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Robertsganj Assembly Seat: चंद्रकांता के शहर में इस बार किसके खाते में जीत?

4 अप्रैल 1989 को सोनभद्र जिला मिर्जापुर से अलग होकर अस्तित्व में आया. उत्तर प्रदेश का ऐसा जिला जो चार प्रदेशों एमपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमाओं से लगता है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • अप्रैल 1989 अस्तित्व में आया सोनभद्र
  • चार विधानसभा में से तीन सीट पर बीजेपी

उत्तर प्रदेश विधानसभा में सोनभद्र जिले की राबर्ट्सगंज विधानसभा सीट की क्रम संख्या 401 है. राबर्ट्सगंज सीट पर किसी भी दल का कब्जा नहीं रहा है. बारी-बारी से यहां सभी प्रमुख दलों को जीत मिली है. एक समय यह सीट अनुसूचित जाति के रिजर्व हुआ करती थी.

मिर्ज़ापुर से अलग होकर सोनभद्र जिला बनने के बाद बाद सबसे ज्यादा (कुल तीन) बार विधायक रहे बीजेपी के तीरथ राज. 2012 से पहले ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. इस सीट पर तीनों पार्टियों की जीत से ये साफ हो जाता है कि यहां का वोटर अलग- अलग राजनीतिक दलों से विधायक चुनता है. सोनभद्र की चार विधानसभा में से तीन सीट बीजेपी और एक अपना दल के पास है.

सामाजिक पृष्ठभूमि
4 अप्रैल 1989 को सोनभद्र जिला मिर्जापुर से अलग होकर अस्तित्व में आया. उत्तर प्रदेश का ऐसा जिला जो चार प्रदेशों एमपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमाओं से लगता है.  कुल जनसंख्या लगभग 18,63500 है, जिनमें पुरुष लगभग 9,7200 और महिला 8,92000 हैं. 

सोनभद्र जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. आर्थिक रूप से देखा जाए तो यहां कोयला, बालू, और पत्थर की खदाने होने से स्थिति काफी अच्छी है. ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यहां विजयगढ़ का किला काफी प्रसिद्ध है, जिसका उल्लेख मशहूर उपन्यास चंद्रकांता में मिलता है. इसके लेखक थे देवकी नंदन खत्री. वहीं एक और किला है अगोरी किला. इस किले से जुड़ी वीर लोरिक की कथाएं काफी प्रचलित हैं.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि
राबर्ट्सगंज विधानसभा में वोटरों की कुल संख्या लगभग 3 लाख 57 हजार हैं. इस सीट पर जातिगत आंकड़ों की बात करें तो सबसे ज्यादा आबादी ब्राह्मण समाज की है और इनकी संख्या लगभग 50 हजार है जबकि दलित (लगभग 45 हजार), वैश्य (लगभग 32 हजार ) और अल्पसंख्यक (लगभग 20 हजार) हैं.

2002 के विधानसभा चुनाव में सपा के परमेश्वर दयाल ने बसपा के रामचंद्र त्यागी को हराया था. 2007 में वोटरों का मन बदला और उन्होंने बसपा के सत्यनारायण जैसल को इस सीट से विधायक बनाया. उन्होंने सपा को हराकर इस सीट पर जीत दर्ज की. 2012 चुनाव में सपा ने अपनी हारी सीट दोबारा पा ली जब सपा के अविनाश कुशवाहा ने बसपा के रमेश सिंह पटेल को इस विधानसभा चुनाव में हरा दिया. 

2017 का जनादेश
2017 के विधानसभा चुनाव में भूपेश चौबे ने निवर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के अविनाश कुशवाहा को लगभग 41000 वोटों से हराया था. पिछले 4 विधानसभा चुनावों की बात करें तो इस सीट पर 2 बार सपा, 1 बार बसपा, और एक बार बीजेपी ने जीत दर्ज किया है.

रिपोर्ट कार्ड
वर्तमान में यह सीट बीजेपी के पास है. विधायक भूपेश चौबे की बात करें तो मूल रूप से सोनभद्र के हीराचक गांव के रहने वाले हैं. साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले विधायक का पुस्तैनी काम कृषि है. स्नातक, एलएलबी तक शिक्षा प्राप्त भूपेश के दो बच्चे हैं जिनमें एक लड़का और एक लड़की है.

 

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