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Nagina assembly seat: इस बार बीजेपी भेद पाएगी सपा के 'पारस' का किला?

नगीना विधानसभा सीट (सुरक्षित) पर मुख्य मुकाबला सपा और बसपा के बीच होता रहा है. साल 2017 के चुनाव में बीजेपी दूसरे स्थान पर रही थी. इस सीट से सपा के मनोज कुमार पारस विधायक हैं.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा और बसपा के बीच रहा है मुख्य मुकाबला
  • 2017 में दूसरे स्थान पर रही थी सत्ताधारी बीजेपी

उत्तर प्रदेश की उत्तरांचल से लगती सीमा पर बिजनौर जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगीना की पहचान काष्ठ कला के लिए हैं. नगीना विधानसभा क्षेत्र में काष्ठ कला की करीब 800 से ज्यादा इकाइयां हैं जिसमें हजारों लोगों को रोजगार मिलता है. काष्ठ कला का टर्नओवर करीब 400 करोड़ सालाना का है. यहां के कारीगर हाथ की नक्काशी से सुंदर, आकर्षक हैंडीक्राफ्ट बनाते हैं जो विदेशों तक अपनी पहचान रखते हैं. नगीना में एक कताई मिल भी है जो साल 2001 से बंद पड़ी है. कोलकाता-जम्मू तवी रेल रूट पर स्थित नगीना में एक रेलवे स्टेशन है जहां से हर रोज करीब दो दर्जन ट्रेन का परिचालन होता है. नगीना विधानसभा एक सुरक्षित सीट है और यह सीट दलितों की राजनीति का मुख्य केंद्र भी है.

साल 2002 के विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी पूर्व मंत्री ओमवती ने बसपा के मनोज पारस को शिकस्त दी थी. साल 2007 के चुनाव में ओमवती ने पाला बदला और बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और सपा में आ गए पारस को फिर पटखनी देकर विधानसभा पहुंच गईं. साल 2012 के विधानसभा चुनाव में मनोज पारस ने ओमवती से हार का बदला ले लिया और सपा के टिकट पर 26 हजार से अधिक वोट के बड़े अंतर से विजयी रहे. तब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लवकुश कुमार तीसरे स्थान पर रहे. अखिलेश यादव ने पारस को जीत का इनाम भी दिया और राज्यमंत्री बना दिया.

नगीना विधानसभा का 2017 का जनादेश

नगीना विधानसभा सीट से साल 2017 के चुनाव में फिर से मनोज पारस और ओमवती आमने-सामने आ गए. इस बार ओमवती ने फिर पाला बदला और वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ीं लेकिन मनोज पारस आठ हजार वोट के अंतर से जीतने में सफल रहे. बसपा उम्मीदवार वीरेंद्र पाल सिंह 49 हजार 693 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे. इसके अलावा ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन की प्रत्याशी नीलम रानी 4385 वोट पाकर चौथे स्थान पर रहीं तो पीस पार्टी के फूल सिंह चौधरी 2541 वोट पाकर पांचवें स्थान पर रहे. राष्ट्रीय लोक दल के प्रत्याशी यादराम सिंह चंदेल को 2113 वोट मिले.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

नगीना विभानसभा सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो इस सीट पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच मुकाबला रहा है. इन दोनों दलों में ही शह और मात का खेल चला है. इस सीट से 1962 में कांग्रेस के गोविंद सहाय, 1967 ओर 1969 में कांगेस के ही अजीजुर्रहमान, 1974 में कांग्रेस की ही गंगादेई विधायक बनीं. नगीना विधानसभा सीट से 1977 में जनता पार्टी के मंगल राम प्रेमी भी विधायक रहे जिनको जमीन से जुड़े ऐसे नेता के तौर पर याद किया जाता है जो जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए हर समय उपलब्ध रहता था.1980 में कांग्रेस के विशन लाल, 1985 में कांग्रेस के ही टिकट पर ओमवती विधायक निर्वाचित हुई थीं.

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इसके बाद से इस सीट पर कांग्रेस का सितारा अस्त हो गया और 1989 में रामेश्वरी देवी और 1991 की बीजेपी की लहर में पार्टी के ओमप्रकाश विधायक रहे. साल 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा के सतीश कुमार ने ओम प्रकाश को पटखनी दे दी. 1996 में बसपा के टिकट पर चुनावी रणभूमि में उतरीं ओमवती विधानसभा पहुंचीं तो 1998 में उन्हें बीजेपी के दलित चेहरे लव कुश कुमार से मात खानी पड़ी. 2002 के चुनाव से इस सीट पर अधिकतर सपा और बसपा के बीच ही मुख्य मुकाबला होता रहा है. पहले ओमवती लगातार दो बार विधायक रहीं तो अब सपा के मनोज कुमार पारस लगातार दूसरी बार विधायक हैं.

सामाजिक ताना-बाना

नगीना सीट के सामाजिक ताने-बाने की बात करें तो इस सीट पर कुल 3 लाख 38 हजार 169 वोटर हैं जिनमें 1 लाख 79 हजार 508 पुरुष और 1 लाख 58 हजार 661 महिला मतदाता हैं. जातिगत आंकड़ों की बात करें तो अनुमान के मुताबिक लगभग 70 हजार दलित, 65 हजार मुस्लिम, 35 से 40 हजार सैनी बिरादरी, 20 से 25 हजार के बीच पाल बिरादरी के वोटर हैं. करीब 10 हजार कुम्हार और 15 हजार के करीब जाट, 10 हजार के करीब वैश्य और 5-5 हजार के करीब ब्राह्मण और पंजाबी वोटर भी इस विधानसभा क्षेत्र में हैं.

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

नगीना सुरक्षित विधानसभा से दूसरी बार विधानसभा पहुंचे मनोज कुमार पारस का जन्म क्षेत्र के गांव बिंजाहेड़ी में एक किसान परिवार में हुआ था. उनकी प्राथमिक शिक्षा रुद्रपुर में हुई थी और उसके बाद उन्होंने गढ़वाल यूनिवर्सिटी से स्नातक किया. मनोज पारस ने अपने चाचा सतीश कुमार से प्रभावित होकर 1993 में राजनीति में प्रवेश किया था और वह जनता दल में शामिल हुए थे लेकिन साल 2000 में वे बसपा में आ गए और पार्टी के टिकट पर नगीना से चुनाव लड़ा. साल 2012 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए पारस को अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए स्टाम्प राज्यमंत्री बना दिया.

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मनोज कुमार पारस के अनुसार उन्होंने इस कार्यकाल में अपने विधानसभा क्षेत्र में 38 से ज्यादा सीसी रोड का निर्माण कराया है और 35 से ज्यादा सड़कों का नवीनीकरण और उनकी मरम्मत कराई है. इसके अलावा एक छोटे पुल का निर्माण भी कराया है जबकि विधानसभा क्षेत्र में आधा दर्जन स्थानों पर यात्री शेड का निर्माण कराने के साथ करीब आठ से नौ जगह हाई मास्क लाइट भी लगवाया है. पारस बताते हैं कि कई काम अभी प्रस्तावित भी हैं.

 

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