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आतंकी हमले के पीड़‍ितों को MBBS-BDS के दाख‍िले में सरकार देगी आरक्षण

एकेडमिक ईयर 2020-21 से उम्मीदवारों को इस कोटे का लाभ मिलेगा. ये सीटें मेडिकल प्रवेश के लिए सीटों के सेंट्रल पूल से निर्धारित होंगी.

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आतंकी हमले के पीड़ितों के पति/पत्नी और बच्चों को अब एमबीबीएस और बीडीएस दाखिले में आरक्षण मिलेगा. यह कदम साल 2020-21 शैक्षणिक वर्ष से लागू होगा. आरक्षित सीटें मेडिकल प्रवेश के लिए सीटों के केंद्रीय पूल से होंगी. ऑल इंडिया रेड‍ियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कथित तौर पर इस संबंध में दिशा-निर्देशों के साथ सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक पत्र लिखा है. 

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इसके जरिये ऐसे लोगों के बच्चों को आरक्षण मिलेगा जो आतंकी हमले का शिकार हुए हैं. साथ में उन्हें भी जो कि आतंकवादी संगठनों की 'हिट लिस्ट' में आए हैं. इसके अलावा ऐसे परिवारों के बच्चे हैं, जो आतंक के कारण कश्मीर से पलायन हुआ है. इसमें वो लोग भी शामिल हैं जो वर्तमान स्थिति और अपने व्यवसाय, संप‍त्त‍ियों सहित अपनी आजीविका के साधन खो चुके हैं. 

एमबीबीएस- बीडीएस सीटों के केंद्रीय पूल के लाभार्थियों में वे राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश शामिल हैं जहां चिकित्सा शिक्षा में कमी है. इस आरक्षण का लाभ ऐसे परिवारों के बच्चों को मिलेगा, जिनके माता-पिता में से परिवार का कोई सदस्य आतंकवाद के कृत्य में मारा गया हो. इसके लाभार्थी वो भी होंगे जो जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के संघ शासित प्रदेशों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सशस्त्र बलों द्वारा फायरिंग या गोलीबारी का श‍िकार हुए हों. 

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) या मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा निर्धारित अन्य योग्यता परीक्षा पास करने वाले योग्य अभ्यर्थ‍ियों को इसका लाभ मिलेगा. बता दें क‍ि NEET परीक्षा पूरे देश में 13 सितंबर को आयोजित की गई थी जिसमें 15.9 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन किया था. NEET को क्लियर करने वाले अभ्यर्थ‍ियों को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी MBBS या BDS पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के पात्र होते हैं.

 

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