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लॉकडाउन: ऑनलाइन क्लासेज ने बढ़ाई डेटा की खपत, मुश्‍क‍िल में पेरेंट्स

कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते 3 मई तक लॉकडाउन घोष‍ित किया गया है. इस बीच बड़ी संख्या में स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेज शुरू की हैं. इन क्लासेज में पढ़ने वाले बच्चों के सामने ही नहीं बल्क‍ि पेरेंट्स के सामने भी कई परेशानियां आ रही हैं. जानें- क्या हैं ये 7 प्रमुख दिक्कतें.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

सरकार ने तीन मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है. ये घोषणा देश को कोरोनावायरस संक्रमण से बचाने के लिहाज से की गई है. इस घोषणा के साथ ही दिल्ली के ज्यादातर निजी स्कूलों ने ऑनलाइन क्लासेज करानी शुरू कर दी हैं. कहने में ये एक अच्छा विकल्प लग रहा है. लेकिन हकीकत इससे एकदम जुदा है.

दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने aajtak.in से बताया कि उनके पास लगातार अभ‍िभावकों की श‍िकायतें आ रही हैं. वो ऑनलाइन क्लासेज से आ रही मुश्किलों से परेशान हैं. उन्होंने बताया कि ज्यादातर पेरेंट्स की श‍िकायतें एक जैसी हैं. पेरेंट्स के सामने सबसे बड़ी मुसीबत इतने ज्यादा डेटा खपत और कनेक्ट‍िव‍िटी देने की है.

वहीं कई अभ‍िभावक स्कूलों द्वारा जबरन फीस मांगने से लेकर बच्चों पर ऑनलाइन क्लास के जरिये होमवर्क का अधि‍क बोझ डालने से परेशान हैं. अपराजिता ने पेरेंट्स ऐसोसिएशन के पास ऑनलाइन क्लासेज से आ रही ऐसी ही कुछ दिक्कतें साझा की हैं. हम यहां वो दिक्कतें रख रहे हैं.

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ये हैं वो दिक्कतें-

1. बच्चों के पास अभी नये सत्र की नई किताबें नहीं आई हैं. इसलिए पढ़ाने के बजाय छात्रों को होमवर्क में लिखने के लिए बहुत सारे पेज दिए जा रहे हैं, कभी-कभी बच्चे पूरे दिन लिखने में व्यस्त रहते हैं. नई नोटबुक के बिना बच्चे विषयवार अलग-अलग नोटबुक को बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं.

2. ऑनलाइन क्लास में नेटवर्क मुख्य मुद्दा है, इससे दोनों छात्रों और शिक्षकों को दोनों को ही कनेक्शन में समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा डेटा की खपत भी पांच गुना ज्यादा बढ़ गई है.

3. शिक्षक बच्चों को पढ़ाते समय बहुत कैजुअल रहते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि स्कूल के अधिकारी या माता-पिता कोई भी उन पर नजर नहीं रख रहा है.

4. वर्किंग पेरेंट्स के सामने ये समस्या है कि जब वो घर से काम कर रहे हैं, तो वे ऑनलाइन कक्षाओं के समय बच्चों को मोबाइल या लैपटॉप कैसे दें. ये समस्या दो बच्चों वाले पेरेंट्स के सामने विशेष रूप से है.

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5. अभ‍िभावकों का ये भी कहना है कि ज्यादातर स्कूल सुबह आठ या नौ बजे से चार-पांच घंटे की कक्षाएं चला रहे हैं. इतनी देर तक कंप्यूटर या मोबाइल की स्क्रीन पर नजरें गड़ाने से बच्चों की आंखों पर बुरा असर पड़ सकता है.

6. स्कूल ज़ूम जैसे एप्लिकेशन से पढ़ा रहे हैं, ऐसे में लोगों के सामने डेटा और क्रेडेंशियल्स को लेकर भी गंभीर खतरा नजर आ रहा है. अभ‍िभावकों का कहना है कि अधिकांश स्कूल एमएचए के आदेश के बाद भी ज़ूम एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे हैं.

7. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ स्कूल फीस का भुगतान नहीं करने पर अभिभावकों को ऑनलाइन कक्षाओं से ब्लॉक/ निष्कासित करने की धमकी दे रहे हैं. अभ‍िभावकों के सामने इसे लेकर भी समस्या आ रही है. जिनके जॉब लॉकडाउन से प्रभावित हुए हैं, वो तीन महीने की फीस एकसाथ नहीं दे सकते.

ये हो सकता है समाधान

अपराजिता कहती हैं कि स्कूलों द्वारा ऑनलाइन क्लास के बहाने बच्चों पर अधि‍क होमवर्क का लोड बिल्कुल कम किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस तरह पेरेंट्स कई घंटों की क्लास में इंटरनेट डेटा पर मोटी रकम खर्च कर रहे हैं, उसके एवज में स्कूलों को फीस में छूट देनी चाहिए. लेकिन ऐसा कहीं नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि क्लासेज का समय भी इतना लंबा नहीं रखना चाहिए. इसके बजाय वो बच्चों को वीड‍ियो भेजकर उनसे ऑनलाइन क्वेरी मंगाकर भी पढ़ाई करा सकते हैं.

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