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UP: सिर पर था लाखों का कर्ज, किसान ने फांसी लगाकर दी जान

किसान की पत्नी ने कहा है कि बैंक वाले घर कुर्क करने की धमकी दे रहे थे, जिससे तंग आकर किसान ने आत्महत्या कर ली. घटना लखीमपुर खीरी जिले के मैलानी थाना क्षेत्र के कस्बे की है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

  • पत्नी बोली, बैंक वालों ने कहा था कर देंगे कुर्की
  • जिलाधिकारी बोले, नहीं जारी हुई कोई आरसी

किसानों को आर्थिक बदहाली और कर्ज के दलदल से निकालने के लिए सरकार भले ही लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि अन्नदाता इस जाल से निकलने के लिए जान देने को मजबूर है. अब उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से एक किसान के फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने की घटना सामने आई है. दिवंगत किसान की पत्नी ने कहा है कि बैंक वाले घर कुर्क करने की धमकी दे रहे थे, जिससे तंग आकर किसान ने आत्महत्या कर ली.

घटना लखीमपुर खीरी जिले के मैलानी थाना क्षेत्र के कस्बे की है. बताया जाता है कि किसान दीदार सिंह ने इलाहाबाद बैंक की कुकरा शाखा से एक लाख 70 हजार रुपये का कर्ज ले रखा था. बैंक का कर्ज नहीं लौटा पा रहे दीदार सिंह के घर पहुंचकर कर्मचारी अक्सर जलील करते थे. मृतक की पत्नी रजविंदर ने आरोप लगाया कि बैंक के कर्मचारी घर कुर्क करने की धमकी दे रहे थे.

पत्नी ने कहा कि इससे परेशान होकर ही उसके पति ने फांसी लगाकर जान दे दी. जानकारी के अनुसार दीदार के पिता पर भी करीब साढ़े पांच लाख रुपये का लोन बकाया था, जो उनकी मृत्यु के बाद दीदार को ही चुकाना था. इससे दीदार अवसाद में थे.

डीएम ने माना, लोन के लिए बनाते थे दबाव

जिलाधिकारी (डीएम) शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी यह स्वीकार किया कि बैंक के अधिकारी किसान दीदार के घर जाकर लोन अदा करने का दबाव बनाया करते थे. डीएम ने कहा कि दीदार के पास 4.2 एकड़ जमीन है. दीदार के पिता के नाम 8.4 एकड़ जमीन थी. माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है. उन्होंने बताया कि दीदार के पिता पर भी 5.67 लाख रुपये लोन बकाया था. दीदार ने भी 1.5 कर्ज लिया था. कुल 7.42 लाख रुपये का लोन बकाया था.

डीएम ने आरसी जारी नहीं किए जाने का दावा करते हुए कहा कि दीदार ने किन कारणों से आत्महत्या जैसा कदम उठाया, इसकी विस्तृत जांच कराई जा रही है. मोदी सरकार ने किसानों के लिए 6 हजार रुपये वार्षिक सम्मान राशि प्रदान करने का ऐलान किया था. सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में प्रयास करने के भी दावे करती है, लेकिन इन सबके बावजूद किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं. यह सरकार के दावों पर भी सवालिया निशान है.

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