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एकलव्य मॉडल रेजीडेंश‍ियल स्कूलों को विकसित करने का 100 दिन का टारगेट, इन्हें होगा फायदा

सरकार जल्द ही नवोदय विद्यालय के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों को विकसित करने की तैयारी में है. जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस निर्णय के बारे में जानकारी दी. जानें क्या एकलव्य मॉडल स्कूल की यह पहल क्या है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

सरकार जल्द ही नवोदय विद्यालय के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों को विकसित करने की तैयारी में है. जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस निर्णय के बारे में जानकारी दी. जानें क्या एकलव्य मॉडल स्कूल की यह पहल क्या है.

अर्जुन मुंडा ने कहा है कि ये पहल अनुसूचित जनजातियों (आदिवासियों) के कल्याण के लिए है. मंत्रालय ने इसे 100 दिनों के लक्ष्य का हिस्सा बनाया है. उन्होंने बुधवार को एक समारोह में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)  स्कॉलरशिप पोर्टल और एनजीओ ग्रांट्स पोर्टल लॉन्च समारोह में एकलव्य मॉडल स्कूल की घोषणा की.

अर्जुन मुंडा ने राज्य जनजातीय मंत्रालयों और केंद्र में काम करने वाले अधिकारियों से आदिवासियों की भलाई के अन्य कार्य करने की भी अपील की.

बीते साल दिसंबर में इन स्कूलों को मिली थी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 17 दिसंबर 2018 को एकलव्य मॉडल रेजीडेंशियल स्कूल (ईएमआरएस) खोलने को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी.

ये स्कूल 50 प्रतिशत से ज्यादा जनजातीय आबादी वाले इलाकों में खोले जाने थे. ऐसे प्रखंड जहां 20 हजार जनजातीय व्यक्ति हों, वहां भी इन्हें खोला जाना था.

2242 करोड़ में बनाए जाने थे ये स्कूल

समिति ने इस योजना को शुरू करने के लिए वित्‍त वर्ष 2018-19 और वित्‍त वर्ष 2019-20 के दौरान 2242.03 करोड़ रुपये की वित्‍तीय लागत को मंजूरी दी थी.

सरकार ने इन प्वाइंट्स पर दी थी मंजूरी

पहले से स्‍वीकृत एकलव्य स्कूल में प्रति स्‍कूल 5 करोड़ रूपये तक की अधिकतम राशि से इनमें सुधार कार्य होगा. इसके अलावा 163 जनजातीय बहुल जिलों में हर स्कूल में पांच करोड़ रुपये में खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी. रखरखाव के लिए हर पांच साल में 20 लाख रुपये दिए जाएंगे.

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