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काबिलियत के बावजूद खो गया कॉन्फिडेंस? हो सकते हैं Gaslighting का शिकार! ऐसे करें पहचान

What is Gaslighting: गैसलाइटिंग का मतलब है मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी से बात करते हुए उसे ऐसा फील करवाना कि वो जो सोच रहे हैं या कर रहे हैं वो गलत है. गैसलाइटिंग का असर अक्सर हमारी पर्सनैलिटी पर नजर आने लगता है. आइए जानते हैं कैसे काम करती है गैसलाइटिंग और क्या होता है इसका असर.

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What is Gaslighting (Representational Image)
What is Gaslighting (Representational Image)

क्या आपने कभी गैसलाइटिंग के बारे में सुना है?  गैसलाइटिंग का मतलब अपने फायदे के लिए दूसरे को भरमाना है. इसका सीधा सा मतलब है, मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी से बात करते हुए उसकी पवित्रता, फैसलों और यादों पर सवाल खड़े करना. अक्सर हमारे जान-पहचान के लोग ही हमें गैसलाइटिंग का शिकार बनाते हैं. जो व्यक्ति गैसलाइटिंग का शिकार होता है, उसका काफी असर उसकी पर्सनैलिटी पर भी पड़ता है. आइए समझते हैं कैसे असर डालती है गैसलाइटिंग और कैसे करें इसकी पहचान. 

दरअसल, जो व्यक्ति गैसलाइटिंग का शिकार होता है, कई बार उसे पता भी नहीं चलता कि उसके आसपास वाले लोगों में से ही कोई उन्हें भरमा रहे हैं. जब तक व्यक्ति को इस बात का अंदाजा होता है तब तक बेहद देर हो चुकी होती है. जो भी व्यक्ति गैसलाइटिंग का शिकार होता है वो अपने विचारों पर ही शक करने लगता है. हर बात के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराने लगता है. गैसलाइटिंग में सामने वाला व्यक्ति आपको इस हद तक भ्रमित करता है कि आपको अपनी ही काबिलियत पर शक होने लगता है. 

कैसे काम करती है गैसलाइटिंग?
जब कोई आपको गैसलाइट कर रहा होता है, तो आप अपनी स्मृतियों, हाल की घटनाओं और धारणाओं का पर ही सवाल करना शुरू कर देते हैं. आपको गैसलाइट करने वाले व्यक्ति के साथ संवाद करने के बाद, आप खोया-खोया महसूस कर सकते हैं और सोच सकते हैं कि आपके साथ कुछ गड़बड़ है. आपको गैसलाइट कर रहा व्यक्ति आपको ये महसूस करवा सकता है कि आप किसी चीज़ के लिए दोषी हैं या आप बहुत संवेदनशील हैं. 

धीरे-धीरे इन सब बातों का असर आपकी पर्सनैलिटी पर भी नजर आने लगता है. आप अपना आत्मविश्वास खो देते हैं. आपके अंदर किसी भी कार्य को करने की हिम्मत नहीं होती. आपको लगता है कि आप जो भी करेंगे वो गलत हो जाएगा. अगर इसपर सही वक्त पर ध्यान न दिया जाए तो ये आपके जीवन में काफी समस्या पैदा कर सकता है. 

कैसे करें पहचान?
अब जब हमें ये पता चल गया है कि गैसलाइटिंग क्या होता है और कैसे इसका असर आपके जीवन पर पड़ता है तो ये भी जानना जरूरी है कि कैसे आप उन लोगों की पहचान करें जो आपको गैसलाइटिंग का शिकार बना रहे हैं. दरअसल, जो व्यक्ति आपको गैसलाइटिंग का शिकार बना रहा होता है, वो हर छोटी-छोटी चीजों के लिए आपको जिम्मेदार ठहराता है.

गैसलाइटिंग से बचाव के लिए इन लोगों से बनाएं दूरी

आपसे झूठ बोलेंगे: गैसलाइट करने वाले व्यक्ति आप अक्सर झूठ बोलते पाए जाएंगे. ये लोग उस वक्त भी सच नहीं बोलेंगे जब आप इन्हें इनके झूठ को पकड़ लेंगे. ये इधर-उधर के बहाने बनाकर अपनी बात को सच साबित करने में लग जाते हैं. कई बार ये आपको ऐसा फील कराएंगे कि जैसा आप बोल रहे हैं, वैसा कुछ हुआ ही नहीं है. 

दूसरों से आपकी बुराई करना: जो व्यक्ति आपको गैसलाइट कर रहा होगा, वो आपके सामने तो आपको काफी सपोर्ट करेगा. लेकिन आपके पीठ पीछे वो व्यक्ति दूसरों से आपकी बुराई करेगा. वहीं, ये व्यक्ति आपको बताएगा कि दूसरे लोग भी ऐसा सोचते हैं कि आपके साथ कुछ गड़बड़ है. 

आपको आपकी फीलिंग्स के बारे में बुरा फील करवाना: जो व्यक्ति आपको गैसलाइट कर रहा होता है, अक्सर आपको आपकी फीलिंग्स के बारे में गलत फील करवाता है. वो आपको अक्सर ये बताएगा कि आप 'ओवर-रिएक्ट' कर रहे हैं. आप जो फील कर रहे हैं, वैसा आपको फील नहीं करना चाहिए. 

हर बात के लिए आपको जिम्मेदार ठहराना: अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हैं जो हर वक्त आपको ही हर चीज़ के लिए जिम्मेदार ठहराता है तो मुमकिन है कि वो व्यक्ति आपको गैसलाइट कर रहा है. अगर सामने वाले व्यक्ति की भी गलती होगी तो भी आपको वो ऐसा फील कराएगा कि आपकी गलती है. इसके लिए वो हर मुमकिन तर्क देगा जिससे आप ये मान लें कि गलती आपकी है. 

आपके साथ प्यारभरे शब्दों का इस्तेमाल: ऐसे लोग अक्सर आपके साथ प्यारभरे शब्दों का इस्तेमाल करेंगे. ये आपको बताएंगे कि ये आपको कितना अच्छा दोस्त मानते हैं और आपको कभी दुखी नहीं कर सकते और अगले ही पल आपको आपकी गलतियां गिनवाने लग जाएंगे. 

इसका क्या होता है असर? 


आप अपनी फीलिंग्स पर सवाल करने लगेंगे: अगर आप लंबे वक्त तक किसी ऐसे की संगत में हैं जो आपको गैसलाइट करता है तो एक वक्त आएगा जहां आप अपनी ही फीलिंग्स पर सवाल उठाने लगेंगे. आपको खुद ही ये लगने लगेगा कि आप हर बात पर ओवर-रिएक्ट कर रहे हैं. 

आप अपने निर्णयों पर सवाल उठाने लगेंगे: आप अपनी बात रखने में बार-बार सोचेंगे. आपको लगने लगेगा कि आप जो सोच रहे हैं वो गलत है. साथ ही, आपको अपने विचार दूसरों के साथ शेयर करने के साथ ही लगने लगेगा कि आपको ये बात नहीं कहनी चाहिए थी. इस वजह से आप खुद के लिए कोई निर्णय भी नहीं ले पाएंगे क्योंकि आपको लगेगा कि आप जो भी निर्णय लेंगे वो आपके लिए सही नहीं होगा. 

आप खुद से निराश होने लगेंगे: आप खुद से ही निराश महसूस करेंगे. आप जो भी काम करेंगे उससे खुश नहीं होंगे. आपको ऐसा लगने लगेगा कि आपमें कुछ भी अच्छा करने की काबिलियत नहीं है. 

 

 

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