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बड़हरिया विधानसभा: वो निर्दलीय उम्‍मीदवार, जिसने RJD की बढ़ाई टेंशन

राजद ने अपने माई (मुस्लिम और यादव) समीकरण को नजरअंदाज करते हुए ब्राह्मण उम्‍मीदवार बच्‍चा पांडे को टिकट दिया है. अब राजद के इस फैसले से एक बड़े वर्ग में नाराजगी देखने को मिल रही है.

डॉक्‍टर अशरफ अली न‍िर्दलीय उम्‍मीदवार हैं डॉक्‍टर अशरफ अली न‍िर्दलीय उम्‍मीदवार हैं
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जेडीयू ने श्‍याम बहादुर सिंह को उम्‍मीदवार बनाया है
  • राजद की ओर से बच्‍चा पांडे को टिकट दिया गया है
  • अशरफ अली निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं

अकसर सुर्खियों में रहने वाले सीवान के बड़हरिया विधानसभा सीट पर उम्‍मीदवारों की तस्‍वीर साफ हो चुकी है. एनडीए की ओर से ये सीट जेडीयू के खाते में गई है. जेडीयू ने एक बार फिर चर्चित विधायक श्‍याम बहादुर सिंह को उम्‍मीदवार बनाया है. ये वही श्‍याम बहादुर सिंह हैं जिनके बार बालाओं के साथ ठुमके लगाते वीडियो वायरल होते हैं.वहीं, राजद ने अपने माई (मुस्लिम और यादव) समीकरण को नजरअंदाज करते हुए ब्राह्मण उम्‍मीदवार बच्‍चा पांडे को टिकट दिया है. अब राजद के इस फैसले से एक बड़े वर्ग में नाराजगी देखने को मिल रही है.

दरअसल, राजद की ओर से बड़हरिया विधानसभा के लिए डॉक्‍टर अशरफ अली को प्रबल दावेदार माना जा रहा था. लेकिन इसके उलट राजद ने बच्‍चा पांडे को टिकट दिया है. ऐसे में अब अशरफ अली बागी होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं. आपको बता दें कि अशरफ अली पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय से बड़हरिया में प्रैक्टिस कर रहे हैं. विधानसभा क्षेत्र में मुफ्त इलाज और गरीब अस्पताल चलाने की वजह से चर्चित रहते हैं. 

मुश्किल हो सकती है राजद की राह 

बड़हरिया विधानसभा में अशरफ अली के निर्दलीय चुनाव लड़ने से राजद के मुस्लिम वोटर छिटक कर उनके पाले में जा सकते हैं. वहीं, यादव वोटर में भी बच्‍चा पांडे की उम्‍मीदवारी से नाराजगी है. दरअसल, बच्‍चा पांडे 2015 में लोजपा से चुनाव लड़े थे. तब लोजपा और बीजेपी का गठबंधन था जबकि जेडीयू और राजद एक साथ चुनावी मैदान में थे.

बहरहाल, बड़हरिया विधानसभा सीट पर लोजपा उम्‍मीदवार बच्चा पांडे को करारी शिकस्त मिली. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में बच्चा पांडे और उनके भाई पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के भी आरोप लगे थे.

दिलचस्‍प बात ये भी है कि बच्‍चा पांडे के भाई टुन्ना पांडे बीजेपी समर्थित एमएलसी हैं. टुन्‍ना पांडे अपने भाई का खुलकर समर्थन कर रहे हैं. बड़हरिया विधानसभा से रालोसपा की उम्मीदवार वंदना सिंह कुशवाहा के चुनाव लड़ने से भी एनडीए और महागठबंधन, दोनों ही उम्‍मीदवारों की टेंशन बढ़ गई है. बहरहाल, देखना अहम होगा कि इस सीट पर कौन बाजी मारता है.   

बड़हरिया विधानसभा के बारे में
साल 2010 में परिसीमन के बाद बड़हरिया विधानसभा अस्तित्व में आया था. इसके बाद से जेडीयू के श्याम बहादुर सिंह लगातार बड़हरिया से जीत रहे हैं. इससे पूर्व एक बार वे जीरादेई के विधायक भी रह चुके हैं. इस इलाके में मुस्लिम समुदाय के अलावा पिछड़ा वर्ग टर्निंग प्वाइंट साबित होता रहा है.

 

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