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राजस्‍थान में सभी स्‍कूल फीस में 15 फीसदी तक कटौती करें: सुप्रीम कोर्ट

फैसले के मुताबिक, 5-8-2021 से पहले छह समान मासिक किस्तों में अभिभावक फीस का भुगतान करेंगे. अदालत ने कहा कि स्कूल प्रबंधन फीस ना देने के कारण छात्रों को ऑनलाइन या फिजिकल कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोकेंगे.

प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty) प्रतीकात्‍मक फोटो (Getty)

राजस्थान में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्‍वपूर्ण फैसला क‍िया है. सुप्रीम कोर्ट ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को राज्य कानून के तहत निर्धारित वार्षिक फीस जमा करने की अनुमति दी.

अदालत ने कहा कि स्कूलों को शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए छात्रों द्वारा अनुपयोगी सुविधाओं के लिए फीस में 15% कटौती करनी चाहिए. जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की खंडपीठ ने अपने फैसले में का कि स्कूल चाहें तो छात्रों को अधिक रियायत दे सकते हैं.

फैसले के मुताबिक 5-8-2021 से पहले छह समान मासिक किस्तों में अभिभावक फीस का भुगतान करेंगे. अदालत ने कहा कि स्कूल प्रबंधन फीस ना देने के कारण छात्रों को ऑनलाइन या फिजिकल कक्षाओं में भाग लेने से नहीं रोकेंगे. फीस ना दे पाने की स्थिति में स्कूल छात्रों के परीक्षा के परिणाम को नहीं रोकेंगे.

यानी राजस्थान के निजी स्कूलों की अपील को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट का वो फैसला रोक दिया है, जिसमें कुल फीस का 70 फीसद ही ट्यूशन फीस के रूप में लेने के आदेश दिए थे.

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस महेश्वरी की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई. दरअसल, कोरोना महामारी के बीच अभिभावक निजी स्कूलों की फीस माफ कराना चाहते थे. वहीं, स्कूल संचालक ऐसा करने को तैयार नहीं थे. मामला हाई कोर्ट पहुंचा था, हाई कोर्ट ने फैसले में कहा था कि स्कूल संचालक 70 फीसद फीस ही लें.

इस फैसले के खिलाफ निजी स्कूल संचालक सु्प्रीम कोर्ट आए थे और उन्होंने अभिभावकों से पूरी फीस वसूले जाने की अपील की थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अभिभावकों की तरफ से लगाई गई याचिका को भी खारिज कर दिया है. इस फैसले से राजस्थान में लगभग 36,000 निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों और 220 अल्पसंख्यक निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर असर पड़ेगा.

 

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