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नीतीश कटारा के हत्यारे विकास यादव को जेल में हो रहा डिप्रेशन, मांगी दो महीने की पैरोल

विकास यादव की तरफ से लगाई गई अर्जी में डिप्रेशन को लेकर किसी भी तरह के कोई दस्तावेज कोर्ट में नहीं दिए गए हैं. न ही विकास यादव ने पैरोल के लिए लगाई गई अर्जी में मनोचिकित्सक के परामर्श की सुविधा मांगी है.

दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल (सांकेतिक तस्वीर) दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल (सांकेतिक तस्वीर)

  • विकास यादव ने कोर्ट से मांगी पैरोल
  • 24 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

नीतीश कटारा केस में उम्र कैद की सजा काट रहे विकास यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में पैरोल देने के लिए अर्जी लगाई है. विकास यादव ने अपनी अर्जी में कहा है कि फिलहाल वह डिप्रेशन का शिकार है, समाज से कई साल से कटा हुआ है, इसीलिए उसे कुछ वक्त जेल से बाहर खुली हवा में सांस लेने के लिए 2 महीने का पैरोल दिया जाए.

हालांकि विकास यादव की तरफ से लगाई गई अर्जी में डिप्रेशन को लेकर किसी भी तरह के कोई दस्तावेज कोर्ट में नहीं दिए गए हैं. न ही विकास यादव ने पैरोल के लिए लगाई गई अर्जी में मनोचिकित्सक के परामर्श की सुविधा मांगी है. विकास यादव की पैरोल के लिए लगाई गई अर्जी पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दो हफ्ते में इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने का वक्त दिया है.

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कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है. हालांकि विकास के वकील की तरफ से इस मामले में जल्द सुनवाई की कोर्ट से मांग की गई लेकिन कोर्ट ने कहा कि इससे पहले इस मामले को नहीं सुना जा सकता. विकास यादव ने पैरोल के लिए लगाई गई अपनी अर्जी में इस बात का भी जिक्र किया है कि कोरोना के चलते कई कैदियों को जमानत या पैरोल पर भी रिहा किया गया है.

वहीं दिल्ली सरकार ने विकास यादव के इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जिन लोगों को भी कोरोना के चलते जमानत पर रिहा किया गया है, उन सभी पर हल्की धाराओं में मामले चल रहे हैं और वो विचाराधीन कैदी हैं. इसके अलावा 31 अगस्त तक ऐसे जमानत पर रिहा किए गए कैदियों को भी वापस जेल में बुलाने की प्रकिया शुरू हो जाएगी. दिल्ली सरकार ने विकास यादव की अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि वो विचाराधीन कैदी नहीं है बल्कि उसे नीतीश कटारा की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा दी गई है.

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विकास यादव ने अपनी अर्जी में डिप्रेशन के साथ-साथ कमर दर्द की शिकायत भी की है. अपनी अर्जी में विकास ने 67 साल की अपनी मां के इलाज के लिए भी पैरोल मांगी है. विकास ने कहा है कि वह पिछले 18 सालों से जेल में बंद है. अब तक उसे एक भी बार जमानत नहीं दी गई है. जिस वक्त उसने नीतीश की हत्या की उस वक्त 30 साल का युवा था लेकिन अब वो 45 साल से ऊपर का प्रौढ़ है.

याचिका में कहा गया है कि उसे दोबारा से समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का एक मौका दिया जाना चाहिए. पिछली बार 2017 में दो दिन के लिए विकास यादव को अपने दादा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दी गई थी. लेकिन वह पैरोल भी कस्टडी पैरोल थी यानी पुलिस उसके साथ हर वक्त मौजूद थी. पिछले तीन साल में विकास यादव ने पैरोल के लिए कई बार दिल्ली सरकार और कोर्ट में अर्जी लगाई है लेकिन हर बार उसकी अर्जी को खारिज कर दिया गया है.

नहीं मिली जमानत

नीतीश कटारा हत्याकांड में विकास यादव पर नीतीश की हत्या के आरोप सही साबित हुए. नीतीश की हत्या के पहले जेसिका लाल हत्याकांड में भी विकास यादव आरोपी था, लेकिन जेसिका लाल हत्याकांड में विकास जमानत पर रिहा हो गया था. इसके बाद उसने नीतीश की हत्या की और निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कहीं से भी विकास यादव को जमानत नहीं मिल पाई.

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