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देश में चीन-पाक सहित इतने देशों के लाखों शरणार्थी, ऐसे पेश आती है सरकार

भारत में दो लाख से ज्यादा ऐसे शरणार्थी हैं जो तिब्बत, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार में नागरिक संघर्ष और युद्ध के शिकार होकर यहां आए हैं.

प्रतीकात्मक फोटो (Reuters) प्रतीकात्मक फोटो (Reuters)

भारत में दो लाख से ज्यादा ऐसे शरणार्थी हैं जो तिब्बत, बांग्लादेश, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार में नागरिक संघर्ष और युद्ध के शिकार होकर यहां आए हैं. कुछ तिब्बती शरणार्थी जो 1959 और 1962 के बीच आए थे, उन्हें करीब 38 बस्तियों में शरण दी गई थी. इन्हें विशेषाधिकार के तौर पर भारतीय नागरिक को वोट देने का अधिकार दिया गया था.

साल 1980 के दशक में गृहयुद्ध से भागे अफगान शरणार्थी दिल्ली भर की झुग्गियों में रहते हैं. इन्हें भारत में व्यवसाय या काम करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं दिया गया है. भारत में शरणार्थ‍ियों को लेकर नियम की बात करें तो यहां एक बार शरण देने के बाद सरकार दूसरा रास्ता तलाशती रही है. यहां भूमि वितरण और शरणार्थियों को दी जाने वाली सहायता को लेकर जल्द ही जातीय संघर्ष शुरू हो गया. राज्य सरकारों ने भी इसे लेकर काफी संघर्ष किया.

जनसांख्यिकीय परिवर्तन की इसी तरह की आशंका 1990 के दशक में भूटान में नेपाल की आबादी के निष्कासन के कारण हुई. तब एक लाख से ज्यादा लोगों ने भारत से निकलते हुए नेपाल का रास्ता बनाया.

भारत में कितने कहां के शरणार्थी

यूएनएचसीआर (United Nations High Commissioner for Refugees) ने सितंबर 2014 में अनुमान लगाया कि भारत में 109,000 तिब्बती शरणार्थी, 65,700 श्रीलंकाई, 14,300 रोहिंग्या, 10,400 अफगानी, 746 सोमाली और 918 अन्य शरणार्थी हैं. ये वो हैं जो भारत में एजेंसी के साथ पंजीकृत हैं. वहीं 2015 तक केवल 39 सीरियाई शरणार्थी और 20 शरण चाहने वाले पंजीकृत थे.

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