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कोंकणः महाराष्ट्र का वो इकलौता इलाका जहां BJP को पछाड़ देती है शिवसेना

महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी भले ही शिवसेना के बड़े भाई की भूमिका में चुनावी मैदान हो, लेकिन कोंकण इलाके में तो शिवसेना की ही तूती बोलती है. यही वजह है कि शिवसेना कोंकण इलाके में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है. 2014 में कोंकण इलाके की सबसे ज्यादा सीटें शिवसेना जीतने में सफल रही थी.

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे

  • कोंकण की सियासत पर शिवसेना का कब्जा
  • नानर रिफाइनरी पर बीजेपी-शिवसेना में तल्खी
  • कोंकण में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर शिवेसेना

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पश्चिमी तट के साथ लगे कोंकण क्षेत्र का सियासी मिजाज पर सभी की निगाहें हैं. महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी भले ही शिवसेना के बड़े भाई की भूमिका में चुनावी मैदान हो, लेकिन कोंकण इलाके में तो शिवसेना की ही तूती बोलती है. यही वजह है कि शिवसेना कोंकण इलाके में बीजेपी से ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है. ऐसे में देखना है कि इस बार के सियासी संग्राम में शिवेसना अपना दुर्ग बचाए रख पाती है या नहीं?

कोंकण क्षेत्र शिवेसना का गढ़

बता दें कि 2014 के चुनाव में कोंकण रीजन के तहत आने वाली 39 सीटों में से शिवसेना ने सबसे ज्यादा 14 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. वहीं, बीजेपी को 10, कांग्रेस को 1, एनसीपी को 8 और अन्य को 6 सीटें मिली थी. जबकि शिवेसना और बीजेपी अलग-अलग चुनाव लड़ी थी. मोदी लहर के बावजूद शिवसेना ने अपने इलाके में अपने सियासी वर्चस्व को पूरी तरह से बरकरार रखा था.

बीजेपी से ज्यादा सीटों पर शिवेसना

महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में पालघर, ठाणे, रायगढ़, मुंबई, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले आते हैं. कोंकण रीजन में कुल 39 विधानसभा सीटें आती हैं. यह शिवेसना का शुरू से ही मजबूत गढ़ माना जाता है. इस बार के चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के तहत कोंकण इलाके की 25 सीटों पर शिवसेना मैदान में है तो 11 सीटों पर बीजेपी चुनावी ताल ठोक रही है. बीजेपी कोंकण क्षेत्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की तुलना में कम सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

जबकि, कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के तहत कोंकण क्षेत्र की 15 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है तो 24 सीटों पर एनसीपी ने प्रत्याशी उतारे हैं. इस तरह से एनसीपी कोंकण रीजन में कांग्रेस से ज्यादा सीटों पर चुनावी मैदान में उतरी है. दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी बनाम कांग्रेस तो एनसीपी बनाम शिवेसना के बीच ज्यादातर सीटों पर मुकाबला है. 

रिफाइनरी रत्नागिरी बना चुनावी मुद्दा

कोंकण इलाके की नानर रिफाइनरी रत्नागिरी में एक चुनावी मुद्दा बना हुआ है. रत्नागिरी जिले के नानर में प्रस्तावित रिफाइनरी परियोजना का विपक्ष के विरोध करने के चलते शिवसेना और बीजेपी बीच तल्खी का वजह भी रही है. शिवसेना का कहना है कि अरबों रुपये की रिफाइनरी परियोजना से कोंकण की नाजुक पारिस्थितिकी पर बुरा असर पड़ेगा. यही वजह है कि बीजेपी को सियासी मिजाज को समझते हुए यह कहने के लिए मजबूर होना पड़ा है कि नानर रिफाइनरी रत्नागिरी को हटाया जा सकता है.

कोंकण इलाके शिवसेना-बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. विधानसभा चुनाव के पहले विपक्षी दलों के कई नेताओं के पाला बदलने के कारण बीजेपी और शिवसेना की स्थिति मजूबत होती दिख रही है. कोंकण क्षेत्र में सभी आठ नगर निगमों में शिवसेना-भाजपा गठबंधन का कब्जा है. ठाणे, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग  में शिवसेना का दबदबा है. वहीं, भाजपा ने भी 2014 के बाद से ठाणे और पालघर में भी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं.

राणे के जरिए बीजेपी की कोंकण पर नजर

कांग्रेस और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का इस क्षेत्र में जनाधार कम हुआ है. लोकसभा चुनावों के बाद इस क्षेत्र में कांग्रेस-एनसीपी के कई मौजूदा विधायक पाला बदलते हुए बीजेपी या शिवसेना में चले गए है. इन दोनों पार्टियों ने इन बागियों को मैदान में भी उतारा है. बीजेपी की कोंकण इलाके पर पूरी नजर है. यही वजह है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के विरोध के बावजूद बीजेपी ने नारायण राणे को पार्टी में शामिल कराया और उनके बेटे नितेश राणे को मैदान में उतारा है. ऐसे में देखना है कि कोंकण का किला कौन फतह करता है?

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