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Auraiya: 2017 में BJP ने की थी सपा के गढ़ में सेंधमारी, क्या इस बार भी चलेगा दांव?

2012 में औरैया की तीनों विधानसभा सीटें सपा के पास थी, लेकिन 2017 के चुनाव में तीनों सीटों पर बीजेपी ने अपनी जीत दर्ज की. बिधूना विधानसभा सीट से बीजेपी के विनय शाक्य चुनाव जीते थे, जो हाल में सपा में शामिल हो गए हैं.

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Auraiya District Profile Auraiya District Profile
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2017 में तीन सीटों पर जीती थी BJP
  • 2012 में सपा के खाते में तीनों सीटें

Auraiya District Profile: औरैया जिला 1997 में इटावा से काट कर बनाया गया था. इस जिले में दो तहसील हुआ करती थी- औरेया और बिधूना. इसके बाद अजीतमल तहसील बनाई गई. अब अब जिले में तीन तहसील है. औरैया कभी घी की मंडी से पहचानी जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह भी कम होती चली जा रही है.

औरैया जिले में तीन तहसील है. औरैया जिले में तीन विधानसभा है. औरेया सदर, दिवियापुर और बिधूना. समाजवादी पार्टी की सरकार ने औरैया को एक बड़ी सौगात दी थी. यहां प्लास्टिक सिटी बनाने की योजना थी, लेकिन अभी तक यहां कोई भी उद्योग नहीं लग पाया है. इस वजह से लोगों को पलायन करना पड़ता है.

जिले में दो लोकसभा सीटें आती हैं. इटावा और कन्नौज. कन्नौज लोकसभा में बिधूना विधानसभा और इटावा लोकसभा में औरैया सदर और दिवियापुर विधानसभा आती है. जिले के दिवियापुर विधानसभा में गेल (गैस ऑथरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) और NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के यूनिट हैं.

2017 का जनादेश

2012 में औरैया की तीनों विधानसभा सीटें सपा के पास थी, लेकिन 2017 के चुनाव में तीनों सीटों पर बीजेपी ने अपनी जीत दर्ज की. बिधूना विधानसभा सीट से बीजेपी के विनय शाक्य चुनाव जीते थे, जो हाल में सपा में शामिल हो गए हैं. दिवियापुर से बीजेपी के लाखन सिंह जीते, जो योगी सरकार में राज्यमंत्री हैं और औरैया सदर से बीजेपी के ही रमेश दिवाकर जीते थे, जिनकी कोरोना से मौत हो गई थी.

योगी सरकार ने मेडिकल कॉलेज की दी सौगात

अभी 2017 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद जिले को एक मेडिकल कॉलेज, एक 50 बेड का नेत्र अस्पताल और रोडवेज डिपो मिला है. मेडिकल कॉलेज बनने से यहां की जनता को काफी फायदा होगा, जिससे उन्हें कहीं बाहर जाना नहीं पड़ेगा. औरेया जिले की अजीतमल तहसील में बाढ़ का कहर काफी देखने को मिलता है.

दशकों तक रहा था दस्युओं का आतंक

औरैया जिले में सबसे प्रसिद्ध भगवान शंकर का मंदिर जो देवकली के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर की पहचान क्रांतिकारियों से भी की जाती है. जब अंग्रेजों से क्रांतिकारी लड़ाई लड़ते थे, तब रात को मंदिर में बैठ कर योजना बनाते थे. कई दशकों तक इस जिले में दस्युओं का भय हुआ करता था, लेकिन निर्भय गुज्जर के मरने के बाद अब भय खत्म हो गया.

(रिपोर्ट- सूर्य शर्मा)

 

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