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हरियाणा से लालू परिवार के लिए अच्‍छी खबर, दामाद को रेवाड़ी से मिली जीत

राजद सुप्रीमो लालू यादव के परिवार के लिए 24 अक्‍टूबर का दिन अच्‍छा रहा. बिहार विधानसभा के उपचुनाव में 2 सीटों पर जीत मिली है तो वहीं हरियाणा से भी खुशखबरी आई है.

रेवाड़ी से लालू यादव के दामाद को जीत मिली रेवाड़ी से लालू यादव के दामाद को जीत मिली

  • लालू यादव के दामाद चिरंजीवी राव को रेवाड़ी में जीत मिली है
  • चिरंजीवी राव ने बीजेपी के सुनील कुमार को 1317 वोट से हराया

बिहार की मुख्‍य विपक्षी पार्टी राजद के मुखिया लालू यादव के परिवार को हरियाणा से अच्‍छी खबर मिली है. दरअसल, लालू यादव के दामाद चिरंजीवी राव को हरियाणा विधानसभा चुनाव में जीत मिली है. चिरंजीवी हरियाणा के रेवाडी से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे. उन्‍होंने बीजेपी के सुनील कुमार को 1317 वोट से हराया.

रेवाड़ी के चुनावी नतीजे

बिहार में भी राजद के लिए अच्‍छी खबर

राजद को बिहार विधानसभा के उपचुनाव में 2 सीटों पर भी जीत मिली है. दरअसल, बिहार विधानसभा के लिए 5 सीटों- बेलहर, दरौंदा, नाथनगर, किशनगंज और सिमरी बख्तियारपुर पर चुनाव हुए थे. इनमें से बेलहर विधानसभा सीट पर आरजेडी के रामदेव यादव ने जेडीयू के लालधारी यादव को हरा दिया है. जबकि सिमरी बख्तियारपुर में आरजेडी कैंडिडेट जफर आलम ने जेडीयू के अरुण कुमार को मात दी है. बता दें कि ये दोनों सीट पहले जेडीयू के कब्‍जे में थी.

बिखराव में भी जीत अहम

महागठबंधन में बिखराव और कमजोर प्रचार के बावजूद आरजेडी दो सीट जीतने में कामयाब हुई है. ऐसे में यही कहा जा सकता है कि उसका वोट बैंक लोकसभा के चुनाव के बाद भी बिखरा नहीं है. जबकि सबकुछ होते हुए भी जेडीयू ने कमजोर रणनीति की वजह से अपनी बढ़त गंवा दी है.

जेडीयू ने इस बार लोकसभा चुनाव में जीते सांसदों को ही अपने उत्तराधिकारी मैदान में उतारने की जिम्मेदारी देकर भारी गलती थी. सिवान की सांसद कविता सिंह ने अपने पति अजय सिंह को अपने बदले दरौंदा से मैदान में उतारा तो वहीं बांका के सांसद गिरधारी लाल यादव ने अपने भाई लालधारी यादव को प्रत्‍याशी बनाया. इन दोनों को जनता ने नकार दिया.

राजनीति के जानकारों का कहना है कि एनडीए को अति आत्मविश्वास की वजह से अपनी सीटें गंवानी पड़ी क्योंकि उन्हें ये लगता है कि बिहार में और कोई विकल्प नहीं है. बहरहाल, जनता ने ये तो बता दिया कि विकल्प की कमी नहीं है. वहीं दूसरी तरफ आरजेडी के लिए भी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं.

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