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IIT खड़गपुर हेल्थ सेक्टर के 8 प्रोजेक्ट पर कर रहा काम, HRD ने की तारीफ

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने IIT की इस पहल की ट्वि‍टर पर संस्थान के निदेशक वीरेंद्र के तिवारी और उनके शोधकर्ताओं की टीम को बधाई दी है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

IIT खड़गपुर ने COVID-19 से संबंधित रिसर्च एंड डेवलेपमेंट के लिए अनुसंधान निधि की स्थापना की है. संस्थान ने पिछले सप्ताह IIT काउंसिल को प्रोजेक्ट्स की एक लिस्ट सौंपी थी, जिसमें से आठ प्रोजेक्ट काउंसिल ने सेलेक्ट किए हैं.

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर संस्थान के निदेशक वीरेंद्र के तिवारी और उनके शोधकर्ताओं की टीम को इस पहल के लिए बधाई दी है.

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बता दें कि आठ प्रोजेक्ट्स रैपिड डायग्नोस्टिक किट, रियल-टाइम पीसीआर मशीन, कोविड-19 मरीजों के लिए बॉडी सूट, हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए पर्सनल प्रोटेक्टिव उपकरण और स्टेरलाइजर के साथ एकीकृत पोर्टेबल श्रेडर के डिजाइन और डेवेलपमेंट पर शोधकर्ता काम कर रहे हैं. ये सभी प्रोजेक्ट हेल्थ वर्कर्स के लिए फायदेमंद साबित होंगे. इन प्रोजेक्ट में वायरल महामारी से लड़ने के लिए स्वचालित वेंटिलेटर, टेलीमेडिसिन के रूप में अंबु-बैग, टीका और परीक्षण के लिए पुनः संयोजक प्रोटीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन को लेकर यंत्र तैयार हो रहे हैं.

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आईआईटी निदेशक ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा कि समाज में अंतिम व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना हमारी जिम्मेदारी है. हमने परिसर में इमरजेंसी सर्विसेज देने वालों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ त्वरित तकनीकों का निर्माण किया. हम लागत और उत्पाद वितरण अवधि की तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए उनका मूल्यांकन कर रहे थे.

प्रोटोटाइप के विकास की दिशा में आठों प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए 50 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है. इन परियोजनाओं में से अधिकांश के लिए, प्रोटोटाइप तीन से चार सप्ताह की अवधि के भीतर तैयार होने की उम्मीद है, जबकि उनमें से एक को परिणाम देने में लगभग छह महीने लगेंगे.

आईआईटी-खड़गपुर के निदेशक तिवारी ने कहा कि हमारा कैंपस एक मिनी टाउनशिप की तरह है. वर्तमान स्थिति में आवश्यक सेवा प्रदाताओं के लिए स्वच्छता और सुरक्षा प्रोटोकॉल पूरी तरह लागू है. आईआईटी-खड़गपुर के एक सूत्र के अनुसार, लगभग 4,500 छात्र वर्तमान में अपने हॉस्टल में रहते हैं, जबकि लगभग 700 प्रोफेसर हैं जो कैंपस के भीतर अपने आवास में रह रहे हैं.

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