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सुशांत केस में पटना और मुंबई पुलिस में टकराव, कितना चुनावी है ये दांव?

सुशांत सुसाइड केस को लेकर बिहार में सियासत गर्म है. बिहार की पुलिस और मुंबई की पुलिस आमने-सामने है. सीबीआई जांच की मांग तेज हो रही है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. बिहार में तमाम दल इस मुद्दे को उछाल रहे हैं. जानिए क्या है कारण

सुशांत मामले का हो रहा है राजनीतिकरण? सुशांत मामले का हो रहा है राजनीतिकरण?

  • सुशांत सुसाइड केस में जांच तेज
  • बिहार और मुंबई पुलिस कर रही हैं जांच
  • राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

अक्सर अंतरिक्ष के सितारों की बात करने वाला एक फिल्मी सितारा बॉलीवुड के अपने छोटे से करियर में कामयाबी की चमक बिखेरकर फिर सितारों में गुम हो गया. हम बात कर रहे हैं सुशांत सिंह राजपूत की. 14 जून को जब सुशांत की आत्महत्या की खबर आई थी तो क्या फैंस, क्या सितारे और क्या सियासतदान... सब सन्न रह गए. 34 साल की उम्र, टीवी के पर्दे से लेकर सिनेमा तक सफलता के लगातार कीर्तिमान और उत्साह से लबरेज, ताजगी भरा सौम्य युवा चेहरा. सुशांत की इस खासियत को कौन भूल सकता है भला. ऐसा सितारा सुसाइड कर ले इस बात पर किसी को भरोसा नहीं हो रहा था.

आज डेढ़ महीने बाद मायानगरी मुंबई से 1700 किलोमीटर दूर पटना में इस मुद्दे को लेकर सियासत गर्म है. पटना से लेकर दिल्ली और फिर मुंबई तक बस इसी मुद्दे की चर्चा है. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. बाढ़ और कोरोना की दोहरी मार झेल रहा बिहार चुनाव की ओर बढ़ रहा है लेकिन सुशांत का मामला चुनावी केंद्र बिंदु बन गया है. सब जानना चाहते हैं आखिर क्यों अहम है बिहार के लिए ये मुद्दा, क्यों सभी राजनीतिक दल और नेता इस मुद्दे से खुद को जोड़ते हुए दिख रहे हैं?

'बिहार के बेटे के लिए न्याय की जंग'

बिहार मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार राजेश राज इस मामले को भावनात्मक मानते हैं. उनका कहना है- "सुशांत बिहार के लोगों के लिए खासकर युवाओं के लिए एक रोल मॉडल थे. सुशांत ने बॉलीवुड में बिना गॉडफादर के अपनी जगह बनाई थी. और अब बिहार के लोगों के लिए ये मामला भावनात्मक है. और जहां भावना है वहां सियासत लाजमी है. इसीलिए सभी दल और नेता इस मामले से खुद को जोड़ रहे हैं."

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सभी दल खुलकर आए मैदान में

पहले तेजस्वी यादव और चिराग पासवान ने इस मुद्दे को उठाया और अब बीजेपी भी सीबीआई जांच की मांग कर रही है. यहां तक कि नीतीश कुमार भी सुशांत केस में खुलकर मैदान में आ गए हैं और सीबीआई जांच की तेज होती मांग पर अपना समर्थन जताया है.

नेपोटिज्म पर बिहार से गए बड़े सितारों की चुप्पी पर भी सवाल

राज्य में सियासत गर्म है लेकिन बिहार से बॉलीवुड गए बड़े सितारे चुप हैं. वरिष्ठ पत्रकार राजेश राज कहते हैं- "सुशांत सिंह राजपूत के पास कोई गॉडफादर नहीं था. सोनाक्षी सिन्हा इसलिए बड़ी स्टार हो गईं क्योंकि उनके पिता बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा हैं लेकिन सुशांत ने अपनी काबिलियत, मेहनत और प्रतिभा के बल पर बड़े सितारों को कड़ी टक्कर दी. जिसका नतीजा हुआ कि सुशांत सिंह राजपूत को टारगेट किया गया. लेकिन बिहार से आने वाले बॉलीवुड के तमाम बड़े अभिनेताओं की चुप्पी हैरानी पैदा करती है. प्रकाश झा ,शत्रुघ्न सिन्हा, मनोज बाजपेई, सोनाक्षी सिन्हा, पंकज त्रिपाठी जैसे नामचीन कलाकार चुप हैं, जो कई सवाल खड़े करता है."

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भावनात्मक व जातिगत दोनों तरह से सुशांत को भुनाना चाहती हैं पार्टियां

पटना के पत्रकार संजीत नारायण मिश्रा कहते हैं- "बिहार के चुनावों में हमेशा से जातीय समीकरण अहम रहा है. यूं कहें कि जातीय समीकरण के बिना बिहार में चुनाव असंभव है. राज्य की पार्टियों के लिए सुशांत मामले के राजनीतिकरण से दो तरह के फायदे हैं, पहला भावनात्मक और दूसरा जातिगत. बिहार की जनता अभी सुशांत मामले में एकजुट हो चुकी है, जो पॉलिटिकल पार्टियों के लिए एक बेहतर मौका है. सुशांत राजपूत बिरादरी से आते थे, मतलब राज्य की साढे पांच फीसदी आबादी सीधे-सीधे इसी बहाने कनेक्ट हो जाएगी. और शायद इसलिए राजद नेता तेजस्वी यादव के बाद अब सीएम नीतीश कुमार भी पर्सनली इस मामले में इंटरेस्ट लेने लगे हैं. मतलब जदयू, भाजपा, राजद व लोजपा चारों पार्टियों के लिए अब यह अहम मुद्दा बन गया है."

सुशांत केस को लेकर राजनीतिक दलों के जोर देने के पीछे कारण बिहार का युवा वोटर भी है. सुशांत को बिहार का बेटा बताया जा रहा है, बिहार के युवाओं के लिए सुशांत रोल मॉडल थे. बिहार में युवा वोटरों की आबादी अच्छी खासी है. सिर्फ 18 से 29 साल के एज ग्रुप के ही 24 फीसदी वोटर बिहार में हैं.

समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश?

वैसे सुशांत पर सियासी जंग का एक और पहलू भी दिख रहा है. पटना के पत्रकार संजीत नारायण मिश्रा कहते हैं- "राज्य का एक धड़ा यह मान रहा है कि कोरोना और बाढ़ के मामलों में राज्य सरकार पूरी तरह से फेल्योर साबित हुई है, इसलिए सुशांत के बहाने वोटर्स का मूड अपनी तरफ मोड़ लेने की कोशिश भी इसके पीछे कारण हो सकता है. हालांकि, अब देखना होगा कि सुशांत किस तरह चुनाव में मुद्दा बनते हैं और कौन सी पार्टी इसे सबसे ज्यादा भुना पाती है."

कोरोना संकट और बाढ़ के विकराल होते हालात के बीच बिहार में चुनाव कराने और नहीं कराने को लेकर भी चर्चा तेज है. बीजेपी और जेडीयू जहां अक्टूबर-नवंबर में चुनाव समय पर कराने के पक्ष में दिख रही हैं वहीं आरजेडी-कांग्रेस और यहां तक कि एनडीए की साझेदार एलजेपी भी चुनाव टालने की मांग कर रही हैं. अब देखना होगा चुनाव आयोग का फैसला क्या होता है.

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