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गुलाम भारत, पहला बजट, हलवा रस्‍म, पढ़ें बजट से जुड़ी ये रोचक बातें

गुलाम भारत में जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक कहते हैं. भारत में पहला बजट 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में जेम्स विल्सन ने ही पेश किया था. यह उन दिनों की बात है जब भारत एक गुलाम देश था. हालांकि इस बजट के दौरान भारतीयों को बोलने तक का अधिकार नहीं था.

व‍ित्‍तमंत्री नि‍र्मला सीतारमण व‍ित्‍तमंत्री नि‍र्मला सीतारमण

जल्द ही देश का बजट आने वाला है. बजट एक तरह से सरकार के खर्च का लेखाजोखा होता है. जानिए बजट से जुड़ी कुछ खास बातें, किसने पेश किया था पहला बजट और क्‍या रही हैं बजट की रस्‍में.

गुलाम भारत में जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक कहते हैं. भारत में पहला बजट 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में जेम्स विल्सन ने ही पेश किया था. यह उन दिनों की बात है जब भारत एक गुलाम देश था. हालांकि इस बजट के दौरान भारतीयों को बोलने तक का अधिकार नहीं था.

स्वतंत्र भारत का पहला बजट
स्वतंत्र भारत का पहला बजट तत्कालीन वित्त मंत्री आर.के. शनमुखम चेट्टी ने नवंबर 26 नवंबर 1947 को पेश किया था. इसमें भारतीय अर्थव्यवस्था की समीक्षा की गई थी और कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया था.

बजट पेश न करने वाले वित्त मंत्री
के.सी. नेगी भारत के ऐसे वित्त मंत्री थे जिन्होंने बजट नहीं पेश किया था. वे केवल 35 दिन तक वित्त मंत्री रहे.

RBI के गवर्नर बने वित्त मंत्री
सी.डी. देशमुख भारत के पहले ऐसे वित्त मंत्री थे, जो मंत्री बनने से पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रह चुके थे. बता दें वह रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर थे.

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जन्मदिन के मौके पर पेश किया बजट
मोरारजी देसाई ने वित्त मंत्री के रूप में सबसे अधिक 10 बार देश का बजट पेश किया. केवल वही एक ऐसे वित्त मंत्री थे, जिन्होंने 1964 और 1968 में दो बार, 29 फरवरी को अपने जन्मदिन के मौके पर बजट पेश किया था.

पीएम पद पर रहते हुए पेश किया बजट
देश के इतिहास में कई पूर्व प्रधान‍मंत्रियों ने पीएम पद पर रहते हुए भी वित्त मंत्री का अतिरिक्त कार्यभार संभालते हुए संसद में बजट को पेश किया. इनमें पंडित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी शामिल हैं.

इन्दिरा गांधी थीं पहली वित्त मंत्री
संसद में बजट प्रस्तुत करने वाली सबसे पहली महिला इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1970 में आपातकाल के दौरान संसद में बजट पेश किया था.

हलवा परोसे जाने की रस्म
देश के आम बजट की प्रिंटिंग की प्रक्रिया हलवा परोसे जाने की रस्म के साथ वर्षों से चली आ रही है. एक बड़ी कड़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्रालय के सभी कर्मचारियों को परोसा जाता है. इसके साथ ही बजट की तैयारियों में लगे अधिकारी और कर्मचारियों को अपने परिवार तक से अलग होकर नॉर्थ ब्लॉक के प्रेस में रहना होता है.

सात दिन कड़ी निगरानी में रहते हैं अधिकारी
बजट पेश किए जाने से सात दिन पहले वित्त मंत्रालय के बजट से जुड़े अधिकारी, विशेषज्ञ, प्रिंटिंग का काम करने वाले तथा अन्य संबंधित लोग दुनिया से अलग होकर नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय के भूतल में स्थित कक्ष में रहकर बजट को अंतिम रूप देते हैं. इस दौरान इन लोगों पर नजर रखने के लिए खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों का दल इनकी आवाजाही पर नजर रखता है.

यहां होती है बजट की प्रिंटिंग
पहले बजट की प्रिंटिंग राष्ट्रपति भवन में होती थी, लेकिन 1950 में बजट लीक हो गया जिसके बाद प्रिंटिंग के काम को मिन्टो रोड स्थित सरकारी प्रेस में भेज दिया गया. 1980 से बजट नॉर्थ ब्लॉक यानी वित्त मंत्रालय में प्रिंट किया जाता है. बजट की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने तक सभी कर्मचारियों को मंत्रालय में ही रोका जाता है.

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