिली थी. 

बीजेपी गठबंधन में इस बार अनुप्रिया पटेल की अपना दल को पिछली बार से ज्यादा सीटें मिल रही हैं. पार्टी ने साल 2017 में 11 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 9 सीटों पर उसे जीत हासिल हुई थी जबकि इस बार 18 सीटें मिली है. वहीं, संजय निषाद की निषाद पार्टी को भी करीब 14 सीटें मिली हैं. हालांकि, बीजेपी ने अपने किसी सहयोगी दलों सीट बंटवारे का औपचारिक एलान नहीं किया गया है.  

बीजेपी ने अपनी सहयोगी अनप्रिया पटेल की अपना दल (एस) को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की घाटमपुर, फर्रुखाबद की कायमगंज, रायबरेली की बछरावां और बहराइच की नानपारा सीटें दी, जहां 2017 में बीजेपी को जीत मिली थी. बछरावां सीट पर पिछले चुनाव में बीजेपी के टिकट पर रामनरेश रावत जीतकर विधायक बने थे, लेकिन यह सीट अपना दल (एस) के खाते में चली गई है. अपना दल (एस) ने इस सीट से लक्ष्मीकांत रावत को प्रत्याशी बनाया है, जो दो बार से प्रधान हैं. 

घाटमपुर विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा के टिकट पर कमल रानी वरुण ने जीती थी, जिनकी कोरोना से मौत हो गई थी. इसके बाद हुए यहां उपचुनाव में बीजेपी उपेंद्र नाथ पासवान विधायक बने थे, लेकिन इस बार यह सीट इस बार अपना दल (एस) के खाते में मिली हैं. अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने इस सीट से बसपा से आए सरोज कुरील को प्रत्याशी बनाया है.

कायमगंज सीट पर बीजेपी के अमर सिंह विधायक थे, लेकिन यह सीट अपना अपना दल (एस) को मिल गई है. कायमगंज सीट पर अपना दल (एस) ने सपा छोड़कर आने वाले डॉ सुरभि को मैदान में उतारा है. 2017 के विधानसभा चुनाव में सुरभि ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के अमर सिंह से हार गईं. इस बार, भाजपा ने अपने सहयोगी के लिए सीट छोड़कर चुनाव लड़ने का विकल्प चुना है. 

बहराइच में नानपारा सीट बीजेपी के टिकट पर माधुरी वर्मा ने जीत दर्ज की थी, लेकिन वो पार्टी छोड़कर सपा में शामिल हो गई है. ऐसे में यह सीट अपना दल के खाते में चली गई है, जहां से राम निवास वर्मा को मैदान में उतारा है. पिछला चुनाव यहां से कांग्रेस लड़ी थी, लेकिन इस बार सपा ने बीजेपी से आई माधुरी वर्मा को प्रत्याशी बनाया है. इस तरह दो कुर्मी नेताओं के बीच मुकाबला है. अपना दल (एस) ने कांग्रेस की दिग्गज नेता नूर बानो के पोते हैदर अली को स्वार टांडा सीट से उम्मीदवार बनाया है. 2017 में यह सीट बीजेपी लड़ी थी. 

निषाद पार्टी ने यूपी की 13 सीटों पर अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, जिसमें बांसडीह सीट से केतकी सिंह, शाहगंज विधानसभा से रमेश सिंह और नौतवा से ऋषि त्रिपाठी को टिकट दिया है. इसके अलावा चौरी चौरा से सरवन निषाद, हंडिया से प्रशांत सिंह राहुल, करछना से पीयूष रंजन निषाद, सैदपुर से सुभाष पासी, मेंहदावल से अनिल कुमार त्रिपाठी, सुल्तानपुर सदर से राज प्रसाद उपाध्याय राजबाबू, कालपी से छोटे सिंह, कटेहरी से अवधेश द्विवेदी, तमकुही राज से डॉ. असीम कुमार, अतरौलिया से प्रशांत सिंह को उम्मीदवार बनाया. 

निषाद पार्टी ने जिन 13 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, उसमें से 4 सीटें पर बीजेपी के विधायक जीतकर आए थे. इसमें चौरी-चौरा सीट से बीजेपी से संगीता यादव, मेंहदावल से राकेश कुमार सिंह, सुल्तानपुर सीट पर सूर्य भान सिंह और कालपी सीट पर नरेंद्र पाल सिंह विधायक थे. बीजेपी की जीती हुई इन चारों सीट पर संजय निषाद ने अपनी निषाद पार्टी से प्रत्याशी उतारे हैं. 

 

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