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केसरिया विधानसभाः उतार-चढ़ाव वाली सीट, इस बार किसके पक्ष में जाएगी जीत

केसरिया विधानसभा सीट पर 2010 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत का खाता खोलते हुए अपनी पहली जीत दर्ज कराई. हालांकि 2015 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने पिछली हार का बदला लेते हुए वापसी की और दूसरी बार जीत दर्ज की.

2010 में बीजेपी को मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई) 2010 में बीजेपी को मिली थी जीत (सांकेतिक-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को 1962 में मिली पहली जीत
  • कांग्रेस को यहां से 1985 में आखिरी बार जीत मिली
  • 2010 के चुनाव में बीजेपी ने खोला था जीत का खाता

केसरिया विधानसभा सीट की बिहार विधानसभा में सीट क्रम संख्या 15 है. यह विधानसभा क्षेत्र पूर्वी चंपारण जिले में पड़ता है और यह पूर्वी चंपारण (लोकसभा) निर्वाचन क्षेत्र का ही एक हिस्सा भी है. 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद केसरिया विधानसभा सीट में उत्तरी बरियरिया, पश्चिमी मधुबनी, उत्तरी मधुबनी, दक्खिनी मधुबनी, पूर्वी मधुबनी और बरियरिया समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया.

केसरिया विधानसभा सीट पर शुरुआत से लेकर 1995 तक कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का बारी-बारी से कब्जा रहा है. कांग्रेस की प्रभावती गुप्ता ने लगातार 3 बार चुनाव जीतकर इस सीट की शुरुआत की थी. हालांकि लगातार चौथे चुनाव में उन्हें हार मिली और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 1962 में पहली बार यहां से जीत का स्वाद चख लिया.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पीतांबर सिंह भी 3 बार चुनाव जीते. कांग्रेस को आखिरी बार इस सीट से 1985 में जीत मिली थी. इसके बाद वह फिर कभी जीत नहीं सकी. 1990 और 1995 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के यमुना यादव जीते. 2000 में समता पार्टी के अब्दुल्ला जीते. फरवरी 2005 के चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर अब्दुल्ला को फिर से जीत मिली. लेकिन अक्टूबर 2005 में फिर से हुए विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने बाजी मार ली.

2010 में बीजेपी की जीत
2010 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने जीत का खाता खोलते हुए अपनी पहली जीत दर्ज कराई. हालांकि 2015 के चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल ने पिछली हार का बदला लेते हुए वापसी की और दूसरी बार जीत हासिल कर ली.

2015 में हुए विधानसभा चुनाव में केसरिया विधानसभा सीट की बात की जाए तो इस सीट पर कुल 2,40,433 मतदाता थे जिसमें 1,30,528 पुरुष और 1,09,903 महिला मतदाता शामिल थे. 2,40,433 में से 1,32,290 मतदाताओं ने वोट डाले जिसमें 1,29,811 वोट वैध माने गए. इस सीट पर 55% मतदान हुआ था. जबकि नोटा के पक्ष में 2,479 लोगों ने वोट किया था.

7 उम्मीदवार थे मैदान में
केसरिया विधानसभा सीट पर 2015 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के डॉक्टर राजेश कुमार ने जीत हासिल की थी. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 15,947 मतों के अंतर से हराया था. डॉक्टर राजेश कुमार को 47.6% वोट मिले जबकि राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को 35.5% वोट हासिल हुए. इस सीट पर 7 उम्मीदवार मैदान में थे.

विधायक डॉक्टर राजेश कुमार की शिक्षा के बारे में बात करें तो वह ग्रेजुएट हैं और 2015 में दाखिल हलफनामे के अनुसार उन पर 1 आपराधिक केस दर्ज है. उनके पास 1,89,64,645 रुपये की संपत्ति है, जबकि उन पर 9,23,222 रुपये की लाइबिलटीज है.

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