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Dadroll Assembly seat: क्या यहां से बीजेपी अपनी जीत फिर से दोहरा पाएगी?

ददरौल विधानसभा (Dadroll assembly seat) का अधिकांश हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है. शाहजहांपुर जिले की अधिकतर बड़ी औद्योगिक इकाइयां इस विधानसभा में स्थापित हैं.

Dadroll assembly seat Dadroll assembly seat
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ददरौल विधानसभा किसान, ठाकुर, ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र
  • 1967 में परिसीमन के बाद यह सीट अस्तित्व में आई
  • कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, अब बीजेपी का कब्जा

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में ददरौल विधानसभा सीट (Dadroll Assembly seat) की क्रम संख्या 136 है. आजादी के बाद हुए पहले विधानसभा आम चुनाव में ददरौल विधानसभा का कोई अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं था, इसे शाहजहांपुर विधानसभा का ही हिस्सा कहा जाता था लेकिन 1967 में हुए परिसीमन के बाद यह विधानसभा सीट अस्तित्व में आ गई. 

ददरौल विधानसभा का अधिकांश हिस्सा औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है. शाहजहांपुर जिले की अधिकतर बड़ी औद्योगिक इकाइयां इस विधानसभा में स्थापित हैं.

सामाजिक तानाबाना
विधानसभा में जिले के सबसे ज्यादा उद्योग स्थापित हैं. साथ में रिलायंस का 1200 मेगावाट का पॉवर प्लांट लगा हुआ है. इसके साथ ही इस विधानसभा क्षेत्र के पिपरोला यूरिया खाद बनाने का एक बहुत बड़ा कारखाना लगा हुआ है जिसकी आधारशिला रखने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी स्वयं यहां आए थे. कभी कांग्रेस का गढ़ कहीं जाने वाली इस विधानसभा में भाजपा ने 2017 के चुनाव में पहली बार परचम लहराया.

ददरौल विधानसभा को किसान, ठाकुर, ब्राह्मण बाहुल्य माना जाता है, लेकिन मुस्लिम मतदाता भी यहां निर्णायक स्थिति में हैं और यहां मतदाता प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि को बहुत महत्व देते हैं. ददरौल विधानसभा में कुल 351640 मतदाता हैं जिसमें पुरुष 191662 और महिला 159978 मतदाता के रूप में हैं.

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राजनीतिक पृष्ठभूमि
ददरौल विधानसभा सीट पर पहले विधायक के रूप में राममूर्ति अंचल को चुना गया जो यहां से दो बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए. उसके बाद गिरजा किशोर मिश्रा और मंसूर अली निर्दलीय विधायक के रूप में चुने गए, वहीं सन 1980 में जनता पार्टी से नाजिर अली विधायक बने. उसके बाद 1985 और 1989 के चुनाव में कांग्रेस के रामौतार मिश्रा विधायक चुने गए.

1991 में जनता दल के टिकट पर देवेंद्र पाल सिंह विधायक रहे. इसके बाद फिर दो बार कांग्रेस के विधायक रामौतार मिश्रा विधायक रहे. जबकि 2002 और 2007 में इस विधानसभा से बसपा के अवधेश वर्मा 2012 में राममूर्ति वर्मा विधायक बने जो कि अखिलेश सरकार में राज्य मंत्री भी रहे. 2017 में पहली बार इस विधानसभा सीट से बीजेपी ने कमल खिलाया और मानवेंद्र सिंह यहां से विधायक बने.

2017 का जनादेश
ददरौल विधानसभा में भाजपा के मानवेंद्र सिंह ने अपने सपा प्रत्याशी राममूर्ति सिंह वर्मा को 17398 मतों से हराया था. मानवेंद्र सिंह को 86435 वोट मिले जबकि राममूर्ति वर्मा को 69037 वोट मिले थे. यहा वोटिंग प्रतिशत 64.9 % रहा.

रिपोर्ट कार्ड
ददरौल विधानसभा से विधायक मानवेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने 60 से ज्यादा सड़कों का लोक निर्माण विभाग के द्वारा निर्माण कराया है जो सड़कें किसी गांव से नहीं जुड़ी थी और कच्ची रास्ता थीं, उसे पक्के मार्गों से गांव से जोड़ दिया गया है और प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत 10 सड़कों का हमारे क्षेत्र में निर्माण कराया गया है. साथ ही बड़े नालों पर 5 पुलों का निर्माण हुआ है और एक गर्रा नदी पर पुल का निर्माण हुआ है.

जबकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण हुआ है जिससे 25-30 गांव को सीधा लाभ मिलेगा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गैस पाइपलाइन का निर्माण विधायक निधि से करवाया है और क्षेत्र में जगह-जगह कैंप लगाए हैं वैक्सीनेशन किया जा रहा है.

 

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