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Gaslighting को चुना गया वर्ड ऑफ द ईयर, जानिए क्या है इसका मतलब

What is Gaslighting: "गैसलाइटिंग" को वर्ड ऑफ द ईयर के रूप में चुना गया है. साल 2022 में इस शब्द को बहुत ज्यादा सर्च किया गया है. लेकिन क्या आपको इस शब्द का अर्थ पता है? आइए जानते हैं क्या है "गैसलाइटिंग".

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What is Gaslighting (Representational Image)
What is Gaslighting (Representational Image)

अमेरिका के सबसे पुराने डिक्शनरी पब्लिशर मेरियम-वेबस्टर ने "गैसलाइटिंग" को वर्ड ऑफ द ईयर के रूप में चुना है. कंपनी के अनुसार, 2022 में वेबसाइट पर इस शब्द की खोज में 1,740% की वृद्धि हुई है. क्या आपको "गैसलाइटिंग" का अर्थ पता है? आइए जानते हैं क्या है इस शब्द का मतलब और कहां से आया ये शब्द. 

क्या है "गैसलाइटिंग" का मतलब?
आसान शब्दों में कहा जाए तो इस गैसलाइटिंग का मतलब अपने फायदे के लिए दूसरे को भरमाना है. यानी किसी के साथ मनोवैज्ञानिक तौर पर इस तरह खेल खेला जाए और उसे धोखे में रखते हुए इस तरह से भ्रमित कर दिया जाए कि पीड़ित शख्स अपने विचारों और खुद की काबिलियत पर संदेह होने लगे. कई लोगों को इस बात का पता भी नहीं चलता कि वो इसका शिकार हो रहे हैं. 

मरियम-वेबस्टर द्वारा इस शब्द की जो परिभाषा दी गई है वो कुछ इस प्रकार है- “Pychological manipulation of a person usually over an extended period of time that causes the victim to question the validity of their own thoughts, perception of reality, or memories and typically leads to confusion, loss of confidence and self-esteem, uncertainty of one’s emotional or mental stability, and a dependency on the perpetrator.” 

इस शब्द का सीधा सा अर्थ है मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी से बात करते हुए उसकी पवित्रता, फैसलों और यादों पर सवाल खड़े करने को कहा गया है.

कहां से आया है "गैसलाइटिंग" शब्द? 
पैट्रिक हैमिल्टन के 1938 के स्टेज प्ले ‘गैस लाइट’ के बाद इसी पर बनी फिल्मों के 1940 -1944 से गैसलाइटिंग शब्द आया. हालांकि, 1960 में "गैसलाइटिंग" बोलचाल की भाषा इस्तेमाल होने लगा. पैट्रिक हैमिल्टन की नॉवेल की कहानी एक ऐसे ही पति के बारे में है जो अपनी पत्नी को ये सोचने पर मजबूर कर देता है कि वो पागल हो रही है. 

गैसलाइटिंग का क्या पड़ता है असर? 
व्यक्ति की  मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य के लिए गैसलाइटिंग के बुरे प्रभाव हो सकते हैं. जो व्यक्ति गैसलाइटिंग का शिकार हो रहा होता है वो धीरे-धीरे अपना आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान खोने लगता है. उसे खुद के विचारों पर भरोसा नहीं रह जाता और वो हर वक्त खुद के फैसलों और विचारों पर सवाल खड़ा करता रहता है. 

 

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