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सोशल साइट पर आपत्तिजनक चीजें दिखाने का मामला, केंद्र सरकार ने जवाब के लिए HC से मांगा समय

कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाब देने के लिए 4 नवंबर तक का वक्त दिया. कोर्ट ने साफ किया कि केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए यह आखिरी मौका दिया जा रहा है.

मामला दिल्ली हाई कोर्ट में है (सांंकेतिक फोटो) मामला दिल्ली हाई कोर्ट में है (सांंकेतिक फोटो)

कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के खतरे से बचाने के लिए लगाई गई के एन गोविंदाचार्य की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार ने हाइकोर्ट से कुछ वक्त और मांगा है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले में अपना जवाब देने के 4 नवंबर तक का वक्त दिया. कोर्ट ने साफ किया कि केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए यह आखिरी मौका दिया जा रहा है.

दरअसल ये याचिका मार्च में लगाई गई थी जिस पर हाईकोर्ट की तरफ से गूगल, फेसबुक, टि्वटर जैसी सोशल मीडिया साइट और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया गया था. सोशल मीडिया साइट की तरफ से इस मामले में सबने अपना जवाब दाखिल कर दिया है, लेकिन केंद्र इस मामले में पिछली कई सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से और समय से मांगता रहा है.

के एन गोविंदाचार्य की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील मेरा गुप्ता ने आजतक को बताया कि सभी सोशल साइट्स ने कोर्ट में दिए अपने जवाब में ये नहीं बताया है कि आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए भारत में इन सोशल साइट की तरफ से किन-किन अधिकारियों को नियुक्त किया गया है. बल्कि इन सोशल साइट्स ने यह बताया है कि वह यह जानकारी कानूनी रूप से देने के लिए बाध्य नहीं है.

सोशल साइट्स ने अपने जवाब में कोर्ट को बताया है कि केंद्र सरकार की तरफ से इनसाइट्स पर निगरानी रखने के लिए नियुक्त किए गए अधिकारी आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए जब भी उन्हें लिखते है, आपत्तिजनक सामग्री को सोशल मीडिया साइट्स से हटा दिया जाता है.

के एन गोविंदाचार्य की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका में  इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसी सोशल मीडिया साइट्स से उन सोशल ग्रुप्स को हटाने की मांग की गई है जिसमें कम उम्र के बच्चों को शामिल किया गया है.

याचिका में बताया गया है कि ये ग्रुप इतने खतरनाक हैं कि कम उम्र के बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं. याचिका में कहा गया है कम उम्र के बच्चे इन सोशल मीडिया साइट का इस्तेमाल कर रहे हैं और बच्चों के खिलाफ कई बार कई अपराध इन सोशल मीडिया साइट्स का इस्तेमाल करके ही किए गए हैं, जिसमें बच्चों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है.

गोविंदाचार्य द्वारा जिस वक्त मार्च में याचिका लगाई गई उस वक्त इंस्टाग्राम पर बने बॉयज लॉकर रूम को लेकर कई सवाल खड़े किए थे. इस ग्रुप में भी कम उम्र के लड़के और लड़कियां आपत्तिजनक बातें करते हुए नजर आए थे.

इसके अलावा कुछ वक्त पहले गुड़गांव में एक महिला को पुलिस ने बच्चों को ड्रग्स की सप्लाई देते हुए गिरफ्तार किया था जो नाबालिग बच्चों को ड्रग्स व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर सप्लाई कर रही थी.

गोविंदाचार्य ने हाईकोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा है कि सोशल मीडिया साइट्स जानबूझकर इन आपत्तिजनक ग्रुप्स को डिलीट नहीं करती हैं क्योंकि इससे उन्हें रेवेन्यू मिलता है. ऐसे में जो भी सोशल मीडिया साइट इस तरह के भड़काऊ, पॉर्नोग्राफी को बढ़ावा देने वाले ग्रुप्स को बंद नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.

साथ ही इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री दिखाने वाले सोशल साइट्स के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत भी सजा दी जानी चाहिए.

 

 

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