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HRD मंत्री बोले- CBSE सिलेबस से कुछ टॉपिक हटाने पर खड़ा किया झूठा बखेड़ा

सीबीएसई ने कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 190 विषयों के लिए सिलेबस को केवल 2020-21 सत्र की बोर्ड परीक्षा के लिए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है. बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा में कम किए गए सिलेबस से कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा.

HRD Ramesh Pokhriyal Nishank HRD Ramesh Pokhriyal Nishank

केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने उन आलोचकों पर निशाना साधा है, जिन्होंने कोरोना वायरस की महामारी के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के सिलेबस को कम करने में साजिश का आरोप लगाया था. सीबीएसई ने कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 190 विषयों के लिए सिलेबस को केवल 2020-21 सत्र की बोर्ड परीक्षा के लिए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है. बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा में कम किए गए सिलेबस से कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा.

ऐसे में पोखरियाल ने ट्वीट के जरिए बताया कि, #CBSESyllabus से कुछ विषयों के हट जाने के बाद कई कमेंट्स आए हैं. इन कमेंट्स के साथ समस्या यह है कि वे विषयों को जोड़कर सनसनीखेज का सहारा लेते हैं. उनका कहना है कि CBSE सिलेबस से कुछ विषयों को हटाने को लेकर लोगों ने झूठा बखेड़ा खड़ा किया है.

आपको बता दें, कक्षा 9-12 का सिलेबस 30 प्रतिशत घटाकर सीबीएसई ने मंगलवार को नये करीकुलम के साथ ही डिलीटेड चैप्टर की जानकारी वेबसाइट पर दी थी. इसके बाद इस मामले में नये विवाद ने जन्म ले लिया. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने बुधवार को एकबार फिर हटाए हुए विषयों के बारे में जानकारी दी.

इससे पहले मंगलवार को, सीबीएसई ने 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए 9-12 कक्षा के पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत तक कमी के साथ नये सत्र 2020 21 का रिवाइज्ड करीकुलम जारी किया था. इसमें हटाए गए कुछ अध्याय जैसे धर्मनिरपेक्षता, नागरिकता, राष्ट्रवाद, विमुद्रीकरण, लोकतांत्रिक अधिकारों (secularism, citizenship, nationalism, demonetization, democratic rights.) आद‍ि पर सवाल उठे थे.

ये हैं हटाए गए वो विषय जिन पर उठा विवाद

कक्षा 10 के लिए

democracy and diversity, gender, religion and caste, popular struggles and movement and challenges to democracy.

कक्षा 11 के लिए

federalism, citizenship, nationalism, secularism and growth of local governments in India.

कक्षा 12 के लिए

Pakistan, Myanmar, Bangladesh, Sri Lanka and Nepal, the changing nature of India's economic development, social movements in India and demonetisation, among others

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