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18 वर्षीय वेदांत को मिली 1.3 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप, अब अमेरिका में होगी आगे की पढ़ाई

हैदराबाद के वेदांत आनंदवाड़े ने कहा, 'केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी ने 17 नोबेल पुरस्कार विजेताओं को बनाया है, इसलिए अब मैं न्यूरोसाइंस यहीं से करूंगा.' वेदांत की मां विजया लक्ष्मी अनादवड़े ने बेटे की इस उपलब्धि पर गर्व जताया. वह 1.3 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति से बेहद खुश हैं.

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हैदराबाद के 18 वर्षीय छात्र वेदांत आनंदवाड़े हैदराबाद के 18 वर्षीय छात्र वेदांत आनंदवाड़े

हैदराबाद के 18 वर्षीय छात्र वेदांत आनंदवाड़े में विदेश में 1.3 करोड़ रुपये के स्कॉलरशिप हासिल की है. वेदांत अब आगे की पढ़ाई अमेरिका की केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी में करेंगे. ये वही यूनिवर्सिटी है जिसने दुनिया को 17 नोबेल पुरस्कार विजेता दिए हैं. इसी वेदांत भी इसी यूनिवर्सिटी से न्यूरोसाइंस और साइकोलॉजी की पढ़ाई करेंगे. उन्हें प्री मेडिकल अंडरग्रेजुएट स्टडीज में एडमिशन के लिए 1.3 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप दी गई है.

दरअसल, कोरोना वायरस (COVID 19) के दौरान वेदांत 10वीं क्लास की पढ़ाई पूरी की थी, तब उनकी मां ने वेदांत को डेक्सटेरिटी ग्लोबल (Dexterity Global) से परिचय कराया. वेहांद ने न्यू एजेंसी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय हम कॉलेजों और काउंसलर की तलाश कर रहे थे, जो मुझे अपने पसंदीदा कॉलेज में एडमिशन दिलाने में मदद करे. वेदांत ने 16 साल की उम्र में करियर डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए आवेदन किया जो कि तीन महीने का प्रोग्राम है. वेदांत ने एक जलवायु प्रतियोगिता (climate competition challenge) में हिस्सा लिया था.  

मंथली असाइनमेंट में छात्रों को उन अवसरों, प्रतियोगिताओं और क्विज का सिलेक्शन करने के लिए प्रेरित किया, जिनमें उन्हें भाग लेना था. इस तरह डेक्सटेरिटी ग्लोबल की उनकी टीम ने जलवायु प्रतियोगिता चैलेंज को जीत लिया जिसके लिए वह अब नवंबर में पेरिस जाएंगे और यूनेस्को में जूरी के सामने अपने सुझाव रखेंगे.

वेदांत ने कहा, 'केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी ने 17 नोबेल पुरस्कार विजेताओं को बनाया है, इसलिए अब मैं न्यूरोसाइंस यहीं से करूंगा.' उन्होंने ने बताया कि क्लास में दिए गए वीकली असाइनमेंट से उसे आत्मविश्वास और स्वतंत्रता प्राप्त मिली. मंथली असाइनमेंट ने छात्रों को उन अवसरों, प्रतियोगिताओं और क्विज़ का चयन करने के लिए प्रेरित किया, जिनमें उन्हें भाग लेना था. इस तरह डेक्सटेरिटी ग्लोबल की उनकी टीम ने जलवायु पूरी तरह चुनौती को जीत लिया जिसने उनके रिज्यूमे को काफी हद तक बढ़ावा दिया. वेदांत आनंदवाड़े एक सर्जन बनना चाहते हैं.

वेदांत का मानना है कि छात्रों को अपने बेहतर भविष्य के लिए टीचर्स और एक्सपर्ट्स की राय पर ध्यान देना चाहिए. एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा लेना चाहिए. उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि उन्हें एक ऑल-राउंड रिज्यूमे बनाना चाहिए जिसमें एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज भी शामिल हों.

वेदांत की मां विजया लक्ष्मी अनादवड़े ने बेटे की इस उपलब्धि पर गर्व जताया. वह 1.3 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति से खुश हैं. उन्होंने डेक्सटेरिटी को धन्यवाद दिया जिसकी मदद से वेदांत अपने लिए एक अच्छा मंच बनाने में सक्षम हुआ जिसने उसे अपना सीवी अच्छा करने में मदद की ताकि वह छात्रवृत्ति प्राप्त कर सके.

 

 

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