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Gujarat Assembly Election 2022: पंचमहल जिले की कलोल विधानसभा सीट का जानिए क्या है चुनावी समीकरण

इस चुनावी दौर में हम बात करते हैं, कलोल विधानसभा सीट के बारे में. इस क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है. यहां 2 लाख 33 हजार 693 वोटर हैं. इसमें 1 लाख 20 हजार 398 पुरुष और 1 लाख 12 हजार 300 महिला वोटर हैं. इस क्षेत्र के लोगों की बड़ी समस्या पीने का पानी, सड़क, रोजगार है.

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गुजरात विधानसभा चुनाव (प्रतीकात्मक फोटो)
गुजरात विधानसभा चुनाव (प्रतीकात्मक फोटो)

गुजरात का आदिवासी जिले पंचमहल की कलोल विधानसभा काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है. पिछले  विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के उम्मीदवार बड़े मार्जिन से जीता हासील की थी. 

इस क्षेत्र में 2 लाख 33 हजार 693 वोटर हैं. इसमें 1 लाख 20 हजार 398 पुरुष और 1 लाख 12 हजार 300 महिला वोटर हैं. अगर जाती के तौर पर देखे तो यहां बक्षीपंच- 58 प्रतिशत, एसटी-18 प्रतिशत, एससी- 7 प्रतिशत, पटेल- 5.5 प्रतिशत और राजपूत- 2.8  प्रतिशत है. 

क्षेत्र के लोगों की समस्या 
इस क्षेत्र के लोगों को खासकर बड़ी समस्या पीने का पानी, सड़क, रोजगार है. कई इलाको में तो पीने वाला पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है. इस इलाके में कुछ कंपनियां भी है, लेकिन स्थानीय लोगों को परमानेंट नौकरी नहीं मिल पाती है. 

कलोल विधानसभा की राजकीय स्थिति 
इस क्षेत्र को भाजपा का गढ़ माना जाता है. पिछले चुनाव में भाजपा के सुमनबेन चौहान को 1 लाख 3 हजार 28 वोट मिले थे. वे करीब 50 हजार मतों से जीत हासिल की थी. वहीं, कांग्रेस के प्रत्याशी प्रद्युम्न सिंह परमार को 53 हजार 751 वोट मिले थे. यहां आम आदमी पार्टी स्थानीय रोजगार को मुद्दा बनाकर लोगों को मनाने में जुटी है. दूसरी ओर कांग्रेस भी स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगों के पास जा रही है. अब देखना होगा की 2022 की विधानसभा चुनाव में किसका पलड़ा भारी रहेगा. 

कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में जुटी 
कलोल विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी थी. पांच साल तक लोगों की समस्याओं को सुलझाने हुए सरकार का विरोध कर रही थी. अब चुनाव में आम आदमी पार्टी की एंट्री से कांग्रेस सकते में आ गई है. इसको देखकर कांग्रेस अपना संगठन मजबूत बनाने में जुट गई है. खास कर युवाओं को अपनी ओर खींचने के लिए काफी सभा की गई है. 

भाजपा को जीत का भरोसा
कलोल विधानसभा सीट को हांसिल करने में भाजपा को ज्यादा महेनत नहीं करनी पड़ेगी. ऐसा भाजपा के नेता मान रहे हैं. वहीं, दुसरी ओर आम आदमी पार्टी पिछले दरवाजे से भाजपा के किले में छेद करने में लगी है. स्थानीय मुद्दे को लेकर वह मतदाताओं को मनाने में जुटी है. रोजगारी का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है. इसी पर आम आदमी पार्टी सत्ता पक्ष के खिलाफ लड़ रही है. 

 

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